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हिंदू कुलभूषण चक्रवर्ती सम्राट पृथ्वीराज चौहान जी की जयंती पर शत शत नमन.. किस पर दया दिखानी है किस पर नहीं, आज शिक्षा लें उनके इतिहास से

जानिए उनका गौरवशाली अतीत जो आपको देगा बहुत बड़ी शिक्षा..

Sudarshan News
  • May 19 2020 10:55AM

पृथ्वीराज चौहान भारतीय इतिहास मे एक बहुत ही अविस्मरणीय नाम है. हिंदुत्व के योद्धा कहे जाने वाले चौहान वंश मे जन्मे पृथ्वीराज आखिरी हिन्दू शासक भी थे. महज 11 वर्ष की उम्र मे, उन्होने अपने पिता की मृत्यु के पश्चात दिल्ली और अजमेर का शासन संभाला और उसे कई सीमाओ तक फैलाया भी था, परंतु अंत मे वे विश्वासघात  के शिकार हुये और अपनी रियासत हार बैठे, परंतु उनकी हार के बाद कोई हिन्दू शासक उनकी कमी पूरी नहीं कर पाया . पृथ्वीराज को राय पिथोरा भी कहा जाता था . पृथ्वीराज चौहान बचपन से ही एक कुशल योध्दा थे, उन्होने युध्द के अनेक गुण सीखे थे. उन्होने अपने बाल्यकाल से ही शब्ध्भेदी बाण विद्या का अभ्यास किया था.

पृथ्वीराज चौहान का जन्म : 
      
       धरती के महान शासक पृथ्वीराज चौहान का जन्म 1149 मे हुआ. पृथ्वीराज अजमेर के महाराज सोमेश्र्वर और कपूरी देवी की संतान थे. पृथ्वीराज का जन्म उनके माता पिता के विवाह के 12 वर्षो के पश्चात हुआ. यह राज्य मे खलबली का कारण बन गया और राज्य मे उनकी मृत्यु को लेकर जन्म समय से ही षड्यंत्र रचे जाने लगे, परंतु वे बचते चले गए. परंतु मात्र 11 वर्ष की आयु मे पृथ्वीराज के सिर से पिता का साया उठ गया था, उसके बाद भी उन्होने अपने दायित्व अच्छी तरह से निभाए और लगातार अन्य राजाओ को पराजित कर अपने राज्य का विस्तार करते गए.

   पृथ्वीराज के बचपन के मित्र चंदबरदाई उनके लिए किसी भाई से कम नहीं थे. चंदबरदाई तोमर वंश के शासक अनंगपाल की बेटी के पुत्र थे . चंदबरदाई बाद मे दिल्ली के शासक हुये और उन्होने पृथ्वीराज चौहान के सहयोग से पिथोरगढ़ का निर्माण किया, जो आज भी दिल्ली मे पुराने किले नाम से विद्यमान है.

पृथ्वीराज चौहान और कन्नोज की राजकुमारी संयोगिता 

   पृथ्वीराज की बहादुरी के किस्से जब जयचंद की बेटी संयोगिता के पास पहुचे तो मन ही मन वो पृथ्वीराज से प्यार करने लग गयी और उससे गुप्त रूप से काव्य पत्राचार करने लगी | संयोगिता के पिता जयचंद को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने अपनी बेटी और उसके प्रेमी पृथ्वीराज को सबक सिखाने का निश्चय किया |

   जयचंद ने अपनी बेटी का स्वयंवर आयोजित किया जिसमे हिन्दू वधु को अपना वर खुद चुनने की अनुमति होती थी और वो जिस भी व्यक्ति के गले में माला डालती वो उसकी रानी बन जाती | जयचंद ने देश के सभी बड़े और छोटे राजकुमारों को शाही स्वयंवर में साम्मिलित होने का न्योता भेजा लेकिन उसने जानबुझकर पृथ्वीराज को न्योता नही भेजा | यही नही बल्कि पृथ्वीराज को बेइज्जत करने के लिए द्वारपालों के स्थान पर पृथ्वीराज की मूर्ती लगाई |

 पृथ्वीराज को जयचंद की इस सोची समझी चाल का पता चल गया और उसने अपनी प्रेमिका सयोंगिता को पाने के लिए एक गुप्त योजना बनाई | स्वयंवर के दिन सयोंगिता सभा में जमा हुए सभी राजकुमारों के पास से गुजरती गयी | उसने सबको नजरंदाज करते हुए मुख्य द्वार तक पहुची और उसने द्वारपाल बने पृथ्वीराज की मूर्ति के गले में हार डाल दिया | सभा में एकत्रित सभी लोग उसके इस फैसले को देखकर दंग रह गये क्योंकि उसने सभी राजकुमारों को लज्जित करते हुए एक निर्जीव मूर्ति का सम्मान किया |

    लेकिन जयचंद को अभी ओर झटके लगने थे | पृथ्वीराज उस मूर्ति के पीछे द्वारपाल के वेश में खड़े थे और उन्होंने धीरे से संयोगिता को उठाया और अपने घोड़े पर बिठाकर द्रुत गति से अपनी राजधानी दिल्ली की तरफ चले गये |जयचंद और उसकी सेना ने उनका पीछा किया और परिणामस्वरूप उन दोनों राज्यों के बीच 1189 और 1190 में भीषण युद्ध हुआ जिसमे दोनों सेनाओ को काफी नुकसान हुुुआ।

पृथ्वीराज की विशाल सेना :

        पृथ्वीराज की सेना बहुत ही विशालकाय थी, जिसमे 3 लाख सैनिक और 300 हाथी थे. कहा जाता है कि उनकी सेना बहुत ही अच्छी तरह से संगठित थी, इसी कारण इस सेना के बूते उन्होने कई युध्द जीते और अपने राज्य का विस्तार करते चले गए. परंतु अंत मे कुशल घुड़ सवारों की कमी और जयचंद्र की गद्दारी और अन्य राजपूत राजाओ के सहयोग के अभाव मे वे मुहम्मद गौरी से द्वितीय युध्द हार गए.

मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज का युद्ध-

  जानकारों के अनुसार  मोहम्मद गोरी ने 18 बार पृथ्वीराज पर आक्रमण किया था, जिसमें 17 बार उसे पराजित होना पड़ा। जन जन की जुबान पर ये भी है की हर बार मोहम्मद गोरी  अपनेे परिवार से लेकर  मजहबी मान्यताओं तक की कसम व दुहाई देते हुए  पृथ्वीराज चौहान के हाथों  मृत्युुु से बचता रहा ।  बार-बार  दयालु आ सहृदय पृथ्वीराज चौहान  मोहम्मद गौरी को क्षमा करते रहे  और उसे जीवन दान देते रहे  लेकिन हर बार मोहम्मद गोरी हर बार एक नई साजिश  एक नए षड्यंत्र के साथ  पृथ्वीराज चौहान पर हमला करता रहा  और आखिरकार अंतिम युद्ध में  वह अपने नापाक मंसूबों में सफल रहा। पृथ्वीराज चौहान से दर्जनों अवसर पानेेेेे वा मोहम्मद गोरी ने  उन्हें एक अवसर भी नहीं दिया. यद्द्पि युद्ध मे पृथ्वीराज के साथ की गई तत्कालीन हिंदू राजाओं की गद्दारी  देश आज तक भुगत रहा है  और आगे कब तक भुगतेगा यह निश्चित नहीं।

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17 Comments

Don*t teach to father 🙏🙏 सम्राट पृथ्वीराज सिंह चौहान चंद्रवंशी

  • Guest
  • May 20 2020 11:22:05:007PM

साला मेरी ये समझ में नहीं आता कि सब हमें बाप बनाने पर तुले हैं

  • Guest
  • May 20 2020 11:00:14:860PM

गुज्जर नहीं राजपूत थे राजपूत भेंस चोरो

  • Guest
  • May 20 2020 10:58:47:120PM

जय राजपूताना जय पिथोरा

  • Guest
  • May 20 2020 10:56:31:177PM

जय गुर्जर सम्राट पृथ्वीराज चौहान💪💪

  • Guest
  • May 20 2020 10:55:05:457PM

Bhai chandarbardiye kavi tha or vo ak barhman tha ...soch smj k likha kro

  • Guest
  • May 20 2020 10:35:51:350PM

Ye chote chote raja gaddar hote the sale kat mullo k haato bik jate the

  • Guest
  • May 20 2020 5:42:58:810PM

aap yadi sahi or puri jankari nhi de sakte to aadhuri jankari bhi na de

  • Guest
  • May 20 2020 2:24:10:723PM

Jai Prithviraj Chauhan 🚩.. muhhmad Gauri ammi ka bhosda

  • Guest
  • May 19 2020 9:34:52:913PM

"इसमे मोहम्मद गोरी का वध पृथ्वीराज चौहान द्वारा किया गया उसकी जानकारी क्यो नही है चार बाँस चौबीस गज अंगुल अष्ट प्रमाण ता ऊपर सुल्तान है मत चुके चौहान" आप देश के लोगो को आधी अधूरी व ग़लत जानकरी न देंगे तो अच्छा होगा धन्यवाद

  • Guest
  • May 19 2020 9:15:34:757PM

"इसमे मोहम्मद गोरी का वध पृथ्वीराज चौहान द्वारा किया गया उसकी जानकारी क्यो नही है चार बाँस चौबीस गज अंगुल अष्ट प्रमाण ता ऊपर सुल्तान है मत चुके चौहान" आप देश के लोगो को आधी अधूरी व ग़लत जानकरी न देंगे तो अच्छा होगा धन्यवाद

  • Guest
  • May 19 2020 9:12:44:060PM

bhosadi walo isme padh lo

  • Guest
  • May 19 2020 7:08:03:390PM

पृथ्वीराज चौहान राजपूत थे की गुजर थे।,,जरा इन्फॉर्मेशन दिजीए

  • Guest
  • May 19 2020 6:22:05:440PM

Bhakt hi h bhai....tu kya gori ki olad h kya bc*....tum jese log hi hote ho piche se war karne wale...Jai ho Prathvi Raj Chouhan ki....Jai Rajputana.

  • Guest
  • May 19 2020 2:55:52:363PM

bhakt ho kya ji? kisi samay raja na apni janta ke liye naa hi apne dharm ke liye haarta ya jitatata...satta aur dhan ka lalach ye karwata ...so hindu muslim ka gobar leke dimaag me likhne se ...yahi nikalta hai

  • Guest
  • May 19 2020 2:00:06:717PM

nice article I loved it https://www.worldinfonews.net/

  • Guest
  • May 19 2020 1:35:55:750PM

जयचंद ने क्या गद्दारी की थी ? क्यों एक शिव और बौद्ध भक्त राजा को बदनाम करते हो

  • Guest
  • May 19 2020 1:25:08:890PM

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