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भोपाल में होमगार्ड जवानों की देखरेख में दुकानें खुली, सरकार के लिए घाटे का सौदा

मध्यप्रदेश में आधी दुकानें भी नहीं खोल पाया सरकारी अमला, ऐसे में कैसे करेगा 2000 करोड़ का घाटा पूरा

Bharat
  • Jun 10 2020 2:19PM

 

भारत, मध्यप्रदेश

भोपाल-मध्य प्रदेश में आबकारी विभाग को लगभग 2000 करोड रुपए के नुकसान होने के बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर जब शराब ठेकेदारों ने दुकानों को सरेंडर कर दिया तो कल से मध्य प्रदेश के कई जिलों सहित राजधानी भोपाल में भी शराब की दुकानों को आबकारी विभाग के अमले ने चलाया। जानकारी के अनुसार राजधानी में 950 देशी एवं विदेशी शराब की दुकानें हैं ,परंतु शहर में 61 दुकानों में से केवल 31 दुकानें ही संचालित की जा सकी।. विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जैसे-जैसे आबकारी विभाग को पर्याप्त अमल की व्यवस्था होगी एवं होमगार्ड जवानों की मांगी हुई व्यवस्था संपूर्ण हो जाएगी तो लगभग सभी दुकानें खोल दी जाएंगी

मध्यप्रदेश में एक तरफ जहां आबकारी विभाग को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ वहीं दूसरी ओर सिंडीकेट के रूप में काम कर रहे शराब माफिया ठेकेदार अपने मकसद में कामयाब होते हुए दिखाई दिए। शराब ठेकेदारों को पिछले 3 महीने के लोक डाउन परिस्थिति को छोड़ दिया जाए तो अवैध शराब कारोबार सहित पूर्व में बेची गई शराब में भी करोड़ों रुपए का फायदा हुआ उसके बाद जैसे ही सरेंडर कर दी गई दुकाने और सरकार ने अपने आधिपत्य में इन दुकानों को लिया, उसके बाद भी आने वाले समय में जब नए सिरे से टेंडर किए जाएंगे तो कुल मिलाकर शराब ठेकेदारों का मकसद पूरा हो जाएगा। और लगभग 5 वर्ष पूर्व खेले गए उसी खेल में ठेकेदार फिर से सफल हो जाएंगे ,शराब की दुकानों को एक बार फिर अपने कब्जे में लेकर पुनः सिडीकेट के रूप में शराब ठेकेदार अपना काम करना प्रारंभ कर देंगे..
सरकार को घाटे का सौदा ही साबित होगा दुकानों का संचालन
मध्य प्रदेश आबकारी विभाग की परिस्थिति एवं उससे उत्पन्न हुई स्थिति सामने आई है ।  दोषी शराब नीति के चलते इतना तय है कि मध्य प्रदेश में आने वाले समय में सरकार शराब की दुकानों के संचालन में पूर्णता विफल हो जाएगी,। क्योंकि आबकारी विभाग के पास ना तो पर्याप्त स्टाफ है और ना ही शराब ठेकेदारों के समान अवैध शराब बेचने का कोई तजुर्बा.. जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश ही नहीं संपूर्ण भारतवर्ष में शराब ठेकेदार संबंधित दुकान के साथ-साथ अवैध रूप से शराब का संचालन भी ग्रामीण एवं क्षेत्रीय स्तर पर नगरीय सीमा सहित पंचायत सीमा तक करता है । , तब जाकर  अपनी शराब की दुकान का संचालन लाभ के साथ कर पाता है । परंतु सरकारी सिस्टम में ऐसा कर पाना संभव नहीं है ।वहीं दूसरी ओर ठेकेदार से जुड़े हुए खुफिया तंत्र एवं अवैध शराब के कारोबारी शराब के सरकार द्वारा विक्रय को विफल करने में भी सफल हो जाएंगे। कुल मिलाकर आने वाली परिस्थिति ऐसी होंगी कि शराब के ठेकों को एक बार पुनः नीलाम किए जाएगा जैसा कि आबकारी आयुक्त सहित सरकार के मन में स्पष्ट है। और अंततः शराब ठेकेदारों की फिर से जीत हो जाएगी। कल भी प्रदेश की राजधानी में पर्याप्त अमले की कमी के चलते आदि की दुकानें ही खोलने में सरकार सफल हो सकी। यही स्थिति संपूर्ण मध्यप्रदेश में सामने आई ।मध्यप्रदेश से प्राप्त जानकारी के अनुसार सभी जिलों में 50% से अधिक दुकानें राजस्व एकत्रित करने के उद्देश्य आबकारी महकमा दुकानों का संचालन करने में सफल नहीं हो पाया।

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