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वसीम रिजवी जब तक मुसलमान थे, स्वतंत्र थे... हिंदुत्व अपनाकर जितेंद्र नारायण त्यागी बने, जेल में डाल दिए गए !

यहाँ सवाल ये नहीं है कि उन्हें गिरफ्तार क्यों किया गया है. अगर कानूनन कोई गलत कर रहा है तो कानून को अपना कार्य करना चाहिए लेकिन ये सेलेक्टिव एक्शन होता है तो सवाल उठना लाजिमी है क्योंकि कानून तो सभी के लिए समान है.

Abhay Pratap
  • Jan 14 2022 11:42AM

हरिद्वार धर्म संसद मामले में जितेंद्र नारायण त्यागी को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया है. जितेंद्र नारायण त्यागी जो पूर्व के वसीम रिजवी हैं,  उन पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिए, जिसके कारण उत्तराखंड की हरिद्वार पुलिस ने बाहुबल दिखाते हुए उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

 हरिद्वार पुलिस के एक्शन को नमन है. अगर कानून है उल्लंघन हुआ है तो एक्शन होना चाहिए. लेकिन जितेंद्र नारायण त्यागी के साथ ही उत्तराखंड की कूच और ख़बरों पर भी गौर कर लेते हैं. ऐसी कई रिपोर्ट्स सामने आई हैं तथा सुदर्शन न्यूज ने इन रिपोर्ट्स को प्रमुखता से दिखाया है. इन रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पिछले कुछ सालों में उत्तराखंड में डेमिग्राफिक बदलाव हुआ है, लैंड जिहाद हो रहा है, देवभूमि को संक्रमित किया जा रहा है. इस सब पर उत्तराखंड पुलिस अपना बाहुबल क्यों नहीं दिखा पाती ?

 अब बात करें भड़काऊ बयान की तो जितेंद्र नारायण त्यागी गिरफ्तार हो गए. लेकिन एक बात और है कि वसीम रिजवी जब तक वसीम रिजवी थे, उन्हें छुआ तक नहीं गया, लेकिन जैसे ही वह रिजवी से जितेंद्र बने उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया... आखिर ये कौन सा सेक्यूलरिज्म या कानून है? जब जितेंद्र नारायण त्यागी वसीम रिजवी थे, तब उन्होंने कुरआन की 26 आयतों के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, उन्होंने ‘मोहम्मद’ पुस्तक भी लिखी है, जिस पर काफी विवाद हुआ है लेकिन इसके बाद भी उनकी कभी गिरफ्तारी नहीं हुई.

 लेकिन जैसे ही उन्होंने इस्लाम त्यागा और सनातन को स्वीकार किया, जैसे ही उन्होंने जालीदार टोपी की जगह रुद्राक्ष पहना, जैसे ही उन्होंने नमाज की जगह आरती करना शुरू किया, जैसे ही वह वसीम रिजवी से जितेंद्र नारायण त्यागी बन गए, धार्मिक भावनाएं आहात करने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. लेकिन यहाँ सवाल ये नहीं है कि उन्हें गिरफ्तार क्यों किया गया है. अगर कानूनन कोई गलत कर रहा है तो कानून को अपना कार्य करना चाहिए लेकिन ये सेलेक्टिव एक्शन होता है तो सवाल उठना लाजिमी है क्योंकि कानून तो सभी के लिए समान है.

 इसके अलावा भड़काऊ बयान देने वाले ओवैसी बंधु, तौकीर रजा, इमाम बरकती और कोरोना वाला मौलाना साद आज भी आजाद हैं. 15 मिनट के लिए पुलिस हटा लो, मोदी योगी के बाद तुम्हें कौन बचाएगा? हिंदुओं, तुम्हें हिंदुस्थान में जगह नहीं मिलेगी, कहने वाले ओवैसी व तौकीर रजा पर आज तक कोई एक्शन क्यों नहीं हुआ? जितेंद्र नारायण को जेल लेकिन इन जहरीली बयानबाजी करने वाले ये इस्लामिक लोग स्वतंत्र क्यों? आखिर भड़काऊ बयानबाजी पर ये सेलेक्टिव एक्शन क्यों? क्या सेलेक्टिव एक्शन से भड़काऊ बयानबाजी या सांप्रदायिकता रोकी जा सकती है? ये वो सवाल हैं जिनका जवाब पूरा देश जानना चाहता है.

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