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ऐसा 'शेर' जिसकी दहाड़ सुन डर गया था दुश्मन... माँ भारती की सेवा में जीवन समर्पित करने वाला CDS बिपिन रावत जी के पुण्यतिथि पर शत-शत नमन

जनरल बिपिन रावत देश के पहले रक्षा प्रमुख या चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ थे

Sumant Kashyap
  • Dec 8 2023 11:14AM

देश के पहले चीप ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत जी ने पूरी जिंदगी इस उक्ति को जिया, लेकिन वे मौत के मुकाबले हार गए. दरअसल, देश के सर्वस्व न्योछावर करने वाले जनरल बिपिन रावत के  8 दिसंबर 2021 को हेलीकॉप्टर हादसे में मौत हो गई थी. 

CDS बिपिन रावत जी का पूरा नाम बिपिन लक्ष्मण सिंह रावत जी था. उनका जन्म 16 मार्च 1958 को उत्तर प्रदेश के गढ़वाल जिले के पौड़ी (वर्तमान में उत्तराखंड का पौड़ी गढ़वाल जिला) में हुआ था. बता दें कि बिपिन रावत जी का परिवार कई पीढ़ियों से भारतीय सेना में सेवा दे रहा था. उनके पिता लक्ष्मण सिंह राजपूत पौड़ी गढ़वाल जिले के सैंजी गांव से थे और लेफ्टिनेंट जनरल के पद से रिटायर हुए थे. उनकी मां उत्तरकाशी जिले से थीं और उत्तरकाशी विधानसभा से विधायक रह चुके किशन सिंह परमार की पुत्री थीं. बिपिन रावत जी की पत्नी मधुलिका रावत थीं. उनकी दो बेटियां हैं.

जानकारी के लिए बता दें कि चीन की चालाकियों और धमकी के विरुद्ध एक सशक्त भारतीय चेहरा जनरल रावत एक ऐसे फौजी थे, जिसने तमगे अपने सीने पर पहने, लेकिन अपने दिमाग को हमेशा ठंडा और जमीन पर रखा. बता दें कि वे हमेशा जमीनी सचाई से वाकिफ रहे. एक सोचने विचारने वाला जनरल, जो दुश्मन की सोच को समझने और उससे एक कदम आगे जाकर उसे सख्त सबक सिखाने का माद्दा रखता था.

जिसने सचाई को कभी शाब्दिक आडंबर से ढकने की कोशिश नहीं की. जो सही है, जो सत्य है, वे उस पर अडिग और अविचल रहे. जनरल रावत जी ने भारतीय सेना का वह रसूख पैदा किया, जिसकी सख्त जरूरत थी. जिस चीन से पूरे एशिया में टक्कर लेने के लिए अमेरिका भारत के नाम का जाप कर रहा है, इस नई बदली कहानी के एक लेखक जनरल रावत जू भी रहे. उनके कार्यकाल में भारत-अमेरिकी संबंधों में काफी प्रगाढ़ता आई. उन्होंने हर बाधा पार की, ससम्मान पार की. कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35ए के हटने के बाद तमाम शंकाओं को निर्मूल साबित किया भारतीय फौज ने.

जनरल रावत की शुरुआती शिक्षा देहरादून के कैंबरीन हॉल स्कूल और शिमला के सेंट एडवर्ड स्कूल में हुई. इसके बाद उन्होंने खडकवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में दाखिला लिया. फिर भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून से फर्स्ट क्लास स्नातक की उपाधि प्राप्त की.

उन्होंने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन से भी ग्रेजुएशन की. उन्होंने फोर्ट लेवेनवर्थ, कन्सा, स्थित यूनाइटेड स्टेट्स आर्मी कमांड एंड जनरल स्टाफ कॉलेज से 1997 में उपाधि ग्रहण की थी. बाद में उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन विषय में एम.फ़िल. की उपाधि और प्रबंधन एवं कंप्यूटर अध्ययन में डिप्लोमा लिया. वर्ष 2011 में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से इन्हें सैन्य मीडिया अध्ययन के क्षेत्र में शोध के लिए पीएचडी की मानद उपाधि दी गई थी.

बिपिन रावत ने 11वीं गोरखा राइफल की 5वीं बटालियन से 1978 में अपना करियर शुरू किया था. उन्होंने जनवरी 1979 में सेना में मिजोरम में पहली पोस्टिंग पाई. नेफा इलाके में तैनाती के दौरान उन्होंने बटालियन की अगुवाई की.

कांगो में यूनाइटेड नेशंस की पीसकीपिंग फोर्स की भी अगुवाई की थी. 1 सितंबर 2016 को सेना के उप-प्रमुख का पद संभाला. 31 दिसंबर 2016 को सेना प्रमुख बने. 1 जनवरी 2021 को सीडीएस के पद पर आसीन हुए.


 

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