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"जिंदगी कैसी है पहेली हाय, कभी तो हंसाये, कभी ये रुलाये"… के गीतकार योगेश गौड़ ने कहा दुनिया को अलविदा

ज़िन्दगी कैसी है पहेली कभी तो हसाएं, कभी ये रुलाएं गाना लिखने वाले जानेमाने लेखक और गीतकार योगेश गौड़ अब इस दुनिया में नहीं रहे.

Sudarshan News
  • May 30 2020 4:45PM

जिंदगी कैसी है पहेली…  के गीतकार योगेश गौड़ ने कहा दुनिया को अलविदा। ज़िन्दगी कैसी है पहेली कभी तो हसाएं, कभी ये रुलाएं गाना लिखने वाले जानेमाने लेखक और गीतकार योगेश गौड़ अब इस दुनिया में नहीं रहे। उन्होंने शुक्रवार को दुनिया को अलविदा कह दिया है। योगेश 77 साल के थे। योगेश गौड़ का जन्म 19 मार्च 1943 को उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुआ था। बता दे कि योगेश गौड़ के निधन पर दुख जाहिर करते हुए स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने ट्वीट किया और लिखा कि मुझे अभी पता चला कि दिल को छूने वाले गीत लिखनेवाले कवि योगेश जी का आज स्वर्गवास हुआ। ये सुनके मुझे बहुत दुख हुआ। 

योगेश जी के लिखे कई गीत मैंने गाए। योगेश जी बहुत शांत और मधुर स्वभाव का इंसान थे। मैं उनको विनम्र श्रद्धाजंलि अर्पण करती हूं।  योगेश गौड़ ने अपने करियर की शुरुआत अपने चचेरे भाई के साथ किया था। उनके चचेरे भाई पटकथा निर्देशक थे। योगेश गौड़ ने पहली बार ऋषिकेश मुखर्जी के साथ काम किया था और उन्होंने 'कहीं दूर जब दिन ढल जाए' गीत लिखा था।  इसके बाद कई और गीत भी लिखने थे जिनमें से एक 'ज़िन्दगी कैसी है पहेली' गीत है। 

योगेश गौड़ ने कई चर्चित गीत लिखे है। जिनमे 'कहीं दूर जब दिन ढल जाए' और 'जिंदगी कैसी है पहेली' गीत शामिल है। ये दोनों ही गाने सुपरहिट फिल्म आंनद जो कि 1971 में आई फिल्म के गाने है। ये गाने ऐसे है जो अभी भी सुने जाते है और इन गानों के जरिए योगेश गौड़ अब भी हमारे दिलों में जिंदा रहेंगे। 'जिंदगी कैसी है पहेली कभी तो हसाएं, कभी ये रुलाएं'।

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