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अब बाल विवाह रजिस्ट्रेशन बिल वापस लेगी गहलोत सरकार...... सुदर्शन ने प्रमुखता से उठाया था इस मुद्दे को

आपको बता दें 17 सितंबर को ही विधानसभा में शादियों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण संशोधन बिल को पारित किया गया था. इसमें बाल विवाह के भी रजिस्ट्रेशन करने का प्रावधान है. विवाद के बाद इस बिल को फिलहाल राज्यपाल ने फिलहाल रोक रखा है.

Prem Kashyap Mishra
  • Oct 12 2021 4:46PM

राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार अब बाल विवाह रजिस्ट्रेशन बिल वापस लेने के विचार में है क्यूंकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है कि इस बिल के वजह से कंट्रोवर्सी पैदा हो गई है. आपको बता दें इस मामले को सुदर्शन न्यूज़ ने बड़ी प्रमुखता से उठाया था.  मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस पर हुए वर्चुअल समारोह में कहा- ‘राजस्थान में एक कंट्रोवर्सी पैदा हो गई कि बाल विवाह का रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं.

विधानसभा में विवाह रजिस्ट्रेशन बिल पारित हुआ है. यह प्रतिष्ठा का सवाल नहीं है, हम विधि विभाग से इसे दिखवा रहे हैं. गवर्नर साहब से निवेदन है कि विवाह रजिस्ट्रेशन वाला बिल सरकार को वापस भेज दें. हम इसे दिखवा लेंगे, हमने पहले भी इस पर कानूनी राय ली है. आगे कानूनी राय अगर विपरीत आएगी, तो हम इसे आगे नहीं बढ़ाएंगे.’  गहलोत ने सफाई में आगे कहा- यह तो सुप्रीम कोर्ट का फैसला था कि हर शादी का रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी है.

मुझे उम्मीद है कि जो कानूनी राय ली जा रही है और आगे भी लेंगे. राजस्थान में किसी कीमत पर बाल विवाह नहीं हो यह सुनिश्चित किया जाएगा, इसमें कोई कंप्रोमाइज नहीं किया जाएगा. इस विधेयक को अध्ययन के लिए कानूनविदों को दिया जाएगा और उनकी सलाह के आधार पर इसे आगे बढ़ाने या नहीं बढ़ाने का फैसला किया जाएगा. गहलोत ने कहा कि यह सरकार का संकल्प है कि राजस्थान में बाल विवाह किसी भी कीमत पर न हो.

आपको बता दें 17 सितंबर को ही विधानसभा में शादियों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण संशोधन बिल को पारित किया गया था. इसमें बाल विवाह के भी रजिस्ट्रेशन करने का प्रावधान है. विवाद के बाद इस बिल को फिलहाल राज्यपाल ने फिलहाल रोक रखा है. अब सीएम गहलोत ने इस बिल को राजभवन से वापस मंगवाने की घोषणा की है. भाजपा और अधिकार कार्यकर्ताओं ने ‘राजस्थान अनिवार्य विवाह पंजीकरण विधेयक 2021’ में एक प्रावधान पर आपत्ति जताई थी, जिसमें दूल्हा और दुल्हन को शादी के बंधन में बंधने के लिए कानूनी उम्र नहीं होने पर भी शादी के पंजीकरण की अनुमति दी गई है.

बाल विवाह के रजिस्ट्रेशन से जुड़े प्रावधान वाले बिल पर 17 सितंबर को विधानसभा में भी भारी हंगामा हुआ था. बीजेपी ने इस बिल के विरोध में सदन से वॉकआउट किया था. बीजेपी शुरू से ही इस बिल को वापस लेने की मांग कर रही है. इस बिल को लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने राजस्थान सरकार को पिछले दिनों चिट्ठी लिखी थी. आयोग ने विधेयक के प्रावधानों पर फिर से विचार करने और समीक्षा करने को कहा था. इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई है. कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इसका विरोध किया है.

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