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सुप्रीम कोर्ट का नोटिस अदालत ने नेपाल की सरकार को 15 दिनों के अंदर नोटिस का जवाब देने को कहा है.

भारत में नेपाल के कामगारों को लेकर सवाल, सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

Gaurav Mishra
  • Jul 15 2020 11:42PM

भारत नेपाल के रिश्तो के बीच सुप्रीम कोर्ट भी तल्ख हो चुका है सुप्रीम कोर्ट के तरफ से जारी एक फरमान में निम्नलिखित बातों के तरफ ध्यान आकर्षित किया गया है अगर नेपाल की बात करें तो नेपाल के तमाम नेपाली लोग भारत समेत देश के विभिन्न हिस्सों में काम कर रहे हैं रोजगार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कुछ सख्त दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं

देखिए इस रिपोर्ट में

 

नेपाल की सरकार ने अपने नागरिकों को दुनिया के 170 देशों में रहने और काम करने की इजाज़त दे रखी है.  नेपाल ने कई देशों से श्रम समझौतों पर दस्तख़त किए हैं.

नेपाल ने विदेशी रोज़गार फंड भी बनाया है, जिसके तहत विदेशों में काम कर रहे नेपाली नागरिकों के ज़ख़्मी होने या उनकी मौत होने पर उनके परिजनों को मुआवज़ा दिया जाता है.

नेपाली सरकार अपने कामगारों को विदेशी रोज़गार परमिट भी जारी करती है जिसके ज़रिए कोई कामगार 15 लाख नेपाली रुपए तक का बीमा करवा सकता है.लेकिन ये सारे क़ानून और सुविधाएँ नेपाल के उन श्रमिकों पर लागू नहीं होती हैं, जो भारत में आकर काम करते हैं या जो भारतीय नागरिक नेपाल में काम करते हैं.दोनों ही देशों में ऐसे कामगारों की सही जानकारी नहीं है. इससे इस बात की आशंका पैदा हो गई है कि ज़रूरत पड़ने पर इन प्रवासी कामगारों को सुरक्षित प्रवासन या पर्याप्त वित्तीय मुआवज़ा नहीं मिल सकेगा. 

"नेपाली प्रवासी मज़दूरों के लिए भारत भी अन्य देशों की तरह एक विदेशी मुल्क है. लेकिन विदेशी मज़दूर होने का कोई भी दस्तावेज़ी सूबत नहीं होने के कारण ये नेपाली नागरिक किसी भी तरह के मुआवज़े या सुविधा से वंचित रहते हैं, जो दूसरे देशों में काम कर रहे नेपाली कामगारों को मिलता है क़रीब 50 लाख नेपाली लोग विदेशों में काम करते हैं और नेपाल में रह रहे अपने परिवार के ख़र्च के लिए विदेशों से पैसे भेजते हैं. 

विश्व बैंक के 2018 में किए गए एक आकलन के अनुसार भारत में काम कर रहे नेपाली कामगारों ने एक साल में एक अरब 30 लाख अमरीकी डॉलर से ज़्यादा रक़म नेपाल भेजी थी, जबकि नेपाल में काम कर रहे भारतीय कामगारों ने उसी दौरान क़रीब एक अरब 50 लाख अमरीकी डॉलर भारत भेजा था. इस तरह से देखा जाए तो नेपाल भारत में आने वाले कैश फ़्लो (रेमिटेन्स) का एक बड़ा ज़रिया है.अब आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि कितने नेपाली भारत में और कितने भारतीय नेपाल में काम कर रहे हैं.इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ माइग्रेशन (आईओएम) की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार क़रीब 30 से 40 लाख नेपाली कामगार भारत में रहते और काम करते हैं. हालांकि भारतीय अधिकारियों का अनुमान है कि ये संख्या इससे कहीं ज़्यादा है

 

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