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आज सर फ्रैंक वॉरेल का जन्मदिन , वेस्टइंडीज के क्रिकेट को संवारा

फ्रैंक वॉरेल जिसने कायम कि खेल की एक नई परिभाषा

Sudarshan News
  • Aug 1 2020 6:08PM

फ्रैंक वॉरेल वेस्टइंडीज क्रिकट टीम के पहले अश्वेत कप्तान थे। जिसने असल में क्रिकेट को 'जेंटलमेंस गेम' बनाया। वॉरेल ने दुनिया को यह दिखाया कि रंग, रूप, भाषा या राष्ट्रीयता  मायने नहीं रखती, जो चीज असल में  सब से ऊपर हैं वह है इंसानियत।
फ्रैंक को खेल और कप्तान के तौर पर काफी सराहा गया, लेकिन उनमें एक चीज थी,जो उन्हें औरो से अलग बनाती थी और वह थी उनकी देश और समाज के लिए कुछ करने की सोच।

फ्रैंक वॉरेल जिनका जन्म 1 अगस्त 1924 को ब्रिजटाउन बारबाडोस में हुआ। उन्होंने 11 फरवरी 1948 को इंग्लैंड के खिलाफ अपना पहला टेस्ट मैच खेला, अपने क्रिकेट कैरियर में उन्होंने वेस्टइंडीज के लिए कुल 51 टेस्ट मैच खेले जिसमें उन्होंने 49.48 के एवरेज से 3860 रन बनाए, जिसमें 9 शतक और 22 अर्धशतक शामिल है। उन्होंने 15 टेस्ट मैचों में वेस्टइंडीज टीम कि कप्तानी भी संभाली। जिसमें टीम को 9 टेस्ट मैच में जीत मिली।

फ्रैंक वॉरेल ने सर क्लाइव वालकॉट और सर एवर्टन वीक्स के साथ मिल कर दुनिया कि सब से मजबूत बल्लेबाजी क्रम तैयार किया था, जिसे आज भी "थ्री डबल्यू" के नाम से जाना जाना जाता हैं। तीनो ने क्रिकेट में अपने कदम करीब साथ ही रखे थे, जो इस तिकड़ी को और कमाल का बनाती थी। आज यह तीनों क्रिकेट सितारे इस दुनिया में नहीं है, लेकिन आज भी कैरिबियाई क्रिकेट जिस ऊंचाई पर है कहीं ना कहीं उसमे इन तीनों का बड़ा योगदान है।

1962 में जब भारतीय क्रिकेट टीम वेस्टइंडीज के दौरे पर थी, तब पहले दो टेस्ट मैच खेलने के बाद जब भारतीय टीम बारबाडोस के खिलाफ एक कॉलोनी गेम खेला। उस मैच के दौरान वेस्टइंडीज के उस वक़्त के तूफ़ानी गेंदबाज चार्ली ग्रिफिथ कि घातक बाउंसर सीधे आकर भारतीय टीम के कप्तान नारी कॉन्ट्रैक्टर के सिर पर आकर लगीं, वह ज़मीन पर गिर गए जिसके बाद उन्हें तुरंत हॉस्पिटल ले जाया गया जहां। उनका काफी खून बह चुका था उस वक़्त वेस्टइंडीज के कप्तान वॉरेल ने पहल की और दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने भारतीय कप्तान के लिए रक्त दान किया।जिसके बाद भारतीय कप्तान की ऑपरेशन के द्वारा जान बचा ली गई। लेकिन फिर कभी वह टेस्ट क्रिकट नहीं खेल पाए। वॉरेल की उस पहल को दुनिया आज भी याद करती हैं।

फ्रैंक वॉरेल का 1967 में ल्यूकेमिया ( ब्लड कैंसर )
कि वजह से महज 42 साल की उम्र में निधन हो गया। आज भी उनकी याद में बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन ( सिएबी ) 1981 से हर साल अपने स्थापना दिवस 3 फरवरी को "सर फ्रैंक वॉरेल दिवस" के रूप में मनाता हैं। इस दिन सिएबी रक्त दान करने के लिए शिविर का आयोजन करता है।

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