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प्रवासी मजदूरों पर SC का अ​हम आदेश, 'बस-ट्रेन का किराया नहीं लिया जाएगा, राज्य सरकार करे व्यवस्था"

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेल में यात्रा करने वाले मजदूरों के लिए खाने की व्यवस्था की जाए. रेलवे, प्रवासी मजदूरों की खाने की व्यवस्था करे. बसों से सफर करने वाले मजदूरों के लिए भी खाने-पीने की व्यवस्था की जाए.

Abhishek Lohia
  • May 28 2020 5:08PM

प्रवासी मजदूर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि प्रवासी मजदूरों से बस और रेल का किराया नहीं लिया जाएगा. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेल में यात्रा करने वाले मजदूरों के लिए खाने की व्यवस्था की जाए. रेलवे, प्रवासी मजदूरों की खाने की व्यवस्था करे. बसों से सफर करने वाले मजदूरों के लिए भी खाने-पीने की व्यवस्था की जाए.

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ये निर्देश दिए हैं-

-प्रवासी श्रमिकों से ट्रेन या बस का कोई किराया नहीं लिया जाएगा. विभिन्न स्थानों पर फंसे हुए सभी प्रवासी कामगारों को संबंधित राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशों द्वारा उन स्थानों पर भोजन उपलब्ध कराया जाएगा, जिन्हें प्रचारित किया जाएगा और उन्हें उस अवधि के लिए सूचित किया जाएगा जिसका वे इंतजार कर रहे हैं, ट्रेन या बस में चढ़ने के लिए.

-फंसे हुए प्रवासी श्रमिकों को संबंधित राज्य द्वारा उन स्थानों पर भोजन उपलब्ध कराया जाएगा, जिन्हें प्रचारित किया जाएगा और इस अवधि के लिए सूचित किया जाएगा कि वे अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं.

- मूल राज्य स्टेशन पर भोजन और पानी प्रदान करेगा और यात्रा के दौरान, प्रवासी श्रमिकों को भोजन और पानी प्रदान करने के लिए रेलवे ट्रेन यात्रा में मूल राज्य भोजन और पानी प्रदान करेंगे. भोजन और पानी उपलब्ध कराने के लिए रेलवे. बसों में भोजन और पानी भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए.

- राज्य प्रवासी श्रमिकों के पंजीकरण की देखरेख करेगा और यह सुनिश्चित करने के लिए कि पंजीकरण के बाद, वे एक प्रारंभिक तिथि पर ट्रेन या बस में चढ़े.पूरी जानकारी सभी संबंधितों के लिए प्रचारित की जानी चाहिए.

-सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम केंद्र सरकार पर बिल्कुल नहीं हैं.  हम राज्य सरकारों को निर्देश जारी कर रहे हैं. हम आगे निर्देश देते हैं कि उन प्रवासी श्रमिकों को सड़कों पर चलते हुए पाया गया, उन्हें तुरंत शरण में लिया गया और उन्हें भोजन उपलब्ध कराया गया और उन्हें सभी सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए. अगली सुनवाई पांच जून को होगी.

-प्रवासी मजदूर मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से लिए गए स्वत: संज्ञान मामले में सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि एक मई से लेकर 27 मई तक कुल 91 लाख प्रवासी मजदूर शिफ्ट किए गए हैं.

-सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि प्रवासी मजदूरों को टिकट कौन दे रहा है, उसका भुगतान कौन कर रहा है.

-सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि टिकट के पेमेंट के बारे में कंफ्यूजन है और इसी कारण मिडिल मैन ने पूरी तरह से शोषण किया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रवासी मजदूरों के सबसे पहले उनकी जेब में पैसे होने चाहिए. 

-केंद्र की तरफ से सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सरकार मजदूरों के लिए काम कर रही है लेकिन राज्य सरकारों के जरिये उनतक नहीं पहुंच रही है, कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुई है. सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि केंद्र सरकार ने तय किया है कि प्रवासी मजदूरों को शिफ्ट किया जाएगा, सरकार तब तक प्रयास जारी रखेगी जब तक एक भी प्रवासी रह जाते हैं तब तक ट्रेन चलती रहेंगी.

-सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार ने अभी 3700 ट्रेनें प्रवासी मजदूरों के लिए चला रखी हैं, अभी तक 50 लाख प्रवासी मजदूर अपने गांव जा चुके हैं. तुषार मेहता ने कहा कि  पड़ोसी राज्यों के सहयोग से 40 लाख को सड़क से शिफ्ट किया गया है.

-सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बड़ी समस्या यह है कि मजदूरों को रजिस्ट्रेशन के बावजूद भी कई दिनों तक इंतजार करना पड़ा है.

-सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रांसपोर्ट और उनके खाने बड़ी समस्या है, बहुत से मजदूर अभी शेल्टर होम में नहीं रह रहे हैं वह अपने किराए के घरों में या दूसरी जगह पर रह रहे हैं उनका क्या इंतजाम किया गया.

-सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि मैं समस्या को समझ रहा हूं इस बारे में राज्य रिपोर्ट दाखिल करेंगे. इस बारे में जानकारी जुटा कर हम आपको बताएंगे, राज्य स्तर पर मैकेनिज़्म काम कर रहा है, इसलिए हमको को राज्यों से फीडबैक लेना होगा, सभी राज्य लेकर शिफ्टिंग का काम कर रहे हैं.

-सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य किसी को आने से रोक नहीं सकते कि हम तुमको नहीं लेंगे.

-सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि इस तरह की कोई बात नहीं है, सभी भारतीय नागरिक हैं.

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