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जब तक हिंदूराष्ट्र था तब तक न गुलाम था और न ही गद्दार.. नेपाल बदला वामपंथी होने के बाद

चीन की विस्तार वाली नीति में गुलामी की तरफ और वामपंथ की अधार्मिक सोच के चलते गद्दारी की तरफ अग्रसर है नेपाल।

Rahul Pandey
  • Jul 2 2020 6:48AM

अमेरिका से लेकर चीन तक आज जो भी दुनिया भर में महाशक्ति आ बन कर घूम रही है और सब का दिन कभी किसी किसी को गुलाम थे। जो आज पूरी दुनिया भर में अपने विस्तारवादी नीति के लिए विख्यात नहीं बल्कि कुख्यात है , वह कभी खुद किसी के गुलाम थे। खासकर चीन में तो वहां के शासक इतने डरपोक थे कि उन्होंने दुश्मनों से खौफ खा कर चीन की दीवार ही बना डाली थी और यह सोचा था कि दुश्मन इसको पार नहीं कर पाएगा।

लेकिन कहीं कोई एक ऐसा देश था जिसने ना ही कोई दीवार बनाई और ना ही कभी एक क्षण के लिए भी गुलामी का दंश झेला। उस महान देश का नाम नेपाल है जो दुनिया का एकमात्र हिंदू राष्ट्र महज कुछ समय पहले था। यहां की 2 जातियां गोरखा और शेरपा दुनिया भर में बेजोड़ है क्योंकि गोरखा से बड़े योद्धा और शेरपा से बड़े पर्वतारोही शायद ही कहीं पाए जाते हैं। नेपाल की जनता सदा से स्वाभिमानी और धर्म निष्ठा थी और आज भी है अगर कहीं बदलाव आया है तो वह महज सरकारों में है । बाकायदा पूरी चीनी षडयंत्र के साथ नेपाल नरेश के पूरे परिवार को खत्म करा दिया गया और उसके बाद पूरी सोची-समझी रणनीति के साथ कट्टर और धर्म निष्ठ हिंदुओं के बीच में वामपंथी जहर धीरे-धीरे खोला गया। इस जहर को बोलने के लिए मोहरा ओली जैसे लोगों को चीन ने बनाया और धीरे-धीरे करके नेपाल के सच्चे मित्र भारत से उनके रिश्ते खराब करने शुरू किए।

यह चीन की एक साजिश ही थी कि पाकिस्तान और चीन से पहले से उलझा हुआ भारत , नेपाल के बीच में बोलने के चलते चुप हो जाएगा लेकिन अब नेपाल की ही जनता वहां के वामपंथी स्वरूप को देखकर आंदोलित हो चुकी है और एक बार फिर से अपने हिंदू राष्ट्र के समय काल को याद कर रही है। यकीनन यह दुस्साहस और नेपाल की जनता के विरुद्ध किया गया नेपाली सरकार का यह कृत्य खुद के लिए आत्मघाती साबित होने जा रहा है लेकिन जब तक नेपाल हिंदू राष्ट्र था तब तक ना ही वहां गद्दार थे और ना ही वहां गुलाम। अमूमन दुनिया भर के वामपंथी कहीं न कहीं चीन को ही अपना सुपर बॉस मानते हैं और नेपाल की सरकार की वर्तमान मंशा स्पष्ट गुलामी की तरफ इशारा करती है। भारत की सरकार भी वर्तमान स्थितियों पर सख्त नजर रख रही है और आशा है कि उसी के अनुरूप कार्य भी करेगी।

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