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27 मार्च- आज ही सूली पर चढ़े थे क्रांतिवीर पंडित काशीराम जी..अंग्रेजो के आगे दुश्मन बना कर खड़ा कर दिया था उनके ही सैनिको को लेकिन पंडित उपनाम से सबसे अधिक चर्चा में रहे नेहरु

जानिये वो विस्मृत इतिहास जो अब तक नही आया सामने.

Rahul Pandey
  • Mar 27 2021 5:14PM

जब भी किसी चर्चित व्यक्ति के नाम के साथ पंडित उपनाम का मंथन किया जाएगा तो निसंदेह सबसे पहले नाम सोच में आयेगा जवाहरलाल नेहरु का.. अनगिनत किताबे, अनगिनत शिलालेख और तमाम अन्य तथ्य इस के प्रमाण के तौर जोड़ दिए गये हैं और हर किसी के मुह से पंडित नेहरू नाम निकलता है. इसमें वामपंथी साजिशकर्ताओ का रोल सबसे अधिक अहम है.

लेकिन पंडित नाम से आज़ादी के एक महायोद्धा को विस्मृत करने का षड्यंत्र रचा गया जो काफी हद तक सफल भी रहा... जिन्हें अमरता को प्राप्त करना था वो कर गये लेकिन उनके पीछे होते रहे अपराध जिन्हें किया उन तथाकथित झोलाछाप इतिहासकारों ने जिन्होंने माना कि आज़ादी एक घर के आस पास से ही घूम कर आई है.

उन नकली बुद्धिजीवियों ने जिन्होंने धर्मनिरपेक्षता के नाम पर केवल हिंदुत्व के खिलाफ झंडा बुलंद रखा और उन तथाकथित सेकुलरों ने जिन्होंने माना कि आज़ादी बंदूक और रक्त से नहीं बस चरखे के अन्दर से निकली है .. सबसे बड़ा पहलू ये भी है की इसको कईयों ने सही भी मान लिया था. 

कई ऐसे सूरमा जिन्हें आज जनता जानती तो भारत होता ऐसा देश जिसमे हर बच्चा होता सैनिक .. पर अफ़सोस वो बलिदान देते रहे और कुछ गद्दारी करते रहे जो आज भी जारी है . उन ज्ञात अज्ञात वीरों में से एक हैं आज ही अमरता को प्राप्त हुए पंडित काशीराम जी . 

पंडित कांशीराम ग़दर पार्टी के प्रमुख नेता और देश की स्वाधीनता के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिये थे। पंडित कांशीराम का जन्म 1883 ई. में पंजाब के अंबाला ज़िले में हुआ था। मैट्रिक पास करने के बाद उन्होंने तार भेजने प्राप्त करने का काम सीखा और कुछ दिन अंबाला और दिल्ली में नौकरी की , कुछ समय बाद ये वीर योद्धा अमेरिका पहुच गया था ..

माना जाता है कि अमेरिका से ही शुरू हुआ था इस वीर का क्रान्तिकारी जीवन । आजीविका के लिए पंडित कांशीराम ने ठेकेदारी का काम किया। साथ ही वे 'इंडियन एसोसिएशन ऑफ अमेरिका' और 'इंडियन इंडिपैंडेंट लीग' में शामिल हो गए। उनके ऊपर लाला हरदयाल का बहुत प्रभाव पड़ा। 

वे संगठन भारत को अंग्रेजों की चुंगल से छुड़ाने के लिए बनाए गए थे। 1913 में पंडित कांशीराम 'ग़दर पार्टी' के कोषाध्यक्ष बन गए। जिस समय यूरोप में प्रथम विश्वयुद्ध के बादल मंडरा रहे थे, ग़दर पार्टी ने निश्चय किया कि कुछ लोगों को अमेरिका से भारत वापस जाना चाहिए। वे वहां जाकर भारतीय सेना में अंग्रेजों के विरुद्ध भावनाएँ भड़काएँ।

इस काम को अपने कंधों पर लेने का जिम्मा इस वीर योद्धा ने लिया . अंग्रेजो की सेना में घुस कर उनके ही खिलाफ उनके ही वेतन से घर चला रहे भारतीय फौजियों को भड़काना आसान नहीं था लेकिन पंडित काशीराम जी भारत माता को आजाद करवाने के लिए हर खतरा मोल लेने को तैयार थे.

इसी योजना के अंतर्गत पंडित कांशीराम भी भारत आए। उन्होंने सेना की कई छावनियों की यात्रा की और सैनिकों को अंग्रेजों की सत्ता उखाड़ फेंकने के लिए प्रेरित किया। कांशीराम और उनके साथियों ने अपने कार्य के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से मोगा का सरकारी कोषागार लूटने का असफल प्रयत्न भी किया। इसी सिलसिले में एक सब इंस्पेक्टर और एक जिलेदार इनकी गोलियों से मारे गए।

कांशीराम और उनके तमाम साथी पकड़े गए, उन सब पर मुकदमा चला और आज ही के दिन अर्थात 27 मार्च, 1915 को इस योद्धा कांशीराम को फाँसी दे दी गई। आज अमरता को प्राप्त हुए उस महायोद्धा को सुदर्शन परिवार बारम्बार नमन करते हुए उनकी गौरवगाथा को सदा सदा के लिए अमर रखने का संकल्प लेता है और जनता को सदा बताता रहेगा की आज़ादी सिर्फ चरखे से नहीं बन्दूकों से भी आई है .

धर्म के रक्षक और राष्ट्र के महायोद्धा वीर पंडित कांशीराम जी अमर रहें .

 

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5 Comments

पण्डित काशीराम अमर रहे

  • Guest
  • Mar 30 2021 4:27:09:873PM

पण्डित काशीराम अमर रहे

  • Guest
  • Mar 30 2021 4:24:53:460PM

Please make provisions to share articles on whatsapps, facebook and other social media..

  • Guest
  • Mar 29 2021 12:00:20:030PM

Jay hind

बहुत बढिया जी

  • Guest
  • Mar 27 2021 5:23:06:283PM

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