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4 जुलाई: पुण्यतिथि छत्रपति शिवाजी महाराज की नेवी के प्रमुख कान्होजी आंग्रे ... जिन अंग्रेजों ने नेवी के दम पर किया दुनिया पर राज, उन्हें पटखनी दी थी इस हिंदू योद्धा ने

अमर हुतात्मा कान्होजी आंग्रे की पुण्यतिथि पर सुदर्शन परिवार उन्हें बारंबार नमन करते हुए उनकी यशगाथा को सदा सदा के लिए जन जन तक पहुंचाने का संकल्प लेता है.

Abhay Pratap
  • Jul 4 2021 10:41AM

किसी भी राष्ट्र की सुरक्षा में वहां की नेवी अर्थात नौसेना का अहम योगदान होता है. इस बात को हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज ने काफी पहले ही समझ लिया था तथा उस दौर में नौसेना की स्थापना की थी. छत्रपति शिवाजी महाराज की नौसेना अर्थात नेवी के पहले प्रमुख थे कान्होजी आंग्रे, जिनके नाम से ही ब्रिटिश साम्राज्य कांपता था. अगर छत्रपति शिवाजी महाराज मुगलों के काल थे तो कान्होजी आंग्रे अंग्रेजों के लिए खौफ का दूसरा नाम थे. आज उन्हीं कान्होजी आंग्रे की पुण्यतिथि है.

छत्रपति शिवाजी पहले राजा थे, जिन्होंने नौसेना का महत्व देखकर उसका निर्माण किया. इस विषय में उनकी दृष्टि इतनी पैनी थी कि उन्होंने आदेश दिए थे कि विदेशी साहूकार-व्यापारी उदाहरणार्थ फिरंगी, फरांशिस, वलंदेज, डिंगमार (आधुनिक अंग्रेज, फ्रांसीसी, हॉलैंडवासी, डेनमार्कवासी) इत्यादि को समुद्र तट पर स्थान न दिया जाए. देना ही हो, तो तट से दूर, भूमि पर स्थान देकर, इन्हें कड़ी निगरानी में रखा जाए, क्योंकि तट पर रहकर ये अन्य से मिल राज्य के लिए खतरा बन सकते हैं व फिर इन्हें तट से हटाना मुश्किल होता है. छत्रपति शिवाजी महाराज को जहाँ भारतीय नौसेना का सेनापति कहा जाता है  तो कान्होजी आंग्रे को नौसेना का प्रथम नौसेना अध्यक्ष.

कान्होजी आंग्रे का जन्म अगस्त 1669 को हुआ था. उन्हें समुद्र का शिवाजी भी कहा जाता था. कान्होजी आंग्रे की समुद्र पर इतनी धाक थी कि अंग्रेज समुद्र पर मराठों से दूर ही रहते थे. वीर कान्होजी आंग्रे को सम्मानित करने हेतु भारतीय नौसेना का एक पोत, 'कान्होजी आंग्रे' भी है. कान्होजी आंग्रे ने 18वीं सदी की शुरुआत में भारत की तटीय रेखा की रक्षा की थी. आंग्रे की मराठा नौसेना में 80 जहाज थे. इन जहाजों को मछली पकड़ने वाली छोटी नाव की मदद से तैयार किया गया था.

कान्होजी आंग्रे ने मराठा शासन के राजाओं की ही तरह कई दशकों तक भारत के साम्राज्‍य को संभालकर रखा था. आंग्रे को एक निडर और बहादुर कमांडर समझा जाता था. यह कान्होजी आंग्रे का शौर्य ही था कि पुर्तगाली, अंग्रेज और मुगल देश की तटीय सीमा को नुकसान नहीं पहुंचा सके थे. कान्होजी ने शुरुआत में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारी जहाजों को निशाना बनाया था. उन्‍होंने अंग्रेजों के जहाजों पर हमला किया था. सन् 1702 में उन्‍होंने छह अंग्रेज नाविकों के साथ कालीकट से एक व्यापारी जहाज को किडनैप कर लिया था. वो इस जहाज को अपने बंदरगाह पर ले आए थे.

सन् 1707 में, उन्होंने फ्रिगेट बॉम्बे पर हमला किया जो लड़ाई के दौरान ब्‍लास्‍ट हो गया था. अंग्रेज इस बात से डर गए थे कि वो बड़े यूरोपियन जहाजों को छोड़कर किसी भी व्यापारी जहाज को अपने साथ ले जा सकते हैं. कान्होजी ने भारत के पश्चिमी तट पर ग्रेट ब्रिटेन और पुर्तगाल की ताकतवर नौसेनाओं को मात दी थी. 4 नवंबर सन् 1712 को, उनकी नेवी ने मुंबई (तब बॉम्‍बे) के ब्रिटिश राष्‍ट्रपति विलियम एस्लाबी के हथियारों से लैस नाव अल्जाइन पर भी कब्जा कर लिया था. 29 नवंबर 1721 को पुर्तगालियों और ब्रिटिश ने मिलकर कन्होजी को हराने की कोशिशें कीं. लेकिन इसके बाद भी वो नाकामयाब रहे.

कान्‍होजी इस लड़ाई में 6,000 सैनिकों के साथ लड़े थे. उन्‍होंने कई किलो पर हिंदवी स्वराज्य का झंडा फहराया था तथा राष्ट्र व  शौर्य का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया था. जो अंग्रेज अपनी नेवी के दम पर दुनियाभर पर राज करते रहे, कान्होजी आंग्रे ने अंग्रेजों की उसी को खदेड़ा था. 4 जुलाई 1729 को भारतमाता का ये वीर सपूत अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए देवलोकवासी हो गया था. आज अमर हुतात्मा कान्होजी आंग्रे की पुण्यतिथि पर सुदर्शन परिवार उन्हें बारंबार नमन करते हुए उनकी यशगाथा को सदा सदा के लिए जन जन तक पहुंचाने का संकल्प लेता है.

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