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हल्दीघाटी में विजयी हुए थे हिंदवा सूर्य महाराणा प्रताप तथा पीछे हटी थी मुगल अक्रान्ता अकबर की सेना... आखिरकार बदल गया इतिहास और न्याय मिला राणा को

बता दें कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ASI जल्द ही नई जानकारी के साथ पट्टिकाएं लगवाने जा रहा है, जिसमें स्पष्ट उल्लेख होगा कि हल्दीघाटी का युद्ध निर्णायक रहा और इसमें मुगल शासक अकबर की सेना को कदम पीछे हटाने पड़े अर्थात हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप की जीत दर्ज हुई.

Abhay Pratap
  • Jul 17 2021 11:11AM

ये सभी जानते हैं कि मुगलिया व वामपंथी इतिहासकारों ने भारत के वास्तविक इतिहास को छिपाकर या कमतर दिखाकर ऐसे लोगों को महान दिखाया, जो भारत के दुश्मन थे, क्रूर थे तथा हैवान थे. चाहे वह हिंदवा सूर्य महाराणा प्रताप हों या प्रथ्वीराज चौहान, चाहे वह महारानी पद्मिनी हों या रानी दुर्गावती ... भारत के इन वीर व वीरांगनाओं को इतिहास में वो सम्मान नहीं मिला जो मिलना चाहिए था बल्कि इतिहास में उन लोगों को महना बताया गया जिन्होंने भारत को लूटा था, जबरन धर्मांतरण कराया, हरम के अड्डे खोल रखे थे, अनगिनत लोगों को मजहबी उन्माद के कारण क्रूरता से मारा था.

यही कारण है कि भारत के लोग लंबे समय से ये मांग करते रहे हैं कि भारत के वास्तविक इतिहास को जनता के सामने रखा जाए. अब इसकी शुरुआत वीर महाराणा प्रताप से हो चुकी है. हमें इतिहास में अब तक पढ़ाया जाता रहा है कि हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर की सेना के सामने महाराणा प्रताप की हार हुई थी तथा उनकी सेना पीछे हट गई थी जबकि वास्तविक इतिहास को देखें तो साफ़ पता चलता है कि हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप हारे नहीं थे बल्कि मुगल आक्रान्ता अकबर की सेना भाग खड़ी हुई थी.

महाराणाप्रताप से जुडी इस सच्चाई को वामपंथी व मुगलिया दरबारी इतिहासकारों ने न सिर्फ छिपा दिया बल्कि बदल भी दिया था लेकिन अब इतिहास में भारत के नायक राणा को न्याय मिला है. खबर के मुताबिक़, अब देश ये जान सकेगा कि हल्दीघाटी के युद्ध में वीर महाराणा प्रताप की सेना पीछे नहीं हटी थी बल्कि वह विजयी हुए थे. अब हल्दीघाटी में लगी उन सभी विवादित पट्टिकाओं को हटाने का निर्णय लिया गया है, जिसमें महाराणा प्रताप के पीछे कदम खींचे जाने की गलत जानकारी दे रखी है.

आपको बता दें कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ASI जल्द ही नई जानकारी के साथ पट्टिकाएं लगवाने जा रहा है, जिसमें स्पष्ट उल्लेख होगा कि हल्दीघाटी का युद्ध निर्णायक रहा और इसमें मुगल शासक अकबर की सेना को कदम पीछे हटाने पड़े अर्थात हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप की जीत दर्ज हुई. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण जोधपुर सर्किल के अधीक्षक बिपिन चंद्र नेगी का कहना है कि हल्दीघाटी में राजस्थान पर्यटन निगम के चालीस साल पहले लगाए गए उन सभी पट्टिकाओं को हटाने के आदेश दिए है. हालांकि एएसआइ इस ओर कदम उठाने से पहले इस सही तथ्यों का सत्यापन भी करेगी.

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ASI के उच्चाधिकारियों के निर्देश पर उदयपुर उपमंडल स्तर के अधिकारी गुरुवार को रक्ततलाई आए और महाराणा प्रताप की सेना के पीछे हटने की जानकारी देने वाले इन शिलालेखों को हटवाने की कार्रवाई को अंजाम दिया. रक्ततलाई में कुल तीन शिलालेख हटाए गए. ज्ञात हो कि महाराणा प्रताप व अकबर की सेनाओं के बीच हल्दीघाटी का युद्ध 1576 में लड़ा गया था. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद NCERT की किताबों में हल्दीघाटी की लड़ाई की तारीख 18 जून 1576 है जबकि पट्टिकाओं पर यह 21 जून 1576 लिखी गई है.

हल्दीघाटी का युद्ध निर्णायक था तथा इसमें महाराणा प्रताप विजयी हुए थे, इसको लेकर उदयपुर के इतिहासकार प्रो. चंद्रशेखर शर्मा ने शोध के जरिए प्रमाणित किया था कि हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप विजयी रहे. पिछले कई सालों से राजपूत समाज ही नहीं, बल्कि विभिन्न हिंदू संगठन लगातार मांग कर रहे थे कि हल्दीघाटी में युद्ध के निर्णय को लेकर लगी विवादास्पद पट्टिकाएं हवाई जाएं.  यहाँ ये भी उल्लेखनीय है कि 1970 के दशक में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने हल्दीघाटी का दौरा किया, तब राजस्थान पर्यटन विभाग की पट्टिकाओं में लिखा गया था कि इस युद्ध में महाराणा प्रताप की सेना को पीछे हटना पड़ा.

लेकिन अब इतिहास में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. अब हल्दीघाटी के शिलापट्टों पर लिखा जाएगा कि इस युद्ध में भारत पुत्र महाराणा प्रताप ने विजय हासिल की थी. इस बारे में केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा है कि इस दिशा में आर्केलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया को आदेश जारी कर दिए गए हैं. एएसआई के जोधपुर रीज़न के प्रभारी अधीक्षक विपिन चंद्र नेगी ने कहा कि इस दिशा में जल्द ही कदम उठाया जाएगा.  राजस्थान सरकार के टूरिज्म विभाग को इस बारे में निर्देशित किया जाएगा कि गाइड भी सैलानियों को यह नहीं बताएं कि महाराणा प्रताप की सेना हल्दीघाटी युद्ध में पीछे हटी थी बल्कि उन्हें सही जानकारी दें.

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