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7 अगस्त- आज ही डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने नेहरू से कहा था- "धारा 370 मत लगाओ, वरना होंगे भयानक परिणाम.. पर नेहरू हंसते रहे

दूरदृष्टा डॉक्टर मुखर्जी ने आज ही बता दिया था कश्मीर का इतिहास जो सच साबित हुआ.

Rahul Pandey
  • Aug 7 2020 6:06AM
ये संयोग ही है कि कल ही धारा 370 से सम्बन्धित बिल लोकसभा में पास हुआ और आज ही इतिहास दोहरा उठा . आज श्यामा प्रसाद जी को याद करने वालों के लिए ये दिन विशेष भी हो जाएगा क्योकि उन्होंने आज के ही दिन इस धारा की खुली खिलाफत की थी जिसको नेहरु ने गंभीरता से नहीं लिया और उस समय धारा 370 हटाने के बजाय सीधे सीधे श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को निशाने पर ले लिया था और उनका निशाना उनके बलिदान के बाद ही जा कर खत्म हुआ था . यद्दपि अमित शाह के अटल संकल्प ने उसको धो दिया.

इनके नाम को तो दबाया ही गया इनके कामों को भी दबाया गया . ये दूरदृष्टा थे , इन्हे पता था की जिस नीति पर उस समय की तुष्टिकरण की सरकार चल रही थी उस नीति पर आने वाले समय में उसका अंजाम क्या होगा . आज बार बार पाकिस्तान की घुसपैठ और कश्मीर के लोगों का ही सेना के खिलाफ रक्तरंजित संघर्ष निश्चित तौर पर टाला जा सकता था अगर आज ही के दिन श्यामा प्रसाद मुखर्जी की उठी आवाज को जवाहर लाल नेहरू ने गंभीरता से लिया होता तो .. लेकिन उन्होंने बस बातों को मज़ाकिया अंदाज़ में हंस कर टाल दिया और वही टालना बन गया था देश के कई कश्मीरी हिन्दुओ और जांबाज़ सैनिको का काल.

ज्ञात हो की अगर इतिहास के पन्नो में झाँका जाय तो आज ही के दिन डा. मुखर्जी ने 7 अगस्त 1952 को लोकसभा में एक जोरदार भाषण दिया और राष्ट्रीय एकता से संबंधित कई ऐसे प्रश्रों को उभारा जिनका श्री नेहरू और कई अन्य के पास कोई उत्तर न था। इस भाषण को अंग्रेजी के एक दैनिक समाचार पत्र ने इस सुर्खी के साथ प्रकाशित किया : बंगाल के शेर की संसद में गर्ज (Bengal Lion Roars in Parliament) इस भाषण में डा. मुखर्जी ने कई प्रश्नों को प्रमुखता से उभारा था.

उन्होंने उस समय जिन प्रश्नों को उभारा उनमें यह भी शामिल था कि अगर भारत का संविधान देश के करोड़ों लोगों के लिए लाभदायक हो सकता है तो कश्मीर के कुछ लाख लोगों के लिए हानिकारक कैसे बन सकता है? उन्होंने यह भी कहा कि विचित्र बात है कि कश्मीर के लोगों को देश के सभी भागों में समान अधिकार प्राप्त होंगे किन्तु शेष भारत के लोगों को अधिकार तो दूर की बात, वहां जाने के लिए वीजा प्राप्त करना पड़ेगा.

डा. मुखर्जी के इन प्रश्नों का कोई उत्तर न था। अंतत: श्री नेहरू को यह कहना पड़ा कि राज्य के लोगों को अलग दर्जा देने वाली धारा 370 समय के साथ घिसते-घिसते घिस जाएगी। किन्तु इसे विडम्बना ही कहना चाहिए कि छ: दशकों से भी अधिक का समय बीत जाने के पश्चात भी यह अस्थायी धारा भारत के संविधान में मौजूद थी और अलगाववाद के स्वर ऊंचा करने वाले इस धारा को राज्य और भारत के बीच एक पुल का दर्जा देने में लगे थे। इनमें कई कांग्रेसी नेता भी शामिल थे जो इसको हटाए जाने का विरोध कर रहे हैं ।

लोकसभा में अपने लाजवाब विचारों को प्रकट करने के पश्चात डा. मुखर्जी ने स्वयं जम्मू में आकर परिस्थितियों का जायजा लेना चाहा क्योंकि लोगों के साथ अन्याय से संबंधित कई शिकायतें उनके पास पहुंच रही थीं और पं. प्रेमनाथ डोगरा श्यामा बाबू के साथ लगातार सम्पर्क बनाए हुए थे। लेकिन बाद में उनकी जेल में संदिग्ध मौत हो गयी जिसका असली इतिहास आज तक किसी को नहीं पता चला है. आज उस दिन को हुई ऐतिहासिक भूल को करने वाले और उसको याद दिलाने वाले दोनों को याद करने का समय है और विचार करने का समय है की किस ने देश के लिए क्या किया.

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1 Comments

We are remembring from several years and will remember in future.. Many Contribution to the Nation. They were first VC of Bengal Universsity. After that the Responsible Guardianof B.Jan Sangh.Again the first Industries MinisterofNehru Ji Cabinet.They against the act370.After SometimestheyWent to JK.But Theywere arrestedand jail.They were found died.Nehru and Shekh Abdudullah ke Concocted meApne Balidan DekarBhharat ko Sahi Disha dene ka karya kiya.Kotishah Naman to Great man of India.

  • Guest
  • Aug 7 2020 4:09:33:323PM

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