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लुटेरे मोहम्मद गोरी का साथ देने वाले जयचंद का अंत और भी था दर्दनाक.. पृथ्वीराज को फिर भी वीरगति मिली थी 4 बांस 24 ग़ज़ से गोरी को मार कर

किसी को मिली थी वीरगति तो किसी को मिली थी दुर्गति..

Sudarshan News
  • May 20 2020 12:14AM

जयचंद के मन मे पृथ्वीराज के लिए कटुता बडती चली गयी तथा उसने पृथ्वीराज को अपना दुश्मन बना लिया. वो पृथ्वीराज के खिलाफ अन्य हिन्दू राजाओ को भी भड़काने लगा. जब उसे मुहम्मद गौरी और पृथ्वीराज के युध्द के बारे मे पता चला, तो वह पृथ्वीराज के खिलाफ मुहम्मद गौरी के साथ खड़ा हो गया| दोनों ने मिलकर 2 साल बाद सन 1192 मे पुनः पृथ्वीराज चौहान पर आक्रमण किया. यह युध्द भी तराई के मैदान मे हुआ. इस युध्द के समय जब पृथ्वीराज के मित्र चंदबरदाई ने अन्य राजपूत राजाओ से मदत मांगी, तो संयोगिता के स्व्यंबर मे हुई घटना के कारण उन्होने ने भी उनकी मदत से इंकार कर दिया. ऐसे मे पृथ्वीराज चौहान अकेले पढ़ गए और उन्होने अपने 3 लाख सैनिको के द्वारा गौरी की सेना का सामना किया ।।

क्यूकि गौरी की सेना मे कई गड्डार भी थे,  पृथ्वीराज की सेना को चारो ओर से घेर लिया| गया.ऐसे मे वे न आगे पढ़ पाये न ही पीछे हट पाये. और जयचंद्र के गद्दार सैनिको ने हिन्दू सैनिको का ही संहार किया और पृथ्वीराज की हार हुई. युध्द के बाद पृथ्वीराज और उनके मित्र चंदबरदाई को बंदी बना लिया गया . राजा जयचंद्र को भी उसकी गद्दारी का परिणाम मिला और उसे भी मार डाला गया. अब पूरे पंजाब, दिल्ली, अजमेर और कन्नोज मे गौरी का शासन था, इसके बाद मे कोई हिन्दू शासक भारत मे अपना राज लाकर अपनी वीरता साबित नहीं कर पाया .

पृथ्वीराज चौहान की वीरगति-

      अंतिम  युद्ध में गद्दारी के चलते पराजित होने के पश्चात्  मोहमद गौरी ने पृथ्वीराज की आँखे गर्म सलाखों से जला देने का आदेश दिया और पृथ्वीराज को यातनाएं देने लगा ।चन्दवरदाई ने पृथ्वीराज को उनके साथ हुए अत्याचारों का बदला लेने को कहा |उन दोनों को एक मौका मिला जब गौरी ने तीरंदाजी का खेल आयोजित किया | चन्दवरदाई की सलाह पर पृथ्वीराज ने गौरी से इस खेल में सामिलित होने की इच्छा जाहिर की | पृथ्वीराज की ये बात सुनकर गौरी के दरबारी खिक खिलाकर हंसने लगे कि एक अँधा कैसे तीरंदाजी में हिस्सा लेना चाहता है | पृथ्वीराज ने मुहम्मद गौरी से कहा कि या तो वो उसे मार दे या फिर खेल में हिस्सा लेने दे |

चन्दरवरदाई ने पृथ्वीराज की और से गौरी को कहा कि एक राजा होने के नाते वो एक राजा के आदेश की मान सकता है | मुहम्मद गौरी के जमीर को चोट लगी और वो राजी हो गया |बताये हुए दिन गौरी अपने सिंहासन पर बैठा हुआ था और पृथ्वीराज को मैदान में लाया गया | पृथ्वीराज को उस समय पहली बार बेडियो से मुक्त किया गया | गौरी ने पृथ्वीराज को तीर चलाने का आदेश दिया जिससे पृथ्वीराज को गौरी की दिशा के पता चल गया और चन्दरवरदाई ने बड़ी होशियरी से अपना  दोहा पड़ा

"चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण
ता उपर सुल्तान है,मत चूको चौहान।।"

जिससे पृथ्वीराज को गौरी की दूरी और ऊंचाई का पता चल गया।

पृथ्वीराज के अचानक हमले ने गौरी को मौत के घाट उतार दिया और दिल्ली पर सबसे ज्यादा समय तक राज करने वाले अंतिम हिन्दू शाषक को गौरी के मंत्रियों ने हत्या कर दी | उन्होंने पृथ्वीराज के शव को हिन्दू रीती रिवाजो के अनुसार क्रियाकर्म नही करने दिया और उनके शव को दफना दिया | उन्होने पृथ्वीराज की कब्र पर थूकने और अपमानित करने की परम्परा नही छोड़ी जो आज भी वहा प्रचलित है | इस तरह एक महान हिन्दू शाशक का अंत हुआ और इसके बाद अगले 700 वर्ष तक भारत मुस्लिमो के अधीन रहा जब तक की ब्रिटिश सरकार नही आयी |

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