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आजादी के 74 साल बाद भी एक पक्की सड़क की बाट जोह रहा है बुंदेलखंड का यह गांव.. जहां के विधायक है सरकार में मंत्री..

न एम्बुलेंस, न पक्की सड़क, मरीज को चारपाई पर ले जाने को यदि आज भी मजबूर हैं ग्रामीण... बरसात में गांव बन जाता है टापू..

रजत मिश्र, उत्तर प्रदेश, ट्विटर- @rajatkmishra1
  • Aug 24 2020 11:02AM

(इनपुट - के.बी.उपाध्याय, ललितपुर) 

न एम्बुलेंस, न पक्की सड़क,  मरीज को चारपाई पर ले जाने को यदि आज भी  मजबूर हैं  ग्रामीण  तो इसे किसका दोष माना जायेगा  ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले उन ग्रामीणो का या उनके दुवारा चुने गये जनप्रतिनिधियों का..

यदि 21वीं सदी के भारत में जहाँ हम  स्वनिर्मित यान से मंगल गृह तक पहुच गये हों वहां यदि आज भी  किसी मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस की जगह चारपाई पर  रखकर ले जाने की पीडा का दंश यदि ग्रामीण भोंग रहे हैं तो  इसे मजबूरी कहें या  विडंबना या उन जनप्रतिनिधियों की उदासीनता का दंश जिसे ग्रामीण आज तक  भोग रहे हैं।

ललितपुर जिले की तहसील पाली के ब्लॉक बिरधा में एक गांव है रमपुरा.. जहां आजादी के 74 साल बीत जाने के बावजूद आज भी गांव रमपुरा से अपनी तहसील या मुख्यालय आने के लिये पक्की सडक नहीं है। ग्रामीणों को अपने गांव से आने या गांव जाने के लिये कीचड़ भरी सडक और पानी से भरे नाले से  को पैदल ही पार करना पड़ता है। बरसात का मौसम आते ही गांव के ग्रामीण बदहाल जीवन जीने को मजबूर हो जाते हैं।

पाली तहसील ब्लॉक बिरधा का यह गांव रमपुरा जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस गांव की आवादी 400 परिवारों की है पर विकास के नाम पर आज तक एक पक्की सड़क भी नहीं पहुंची है। इसकी वजह से ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आलम यह है कि बरसात का मौसम आते ही गांव तक पहुंचने वाले सारे रास्तों में पड़ने वाले नाले में पानी से भर जाते हैं, जिसकी वजह से जिला मुख्यालय से यहां का संपर्क तक कट जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें स्वास्थ सेवाओं के लिये भी परेशान होना पड़ता है अगर कोई गंभीर रूप से बीमार हो जाये या फिर कोई गर्भवती महिला को प्रसव के लिए ले जाना हो तो एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकती है। ऐसे में उन्हें मरीज को चारपाई पर लेटाकर 3 किलोमीटर दूर तक ले जाना पड़ता है तब उन्हें कोई वाहन मिल पाता है।

वर्तमान में श्रम राज्य मंत्री मनोहर लाल पंथ इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और पूर्व में भी इस क्षेत्र के बिधायक सरकार में मंत्री रहे हैं  पर गांव जस का तस है। चुनाव के समय पार्टी के प्रत्याशी तो पहुचते हैं पर जीतने के बाद बने बिधायक या मंत्री नहीं पहुंचते। ग्रामीणो को चुने हुये बिधायक की अनदेखी और उपेक्षा का दंश लगातार 74 साल से भोगना पड़ रहा है और प्रशासन का वही राग.. मामला हम लोगों के संज्ञान में है सड़क निर्माण के लिए योजना प्लानिंग में है और धनराशि आवंटित होते ही सड़क निर्माण का कार्य  ही कराया जायेगा।

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