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नरेन्द्र गिरी के बाद अखाडा परिषद के अध्यक्ष का पदभार संभाला इस संत ने.... पद ग्रहण करते योगी सरकार के लिए कही बड़ी बात

रविंद्र पुरी ने अध्यक्ष बनने के बाद ऐलान किया कि साधु-संतों का समर्थन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ है. उन्होंने कहा, “योगी ही ऐसे हैं, जो साधु-संतों के मापदंडों पर खरे उतरते हैं, क्योंकि वह एक संत हैं

Prem Kashyap Mishra
  • Oct 26 2021 1:27PM

नरेद्र गिरी की रहस्यपूर्ण मृत्यु के बाद अखाडा परिषद् के अध्यक्ष का पद खाली हो गया था. जिसके बाद अब संत समाज ने रविन्द्र पूरी को अखाडा परिषद् का अध्यक्ष चुना है. प्रयागराज के दारागंज में श्री पंचायती निरंजनी अखाड़े के सचिव रवींद्र पुरी महाराज को सोमवार को अखाड़ा परिषद का मुखिया चुना गया। उन्हें संत समाज का मुखिया चुनने के बाद संत समाज में बेहद ख़ुशी है . आपको बता दें जैसे ही उन्होंने पदभार संभाला वैसे ही संत समाज की सुरक्षा और संत समाज को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए उन्होंने बड़ी बात कह दी.

रविंद्र पुरी ने अध्यक्ष बनने के बाद ऐलान किया कि साधु-संतों का समर्थन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ है. उन्होंने कहा, “योगी ही ऐसे हैं, जो साधु-संतों के मापदंडों पर खरे उतरते हैं, क्योंकि वह एक संत हैं. इसलिए, हम लोग हमेशा योगी आदित्यनाथ का समर्थन करते रहेंगे और लोगों से अपील करेंगे कि वह भी योगी आदित्यनाथ का समर्थन करें.” 13 में से 8 अखाड़ों के समर्थन से रविंद्र पुरी अध्यक्ष बने हैं.

अखाड़े के महामंत्री हरि गिरी ने बताया कि जहाँ 7 अखाड़ों ने बैठक में अपने प्रतिनिधि भेजे थे, निर्मोही अखाड़ा के मदन मोहन दास ने पत्र भेज कर बैठक को समर्थन दिया. रविंद्र पुरी ने कहा कि अखाड़ा के नियम व परंपरा अनुसार ही ये चुनाव हुआ है. हरि गिरी ने कहा कि नियमानुसार महेंद्र गिरी का कार्यकाल बचा होने तक निरंजनी अखाड़े से ही किसी को ये पद दिया जाता है. उन्होंने कहा कि जो नाराज़ हैं, उन्हें मना लिया जाएगा.

आपको बता दें  अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद’ के नए अध्यक्ष ने कहा, “कॉन्ग्रेस मुक्त भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने के हम साथ हैं. सनातन की रक्षा तभी होगी, जब BJP सरकार आएगी. उत्तराखंड में भी भाजपा को फिर से लाना है. जो राम को मानता है, हम उसके ही साथ हैं. कुंभ जैसे पहले होता आया है, वैसे ही होगा।” बैठक में बद्रीनाथ का नाम बदलने की साजिश का आरोप लगाते हुए देवबंद के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया। साथ ही ये माँग भी उठी कि कई साधु-संतों के लापता होने और उनकी हत्याओं पर CBI जाँच कराई जाए

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