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हिंदू विरोधी धार्मिक आतंक को पहिचानने में असफल है दुनिया... सयुंक्त राष्ट्र के मंच से बोले मोदी के मंत्री

मुरलीधरन ने कहा, "धार्मिक पहचान के संबंध में, हम देख रहे हैं कि कैसे सदस्य देश धार्मिक आतंक के नए स्वरूप का सामना कर रहे हैं। हालांकि, हमने यहूदी-विरोधी, इस्लामोफोबिया और क्रिस्टियानोफोबिया की निंदा की है, लेकिन हम यह मानने में विफल हैं कि हिंदू विरोधी, बौद्ध विरोधी और सिख विरोधी सहित धार्मिक आतंकवाद के और अधिक विषैले स्वरूप उभर रहे हैं।’’

Prem Kashyap Mishra
  • Oct 13 2021 8:23PM

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में धार्मिक आतंक को लेकर पूरी दुनिया को चेताया। भारत ने कहा कि वैश्विक समुदाय हिंदू विरोधी, बौद्ध विरोधी, सिख विरोधी सहित धार्मिक आतंक के अधिक विकराल रूपों को पहचानने में विफल रहा है। विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने यूएनएससी में 'शांति बनाए रखने और शांति कायम रखने: विविधता, राज्य निर्माण और शांति की तलाश' पर उच्चस्तरीय खुली चर्चा में कहा कि इस तरह के आतंक की आलोचना करने के बारे में चयनात्मक होना हमारे लिए खुद खतरा है।

मुरलीधरन ने कहा, "धार्मिक पहचान के संबंध में, हम देख रहे हैं कि कैसे सदस्य देश धार्मिक आतंक के नए स्वरूप का सामना कर रहे हैं। हालांकि, हमने यहूदी-विरोधी, इस्लामोफोबिया और क्रिस्टियानोफोबिया की निंदा की है, लेकिन हम यह मानने में विफल हैं कि हिंदू विरोधी, बौद्ध विरोधी और सिख विरोधी सहित धार्मिक आतंकवाद के और अधिक विषैले स्वरूप उभर रहे हैं।’’

आगे उन्होंने  इशारा करते हुए कहा कि हमने अपने पड़ोस में और अन्य जगहों पर मंदिरों के विनाश, मंदिरों में मूर्तियों को तोड़ने का महिमामंडन, गुरुद्वारा परिसर का अनादर, गुरुद्वारों में सिख तीर्थयात्रियों का नरसंहार, बामयान में बुद्ध प्रतिमाओं और अन्य धार्मिक प्रतिष्ठित स्थलों का विनाश देखा है. इन अत्याचारों और आतंक को स्वीकार करने में हमारी अक्षमता केवल उन ताकतों को प्रोत्साहित करती है कि कुछ धर्मों के खिलाफ आतंक, दूसरों के मुकाबले अधिक स्वीकार्य है. अगर हम ऐसे आतंक की आलोचना करने या उन्हें अनदेखा करने के बारे में चुनिंदा होना चाहते हैं, तो हम अपने जोखिम पर ऐसा करते हैं.

विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने कहा कि काबुल में सत्ता में बदलाव, न तो बातचीत के जरिए हुआ और न ही समावेशी है.  हमने लगातार व्यापक आधार वाली, समावेशी प्रक्रिया का आह्वान किया है, जिसमें अफगानों के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व शामिल हो. अफगानिस्तान से अमेरिकी बलों की वापसी के अंतिम चरण के दौरान तालिबान ने 15 अगस्त को काबुल पर नियंत्रण कर लिया था.  सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 2593 स्पष्ट रूप से कहता है कि अफगान क्षेत्र का उपयोग आतंकवादियों को आश्रय देने, प्रशिक्षण देने, योजना बनाने या आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए नहीं किया जाना चाहिए. विशेष रूप से यह प्रस्ताव, लश्कर-ए-तैयबा तथा जैश-ए-मोहम्मद सहित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों और व्यक्तियों को संदर्भित करता है.

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