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अड़ गए असम के शिक्षामंत्री.. मदरसों के निर्णय पर नहीं होगा कोई भी समझौता

असम में सरकार द्वारा संचालित मदरसे, संस्कृत संस्थान होंगे बंद, नवंबर में आएगी अधिसूचना: शिक्षा मंत्री

Sudarshan News
  • Oct 18 2020 7:11PM
असम में सरकार द्वारा संचालित सभी मदरसों और संस्कृत केंद्रों को बंद कर दिया जाएगा। शिक्षा मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को कहा कि इस आशय की अधिसूचना नवंबर में जारी की जाएगी। मंत्री ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आगे कहा कि मदरसा शिक्षा बोर्ड को भंग कर दिया जाएगा और सभी राज्य संचालित मदरसों को उच्च विद्यालयों में परिवर्तित कर दिया जाएगा और नियमित छात्रों के रूप में सभी के लिए नए प्रवेश होंगा।
असम में दो तरह के मदरसे हैं। एक प्रोविंसलाइज्ड जो पूरी तरह सरकारी अनुदान से चलते हैं। और दूसरा खेराजी, जिन्हें निजी संगठन चलाते हैं। हालांकि असम सरकार 600 से अधिक मदरसे चलाती है। जबकि राज्य में करीब 900 प्राइवेट मदरसे चल रहे हैं। साथ ही राज्य में लगभग 100 सरकारी संचालित संस्कृत आश्रम और 500 प्राइवेट केंद्र हैं। वहीं राज्य के प्राइवेट मदरसों को लेकर शिक्षा मंत्री का कहना है कि सामाजिक संगठन और अन्य गैर सरकारी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे

प्राइवेट मदरसों को लेकर कोई दिक्कत नहीं है। वे चलते रहेंगे लेकिन प्राइवेट मदरसों को भी एक नियामक ढांचे के भीतर चलाना होगा। इसके लिए सरकार जल्द ही नया कानून ला रहा है। ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के मुखिया इमाम उमर अहमद इलयासी ने इस मामले पर बात की और कहा कि मदरसे हो या गुरुकुल, तालीम तो तालीम है। अगर हम मदरसों के अंदर मॉडर्न एजुकेशन देते हैं, तो बहुत बेहतर है। मैथ्स, साइंस, इंग्लिश और साथ में दीनी तालीम भी हो यह तो बहुत अच्छी बात है। हालांकि जो बड़े मदरसे हैं उनमें इस तरह की तालीम दी जाती है, लेकिन जो छोटे-छोटे मदरसे हैं। उनमें बच्चों को फिलहाल सिर्फ दीनी तालीम ही दी जा रही है।

भारत में करीब साढ़े सात लाख मदरसे हैं। इन सभी मदरसों में असली तालीम आने से बहुत फायदा होगा। हमारी देश के निर्माण में हिस्सेदारी बढ़ेगी और तभी हम मुख्य धारा से जुड़ेंगे। मदरसों को लाइसेंस तभी मिले जब वह कहें कि हम यह सभी तालीम देंगे। मदरसों के अंदर संस्कृत की भी तालीम होनी चाहिए और गुरुकुल के अंदर अरबी की तालीम भी होनी चाहिए। वहीं राज्य के प्राइवेट मदरसों को लेकर शिक्षा मंत्री का कहना है। कि सामाजिक संगठन और अन्य गैर सरकारी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे प्राइवेट मदरसों को लेकर कोई दिक्कत नहीं है। वे चलते रहेंगे लेकिन प्राइवेट मदरसों को भी एक नियामक ढांचे के भीतर चलाना होगा। इसके लिए जल्द ही हम एक कानून ला रहे हैं।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना  खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार हो बच्चो की कॉन्स्टिट्यूशनल जिम्मेदारी होनी चाहिए। मंत्री जी ने बयान दिया है शायद उन्हें ये नहीं मालूम कि मदरसों में सिर्फ कुरान नहीं पढ़ाया जाता है उसमे कुरान हदीस, बल्कि इस्लामिक के अलवा कम्प्यूटर, साइंस, मैथ्स आदि विशष पड़ाई जाती है।

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1 Comments

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  • Guest
  • Oct 18 2020 7:53:14:987PM

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