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संदिग्ध गतिविधियों का अड्डा रही पीर खुशहाल दरगाह को किया गया ध्वस्त... 3 के खिलाफ मामला दर्ज

मुज़फ्फर नगर में संदिग्ध गतिविधियों का केंद्र रही पीर खुशहाल दरगाह पर चला प्रशासन का बुलडोज़र

रजत मिश्र, उत्तर प्रदेश , Twitter: rajatkmishra1
  • Nov 21 2020 1:22PM

मुज़फ्फर नगर के बिहारगढ़ में वन विभाग ने अवैध रूप से कब्जाई गई पीर खुशहाल की 6.52 हेक्टेयर जमीन को कब्जा मुक्त करा लिया है। वन रक्षक सुनील कुमार ने बताया कि उक्त मामले में पीर खुशहाल की पत्नी नाज़िया अफरीदी उनके दामाद सूफी जव्वाद व एक अन्य के खिलाफ भोपा थाने में मामला भी दर्ज कराया गया है।

क्या है पूरा मामला

बिहार गढ़ में  1975 में एक बाहर कहीं से आये अनजान व्यक्ति को 6.52 हेक्टेयर भूमि 30 वर्षों के लिए लीज पर आवंटित की गई थी। कहा जाता है कि वह व्यक्ति पीर खुशहाल पाकिस्तान से भारत आया था। जहां उसने एक दरगाह बना ली थी। उस दरगाह में उसने धीरे धीरे कर तमाम स्थायी निर्माण भी बना डाले। स्थानीय लोग लंबे समय से इस कथित दरगाह को शक की निगाह से देखते रहे हैं। यहां संदिग्ध गतिविधियों की समय समय पर शिकायते भी की जाती रही हैं। 

वर्ष 2005 में इस जमीन का लीज समय पूरा हो गया। उसके बाद भी पीर खुशहाल का परिवार उक्त जमीन पर काबिज रहा। इस लीज की समयावधि बढ़ाने के लिए पीर परिवार कोर्ट पहुच गया। परंतु कोर्ट ने और समय देने से इनकार कर दिया। 

केंद्रीय राज्यमंत्री संजीव बालियान ने हाल में डीएम मुजफ्फरनगर को एक पत्र लिखा। जिसमें उन्होंने उक्त जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने का दबाव डाला। बालियान के पत्र से हरकत में आये जिला प्रशासन ने अब इस जमीन को कब्ज़ा मुक्त करा लिया।

इस जमीन पर किये गए अवैध निर्माणों को तोड़कर अब पूरी जमीन को वन विभाग के सुपुर्द किया गया है। अमित कुमार ने बताया कि जिन कमरों को नहीं तोड़ा गया है ऐसे चार कमरों की चाभियाँ डीएफओ सूरज कुमार को सौंपी जा चुकी हैं। जबकि 50 कमरों को अब तक ध्वस्त किया जा चुका है।

सपा सरकार का था संरक्षण

अब बड़ा सवाल यह है कि 2005 में लीज का समय पूरा होने के बाद भी आखिर कैसे इस जमीन पर काबिज रहा खुशहाल का परिवार। बताया जाता है सपा शासन काल मे इस दरगाह को विशेष संरक्षण रहा है। यहीं से मंत्री रहे एक मुस्लिम नेता की इस दरगाह पर विशेष कृपा रही है। कहा जाता है कि यहां अवैध कामों से होती रही काली कमाई का मोटा हिस्सा तत्कालीन सरकार में ऊपर तक लगातार पहुचाया जाता रहा है। तभी इस दरगाह के खिलाफ कभी कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया। जबकि स्थानीय लोग इस दरगाह की संदिग्धता को लेकर आये दिन शिकायते किया करते थे।

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