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पिछले 2 महीनों में रिटेल सेक्टर को भारी नुकसान, 9 लाख करोड़ रुपये का घाटा

लॉकडाउन 4.0 में बाजारों को दी गई ढील के बाद भी पहले सप्ताह में देश का घरेलू कारोबार इस समय अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहा है. देशभर में खुली दुकानों में महज 5 फीसदी व्यापार हुआ और केवल 8 प्रतिशत कर्मचारी दुकानों पर पहुंचे. रिटेल कारोबार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके कर्मचारी है जिनमे से 80 प्रतिशत अपने गांव लौट गए है.

Abhishek Lohia
  • May 24 2020 11:34PM

लॉकडाउन में सिर्फ कुछ चुनिंदा दुकानों के खुलने और बाकी सब बंद होने के कारण रिटेल कारोबार की कमर टूट गई है. व्यापारियों के सबसे बड़े संगठन कन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) की मानें तो कोरोना वायरस (covid-19) के चलते लॉकडाउन के इन 60 दिनों में रिटेल व्यापार को 9 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है. आने वाले समय में रिटेल व्यापार पर संकट गहरा सकता है.

लॉकडाउन 4.0 में बाजारों को दी गई ढील के बाद भी पहले सप्ताह में देश का घरेलू कारोबार इस समय अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहा है. देशभर में खुली दुकानों में महज 5 फीसदी व्यापार हुआ और केवल 8 प्रतिशत कर्मचारी दुकानों पर पहुंचे. रिटेल कारोबार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके कर्मचारी है जिनमे से 80 प्रतिशत अपने गांव लौट गए है. 20 प्रतिशत कर्मचारी जो स्थानीय हैं, वापस काम पर लौटना नहीं चाहते. वहीं बाजार खुल गए लेकिन कोरोना के बढ़ते मामलों के डर से ग्राहक भी बाजार से नदारद है. 

CAIT के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भारतीया के मुताबिक 60 दिनों के राष्ट्रीय लॉकडाउन के दौरान घरेलू व्यापार में लगभग 9 लाख करोड़ रुपये का कारोबार नहीं हुआ. केंद्र एवं राज्य सरकारों को 1.5 लाख करोड़ के जीएसटी राजस्व का नुक्सान हुआ है. पिछले एक सप्ताह के दौरान डेयरी उत्पादों, किराना, एफएमसीजी उत्पादों और उपभोग्य वस्तुओं सहित आवश्यक वस्तुओं में ही कारोबार चला है जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल, मोबाइल्स, गिफ्ट आर्टिकल, घड़ियां, जूते, रेडीमेड अप्पेरल्स, फैशन गारमेंट्स, रेडीमेड गारमेंट्स, फर्निशिंग फैब्रिक, क्लॉथ, ज्वेलरी, पेपर, स्टेशनरी, बिल्डर हार्डवेयर, मशीनरी, टूल्स सहित अन्य अनेक व्यापार जिसमें बड़ी मात्रा में व्यापार होता था, इन व्यापारों में ग्र्राहक बिलकुल गायब थे. 

लगभग 5 लाख अन्य राज्यों के व्यापारी दिल्ली के थोक बाजारों से माल खरीदने के लिए प्रतिदिन दिल्ली आते थे, लेकिन ट्रांसपोर्ट की अनुपलब्धता के कारण दिल्ली के थोक बाजार पिछले एक सप्ताह में सुनसान रहे. विशेष रूप से ड्राइवर जो इंट्रा सिटी, इंटर-सिटी या माल के अंतर-राज्य परिवहन के लिए माल की आवाजाही करते हैं, वो भी काम पर नहीं लौटे हैं. 

देश का रिटेल व्यापार लगभग 7 करोड़ व्यापारियों द्वारा संचालित होता है जो 40 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करता है और लगभग 50 लाख करोड़ रुपये का सालाना कारोबार करता है. इस सेक्टर के करोड़ों व्यापारी अत्यधिक असुरक्षित स्थिति में हैं और  केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा आर्थिक पैकेज के मामले में व्यापारियों की सरासर उपेक्षा के कारण संकट और गहरा गया है.

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