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Haryana : मनोहर सरकार पर हुड्डा ने लगाये किसान और युवा विरोधी होने का आरोप, सरकार का काम रोजगार देना है बेरोजगार करना नहीं-हुड्डा

पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कहना है कि पूरे कोरोना काल के दौरान प्रदेश सरकार की नीतियां अस्थिर और किसान विरोधी रही हैं। इसी वजह से महामारी से लड़ने के लिए सरकार को सहयोग देने के साथ विपक्ष को कई बार उसकी नीतियों का विरोध भी करना पड़ा। लगातार विरोध करने के बाद आख़रिकार सरकार ने धान पाबंदी का फ़ैसला वापिस लिया।

Mukesh kumar
  • Jun 1 2020 8:07PM

हरियाणा, कुरुक्षेत्र, 1 जूनः पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कहना है कि पूरे कोरोना काल के दौरान प्रदेश सरकार की नीतियां अस्थिर और किसान विरोधी रही हैं। इसी वजह से महामारी से लड़ने के लिए सरकार को सहयोग देने के साथ विपक्ष को कई बार उसकी नीतियों का विरोध भी करना पड़ा। लगातार विरोध करने के बाद आख़रिकार सरकार ने धान पाबंदी का फ़ैसला वापिस लिया। लेकिन अभी भी पंचायती ज़मीन पर पाबंदी है। सरकार पर तंज कसते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हाथी तो निकल गया लेकिन अब सरकार उसकी पूंछ पकड़े बैठी है। सरकार को कम से कम महामारी के दौर में पंचायती ज़मीन पर पाबंदी को वापिस लेना चाहिए। किसान और पंचायतों पर बंदिशें लगाने की बजाए सरकार को भूजल संरक्षण के लिए दादूपुर-नलवी जैसी परियोजना को फिर से शुरू करना चाहिए।  भूपेंद्र सिंह हुड्डा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक अरोड़ा की तरफ से कुरुक्षेत्र में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कांग्रेस सरकार के दौरान भूजल के लिए बनाई गई योजनाओं को गिनवाया। हुड्डा ने कहा कि मौजूदा सरकार को भी कांग्रेस कार्यकाल की तरह राखसी नदी, सरस्वती नदी, खंड नाला, ओटू झील सिरसा, बीबीपुर झील, कोटला झील मेवात, तालाब, ड्रेन और नहरें खुदवाने के काम करने चाहिए। सरकार ऐसा करने की बजाए पहले से जारी दादूपुर-नलवी, ड्रिप सिंचाई और ड्रिप पाइपलाइन अनुदान जैसी परियोजनाओं को बंद करने में लगी है। इस बार मानसून लंबा चलने की उम्मीद है, इसलिए पहले से ही बारिश के पानी को संचय करने की व्यवस्था कर लेनी चाहिए। सरकार की कोशिश होनी चाहिए कि कोरोना की मार झेल रहे किसान को कोई दिक्कत पेश ना आए। उसे गेहूं और गन्ने की पेंडिंग पेमेंट का फौरन भुगतान करना चाहिए। पिछले दिनों हुई ओलावृष्टि और बेमौसमी बारिश से हुए नुकसान का मुआवज़ा भी जल्द देना चाहिए। हुड्डा ने कहा कि महामारी के दौर में भी शराब, सरसों, और चना ख़रीद जैसे घोटालों की शिकायत मिल रही हैं। शराब घोटाले की जांच करना तो दूर सरकार अबतक ये तय नहीं कर पाई कि जांच एसआईटी से होगी या एसईटी से। सरकार ख़ुद अपने मंत्री अनिल विज की बात नहीं मान रही। पत्रकारों के सवाल पर चुटकी लेते हुए हुड्डा ने कहा कि अनिल विज हमारे पुराने साथी हैं लेकिन अगर सरकार उनकी सुनते ही नहीं तो वो बोलते ही क्यों हैं ?

  • मनमाने रेट पर बेच रहे हैं ठेकेदार शराब 
  • वसूल रहे हैं प्रति बोतल 200-400 रुपये ज्यादा
  • नहीं लगतती है दुकानों पर रेट लिस्ट
  • दुकानदार नहीं कर रहे हैं बिलिंग

हालात ये है कि पुराने घोटाले का पूरा पर्दाफाश होने से पहले अब नया घोटाला अंजाम दिया जा रहा है। ठेकेदार शराब को मनमाने रेट पर बेच रहे हैं। सरकार की तरफ से महज़ 10 से लेकर 50 रुपये प्रति बोतल रेट में बढ़ोत्तरी की गई है। लेकिन ठेकेदार 200 से 400 रुपये तक प्रति बोतल की ज्यादा वसूली कर रहे हैं। यहां तक की शराब की दुकानों पर रेट लिस्ट तक नहीं लगाई जाती। शराब के रेट की ना बिलिंग हो रही है और ना ही कोई जांच हो रही है। नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश में बढ़ती बेरोज़गारी पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि महामारी के दौर में सरकार की तरफ से लगातार कर्मचारियों की छटनी की जा रही है। भर्तियां पूरी होने का इंतज़ार कर रहे युवाओं को नौकरियां नहीं दी जा रही है। टीजीटी इंग्लिश समेत 9 कैटेगरी की भर्तियों को रद्द करने की कोशिश हो रही है। पीजीटी संस्कृत के अभ्यार्थियों को ज्वाइनिंग नहीं दी जा रही है। रोज़गार मुहैया करवाने वाले छोटे और मध्यम उद्योगों को अबतक कोई राहत नहीं दी गई। यही वजह है कि प्रदेश में आज बेरोज़गारी दर 43 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

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