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दिल्ली में लकड़ी में जलाकर कोविड़19 से संक्रमित शवों की अंत्येष्टि का फैसला कितना सही ?

ये फैसला अंत्येष्टि स्थलों पर काम करने वालों एवं वहाँ आने वालों के लियें खतरनाक हो सकता है

Namit Tyagi
  • May 27 2020 3:36PM

जब दिल्ली में कोरोना वॉयरस का संक्रमण प्रारम्भ हुआ तब दिल्ली सरकार ने नियम बनाया की सभी हिन्दू सिख आदि जिनके शव लकड़ी में जला कर अंत्येष्टि होती है उनकी अंत्येष्टि स्वास्थ सुरक्षा को देखते हुए CNG प्रणाली से होगी दिल्ली सरकार के फैसले को उस वक़्त सभी ने स्वीकार भी किया।

लेकिन आज दिल्ली प्रशासन ने निगमबोध घाट और  पंजाबी बाग सहित सभी बड़े शमशान घाटों पर Covid19 शवों को खुले में लकड़ी में जलाने का आदेश जारी कर दिया इसके लियें शमशान घाट पर काम करने वाले लोगो पर अधिकारी दबाव बना रहे हैं लेकिन शमशान घाटों पर अंत्येष्टि करवाने वाले आचार्य एवं कर्मी इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि शमशान घाट पर खुले में जब शव जलता है तो उसकी राख उड़ती है ऐसे में जब कोविड़19 संक्रमित शव खुले में जलेंगे तो उनकी भी राख उड़ेगी जो वहाँ उपस्थित सभी लोगों के लिये काफी खतरनाक हो सकती है अब सवाल ये है कि जब समाज के  स्वास्थ्य की सुरक्षा को देखते हुए सरकार ने CNG प्रक्रिया से अंत्येष्टि का निर्णय किया था तो अब यह लकड़ी में जलवाने का निर्णय दिल्ली सरकार ने आखिर क्यों लिया 

 दिल्ली सरकार के इस फैसले के खिलाफ अब आवाज भी उठने लगी है  दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने दिल्ली के उप राज्यपाल श्री अनिल बैजल एवं मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल से अनुरोध किया है की कोविड़19 संक्रमित शवों को खुले में लकड़ी में जलवाने के निर्णय को लोक स्वास्थ हित में वापस लिया जाये ।

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