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दिल्ली में एक और आंदोलन की सुगबुगाहट....सरकारी नियंत्रण से मंदिर मुक्त करवाने संत हुए दिल्ली में एकजुट

आंदोलन में जुटे साधू संतों का कहना है कि कि हम केंद्र और राज्य सरकारों को शांति से मनाएंगे, अगर नहीं माने तो ‘शस्त्र’ भी उठाएंगे. मंच से कई सांधू-संतों ने अखाड़ों, आश्रमों और मठों के साधु-संतों ने आक्रामक तेवर दिखाए.

Prem Kashyap Mishra
  • Nov 23 2021 1:43PM

दिल्ली में एक और आन्दोलन की सुगबुगाहट सुनाई दे रही है. दिल्ली के कालकाजी में कल एक सभा का आयोजन किया गया जिसमें मठ मंदिर को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए चर्चा की गई. कालकाजी मंदिर में देश भर से आए साधु, संतों ने मठ-मंदिर मुक्ति आंदोलन के लिए आह्वान किया. संतों ने एकस्वर में कहा कि हम केंद्र, राज्य सरकारों को मनाएंगे और अगर नहीं माने तो शस्त्र भी उठा सकते हैं. देश भर के कई मठों में बैठे रिसीवर से मुक्त करवाने की मांग करते हुए कई अखाड़ों, आश्रमों, मठों के साधु-संतों ने आक्रामक तेवर दिखाए.

बता दें कि मठ-मंदिर मुक्ति आंदोलन का जिम्मा महंत सुरेंद्र नाथ अवधूत पर है. बता दें कि महंत सुरेंद्र नाथ ‘विश्व हिंदू महासंघ’ के राष्ट्रीय अंतरिम अध्यक्ष भी हैं. इस संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं, इसलिए महंतों ने योगी जी का नाम लेते हुए कहा कि उनका आंदोलन ज़रूर सफल होगा क्योंकि उनके पास किसी महान ‘योगी’ का आशीर्वाद है.

मोदी सरकार के तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के फैसले से नाराज़ साधू-संतों ने पूरे देश से इकठ्ठा होकर दिल्ली के कालकाजी मंदिर में मठ-मंदिर मुक्ति आंदोलन की शुरआत की. आंदोलन में जुटे साधू संतों का कहना है कि कि हम केंद्र और राज्य सरकारों को शांति से मनाएंगे, अगर नहीं माने तो ‘शस्त्र’ भी उठाएंगे. मंच से कई सांधू-संतों ने अखाड़ों, आश्रमों और मठों के साधु-संतों ने आक्रामक तेवर दिखाए. बता दें की इस दौरान किसान आंदोलन का ज़िक्र भी किया गया था. 

मामले पर ज्यादातर साधू-संतों का कहना था कि जब मुट्ठी भर किसान दिल्ली के तमाम बॉर्डरों को रोक कर बैठ गए तो सरकार को उनकी बात माननी पड़ी. फिर भला ऐसे में साधू-संतों से जयादा अड़ियल कौन होगा. वे भी भली-भाँती अपनी बात मनवाना जानते हैं. उनका कहना था कि अगर ऐसे में ज़रुरत पड़ी तो साधू-संत सडकों पर डेरा भी बनाएँगे. ऐसे में यह साफ़ है कि राजधानी एक और आंदोलन के लिए तैयार होने जा रही है. और इस बार मुद्दा होगा धर्म और आस्था.

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविन्द्रपुरी, परिषद के महामंत्री महाराज राजेन्द्रदास ने कहा कि राज्य सरकारें अधिग्रहित मठ  मन्दिरों को तुरंत मुक्त कर संबधित सम्प्रदायों, सभाओं, संस्थाओं को सौंप दें. उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता अश्वनी उपाध्याय ने कहा कि इस विषय में केन्द्र सरकार को भी एक ज्ञापन देकर कहा जाएगा कि वो तुरंत राज्य सरकारों से सम्पर्क करके इस पहल को आगे बढाए, अगर राज्य सरकारें नही मानती हैं तो केन्द्रीय कानून बनाकर मठ मन्दिरों को अधिग्रहण से मुक्त कराए.

साधु-संतों ने कहा कि चर्च, मस्जिदों, गुरुद्वारों की तरह ही मंदिरों को भी सरकारी कब्जे से मुक्त होना चाहिए. इस आंदोलन में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया गया कि बहुसंख्यकों की आस्था के केंद्र मंदिर और मठों के साथ यह अन्याय राजनीति का परिणाम है. दक्षिण भारत में मंदिरों पर सरकारी कब्जे के खिलाफ आंदोलन लगातार चल रहा है, लेकिन उत्तर भारत में यह पहला मौका है जब राष्ट्रीय स्तर पर मठ मंदिर मुक्ति आंदोलन का आगाज हुआ. राज्य स्तर पर उत्तराखंड में यह आंदोलन एक साल से जारी है। आंनन्द पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर बालकानन्दगिरी, जूना अखाड़े के नारायणगिरी महाराज, महामण्डलेश्वर यतीन्द्रानन्दगिरी, जितेन्द्रानन्द महाराज, नवल किशोरदास महाराज सहित देश के 30 महामण्डलेश्वर पधारे.

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