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देश केवल टकटकी लगा कर देखता रहा लेकिन बाल भी बांका ना हुआ मौलाना साद का

कहीं यह शक्ति परीक्षण तो नहीं भारत की सरकार व जनता के आगे तबलीगी जमात का।

Sudarshan News
  • May 16 2020 5:46AM

भारत की राजनीति में इससे पहले आजादी के बाद से अब तक तक जिस प्रकार से तथाकथित भाईचारे एकतरफा तुष्टीकरण का समन्वय मिश्रित किया गया उसका असर आज भी यथावत कायम है । यह बात साबित करती हैं तबलीगी जमातियों के मुखिया व कई f.i.r. जेल रहे मौलाना साद पर पुलिस की अब तक की कार्यवाही जिसमें टकटकी लगाकर देश केवल मूकदर्शक की भूमिका निभाता रहा और पुलिस व शासन केवल खानापूर्ति करके देश के एक जागृत वर्ग को खुश करने का प्रयास करते रहे।

बताने की जरूरत नहीं की कोरोनावायरस का प्रचार और प्रसार कहां से हुआ और कैसे हुआ। देश का एक बड़ा वर्ग जानता है कि जब पुलिस और डॉक्टरों ने मिलकर एक बार को रोना को भारत ने घेर लिया था और खत्म करने के अंतिम चरण में थे तब वह कौन लोग हैं जिन्होंने इस महामारी को बेकाबू बना दिया और वह स्थिति इतने लंबे लाख डाउन के बाद भी नहीं सुधरी। स्थिति सिर्फ यही तक सीमित नहीं रही इसके बाद ऐसे कई लोग गिरफ्तार करके जेल भेज दिए गए जिन्होंने इस मामले में मौलाना साद व उसके साथियों की तरफ उंगली उठाई। इस देश में देवी देवताओं का अपमान वर्क इन पेंटिंग बनाने वालों को सम्मानित करते आप सब ने देखा होगा इस देश में भारत माता की जय बोलना भी जरूरी नहीं है लेकिन इस बीच में ऐसे कई लोगों पर एफ आई आर दर्ज हुई जिन्होंने तबलीगी जमात और मौलाना साद के खिलाफ बोला तो दूर अपनी सोशल मीडिया पर कुछ लिख भी दिया।

और यह कार्यवाही केवल वामपंथी व स्वघोषित सेकुलर प्रदेशों में नहीं बल्कि उन प्रदेशों में भी हुई जिसे चला रहे लोग हिंदुओं की उम्मीद माने जाते हैं। खबरों में आता रहा कि मौलाना साद को दूसरी तीसरी और चौथी और पांचवी नोटिस भेजी गई। यदि एक तरफ देश यह आशा कर रहा है कि भारत की सुरक्षा एजेंसियां संभवत पाकिस्तान से दाऊद इब्राहिम तक को पकड़कर भारत लाए लेकिन इस प्रकार से मौलाना साद के मामले पर पर्दा और पानी दोनों डाला गया और कितने जनाक्रोश के बाद भी उसका बाल भी बांका नहीं हुआ ऐसे हालात में कहना गलत नहीं होगा कि मौलाना साद अकेले ही बहुत लोगों पर भारी है और कानून की धाराओं में संभवत उसके लिए वह कड़ी कार्यवाही का प्रावधान नहीं है जो इस बीच में अनुज बाजपेई व आचार्य सूर्य सागर जैसे लोगों ने झेली है

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43 Comments

 आपकी अमानत आपकी सेवा में मुझे माफ़ कर दें। मेरे प्यारे पाठको! मुझे माफ़ कर दीजिए, मैं आपकी और सारी मुस्लिम बिरादरी की ओर से आपसे माफ़ी चाहता हूँ, जिसने इस दुनिया के सबसे बड़े शैतान के बहकावे में आकर आपकी सबसे बड़ी दौलत आप तक नहीं पहुँचायी। उस शैतान ने पाप की जगह पापी का अपमान मन में बिठा कर इस पूरे संसार को जंग का मैदान बना दिया। इस ग़लती को सोचते ही मैंने आज क़लम उठाया है कि आपका हक़ आप तक पहुँचाऊं और बिना किसी लालच के प्रेम और मानवता की बातें करुँ। वह सच्चा स्वामी जो मन का हाल जानता है, गवाह है कि इन पन्नों को आप तक पहुँचाने में अत्यन्त निष्ठा के साथ मैं सच्ची हमदर्दी का हक़ निभाना चाहता हूँ। इन बातों को आप तक न पहुँचाने के दुःख में कितनी रातों की मेरी नींद उड़ी है। एक प्रेम से भरी बात यह बात करने की नहीं, मगर मेरी इच्छा है कि मेरी इन प्रेम भरी बातों को आप प्यार की आँखों से देखें और पढ़ें। उस स्वामी के बारे में जो सारे संसार को चलाने और बनाने वाला है, सोच विचार करें, ताकि मेरे मन और मेरी आत्मा को शान्ति मिले कि मैं ने अपने भाई या बहन की अमानत उस तक पहुँचाई और अपने मनुष्य और भाई होने का कर्तव्य पूरा किया।   इस संसार में आने के बाद एक मनुष्य के लिए जिस सच्चाई को जानना और मानना आवश्यक है और जो इसकी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी और कर्तव्य है वह प्रेम भरी बात में आपको सुनाना चाहता हूँ। प्रकृति का सबसे बड़ा सच इस संसार, बल्कि प्रकृति की सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि इस संसार में सारे जीवों और पूरी कायनात को बनाने वाला, पैदा करने वाला और उसका प्रबन्ध करने वाला केवल और केवल एक अकेला स्वामी है। वह अपनी ज़ात, गुण और अधिकारों में अकेला है। दुनिया को बनाने, चलाने, मारने और जिलाने में उसका कोई साझी नहीं। वह एक ऐसी शक्ति है जो हर जगह मौजूद है। हरेक की सुनता है हरेक को देखता है। सारे संसार में एक पत्ता भी उसकी आज्ञा के बिना हिल नहीं सकता। हर मनुष्य की आत्मा उसकी गवाही देती है, चाहे वह किसी भी धर्म का मानने वाला हो और चाहे वह मूर्ति का पुजारी ही क्यों न हो मगर अंदर से वह विश्वास रखता है कि पैदा करने वाला, पालने वाला, पालनहार और असली मालिक तो केवल वही एक है। इंसान की बुद्धि में भी इसके अलावा और कोई बात नहीं आती कि सारे संसार का स्वामी एक ही है। यदि किसी स्कूल के दो प्रधानाचार्य हों तो स्कूल नहीं चल सकता। यदि एक गांव के दो प्रधान हों तो गांव की व्यवस्था तलपट हो जाएगी। किसी देश के दो बादशाह नहीं हो सकते तो इतनी बड़ी और व्यापक कायनात की व्यवस्था एक से अधिक स्वामियों के द्वारा कैसे चल सकती है? और संसार की प्रबंधक कई हस्तियां कैसे हो सकती हैं? एक दलील कुरआन, जो अल्लाह की वाणी है उसने दुनिया को अपनी सत्यता बताने के लिए यह दावा किया है कि- ‘‘हमने जो कुछ अपने बन्दे पर ( कुरआन) उतारा है उसमें यदि तुमको संदेह है (कि कुरआन उस मालिक का सच्चा कलाम नहीं है) तो इस जैसी एक सूरत ही (बना) ले आओ और चाहो तो इस काम के लिए अल्लाह को छोड़ कर अपने सहायकों को भी (मदद के लिए) बुला लो, यदि तुम सच्चे हो।0’’ (अनुवाद कुरआन, बक़रा 2:23) चौदह-सौ साल से आज तक दुनिया के योग्य लेखक, विद्वान और बुद्धिजीवी शौध और रिसर्च करके थक चुके और अपना सिर झुका चुके हैं, पर वास्तव में कोई भी अल्लाह की इस चुनौती का जवाब न दे सका और न भविष्य में दे सकेगा। इस पवित्र पुस्तक में अल्लाह ने हमारी बुद्धि को अपील करने के लिए बहुत सी दलीलें दी हैं। एक उदाहरण यह है कि- ‘‘यदि धरती और आकाशों में अल्लाह के अलावा स्वामी और शासक होते तो इन दोनों में बड़ा बिगाड़ और उत्पात मच जाता।’’ (अनुवाद कुरआन, अम्बिया 21:22) बात स्पष्ट है। यदि एक के अलावा कई शासक व स्वामी होते तो झगड़ा होता। एक कहताः अब रात होगी, दूसरा कहताः दिन होगा। एक कहताः छः महीने का दिन होगा, दूसरा कहताः तीन महीने का होगा। एक कहताः सूरज आज पश्चिम से उदय होगा, दूसरा कहताः नहीं पूरब से उदय होगा। यदि देवी-देवताओं को यह अधिकार वास्तव में होता और वे अल्लाह के कामों में भागीदार भी होते तो कभी ऐसा होता कि एक गुलाम ने पूजा अर्चना करके वर्षा के देवता से अपनी इच्छा मनवा ली तो बड़े स्वामी की ओर से आदेश आता कि अभी वर्षा नहीं होगी। फिर नीचे वाले हड़ताल कर देते। अब लोग बैठे हैं कि दिन नहीं निकला, पता चला कि सूरज देवता ने हड़ताल कर रखी है। सच यह है कि दुनिया की हर चीज़ गवाही दे रही है, यह संगठित रुप से चलती हुई कायनात की व्यवस्था गवाही दे रही है कि संसार का स्वामी अकेला और केवल एक है। वह जब चाहे और जो चाहे कर सकता है। उसे कल्पना एवं विचारों में क़ैद नहीं किया जा सकता। उसकी तस्वीर नहीं बनाई जा सकती। उस स्वामी ने सारे संसार को मनुष्यों के फ़ायदे और उनकी सेवा के लिए पैदा किया है। सूरज मनुष्य का सेवक, हवा मनुष्य की सेवक, यह धरती भी मनुष्य की सेवक है। आग, पानी, जानदार और बेजान दुनिया की हर वस्तु मनुष्य की सेवा के लिए बनायी गयी है। और उस स्वामी ने मनुष्य को अपना दास बना कर उसे अपनी उपासना करने और आदेश मानने के लिए पैदा किया है, ताकि वह इस दुनिया के सारे मामलों को सुचारु रुप से पूरा करे और इसी के साथ उसका स्वामी व उपास्य उससे प्रसन्न व राज़ी हो जाए। न्याय की बात है कि जब पैदा करने वाला, जीवन देने वाला, मौत देने वाला, खाना, पानी देने वाला और जीवन की हर ज़रूरत को पूरी करने वाला वही एक है तो सच्चे मनुष्य को अपने जीवन और जीवन संबंधी समस्त मामलों को अपने स्वामी की इच्छा के अनुसार उसका आज्ञापालक होकर पूरा करना चाहिए। यदि कोई मनुष्य अपना जीवनकाल उस अकेले स्वामी का आदेश मानते हुए नहीं गुज़ार रहा है तो सही अर्थों में वह मनुष्य कहलाने योग्य नहीं। एक बड़ी सच्चाई उस सच्चे स्वामी ने अपनी सच्ची पुस्तक कुरआन में बहुत सी सच्चाई में से एक सच्चाई हमें यह बतायी है- ‘‘हर जीवन को मौत का स्वाद चखना है फिर तुम सब हमारी ही ओर लौटाए जाओगे।’’ (अनुवाद कुरआन, अन्कबूत 29:57) इस आयत के दो भाग हैं। पहला यह कि हरेक जीव को मौत का स्वाद चखना है। यह ऐसी बात है कि हर धर्म, हर वर्ग और हर स्थान का आदमी इस बात पर विश्वास करता है बल्कि जो धर्म को भी नहीं मानता वह भी इस सच्चाई के सामने सिर झुकाता है और जानवर तक मौत की सच्चाई को समझते हैं। चूहा, बिल्ली को देखते ही अपनी जान बचाकर भागता है और कुत्ता भी सड़क पर आती हुई किसी गाड़ी को देख कर अपनी जान बचाने के लिए तेज़ी से हट जाता है, क्योंकि ये जानते हैं कि यदि इन्होंने ऐसा न किया तो उनका मर जाना निश्चित है। मौत के बाद इस आयत के दूसरे भाग में क़ुरआन एक और बड़ी सच्चाई की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट करता है। यदि वह मनुष्य की समझ में आ जाए तो सारे संसार का वातावरण बदल जाए। वह सच्चाई यह है कि तुम मरने के बाद मेरी ही ओर लौटाए जाओगे और इस संसार में जैसा काम करोगे वैसा ही बदला पाओगे। मरने के बाद तुम मिट्टी में मिल जाओगे या गल सड़ जाओगे और दोबारा जीवित नहीं किए जाआगे, ऐसा नहीं है और न यह सच है कि मरने के बाद तुम्हारी आत्मा किसी और शरीर में प्रवेश कर जाएगी। यह दृष्टिकोण किसी भी दृष्टि से मानव बुद्धि की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। पहली बात यह है कि आवागमन का यह काल्पनिक विचार वेदों में मौजूद नहीं है, बाद के पुरानों (देवमालाई कहानियों) में इसका उल्लेख है। इस विचारधारा की शुरुआत इस प्रकार हुई कि शैतान ने धर्म के नाम पर लोगों को ऊँच-नीच में जकड़ दिया। धर्म के नाम पर शूद्रों से सेवा कराने और उनको नीच और तुच्छ समझने वाले धर्म के ठेकेदारों से समाज के दबे कुचले वर्ग के लोगों ने जब यह सवाल किया कि जब हमारा पैदा करने वाला ईश्वर है और उसने सारे मनुष्यों को आँख, कान, नाक, हर वस्तु में समान बनाया है तो आप लोग अपने अपको ऊँचा और हमें नीचा और तुच्छ क्यों समझते हैं? इसका उन्होंने आवागमन का सहारा लेकर यह जवाब दिया कि तुम्हारे पिछले जीवन के बुरे कामों ने तुम्हें इस जन्म में नीच और अपमानित बनाया है। इस विचाराधारा के अनुसार सारी आत्माएं। दोबारा पैदा होती हैं और अपने कामों के हिसाब से शरीर बदल कर आती हैं। अधिक बुरे काम करने वाले लोग जानवरों के शरीर में पैदा होते हैं। इनसे और अधिक बुरे काम करने वाले वनस्पति के रुप में आ जाते हैं, जिनके काम अच्छे होते हैं, वे आवागमन के चक्कर से मुक्ति पा जाते हैं। आवागमन के विरुद्ध तीन तर्क 1. इस सम्बंध में सबसे बड़ी बात यह है कि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस धरती पर सबसे पहले वनस्पति पैदा हुई, फिर जानवर पैदा हुए और उसके करोड़ों साल बाद मनुष्य का जन्म हुआ। अब जबकि मनुष्य अभी इस धरती पर पैदा ही नहीं हुआ था और किसी मानव आत्मा ने अभी बुरा काम किया ही नहीं था तो सवाल पैदा होता है कि वे किसकी आत्माएं थीं, जिन्होंने अनगिनत जानवरों और पेड़ पौधों के रुप में जन्म लिया? 2. दूसरी बात यह है कि इस विचार धारा को मान लेने के बाद तो यह होना चाहिए था कि धरती पर जानवरों की संख्या में निरंतर कमी होती रहती। जो आत्माएं आवागमन से मुक्ति पा लेतीं, उनकी संख्या कम होती रहनी चाहिए थी, जबकि यह वास्तविकता हमारे सामने है कि धरती पर मनुष्यों, जानवरों और वनस्पति हर प्रकार के जीवों की संख्या में निरंतर बड़ी भारी वृद्धि हो रही है। 3. तीसरी बात यह है कि इस दुनिया में पैदा होने वालों और मरने वालों की संख्या में धरती व आकाश के जितना अंतर दिखाई देता है, मरने वालों की तुलना में पैदा होने वालों की संख्या कहीं अधिक है। खरबों अनगिनत मच्छर पैदा होते हैं, जबकि मरने वाले इससे बहुत कम हैं।   कभी अपने देश में किसी बच्चे के बारे में यह बात फैल जाती है कि वह उस जगह को पहचान रहा है, जहां वह पिछले जन्म में रहता था। अपना पुराना नाम भी बता रहा है और यह भी कि उसने दोबारा जन्म लिया है। सच्ची बात तो यह है कि इन सारी बातों का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं होता। इस प्रकार की चीजें विभिन्न प्रकार की मनोवैज्ञानिक व मानसिक रोग या आध्यात्मिक व सामाजिक व हालात की प्रतिक्रिया का नतीजा होती हैं, जिनका सुचारु रुप से इलाज कराया जाना चाहिए। मूल वास्तविकता से इनका दूर तक कोई वास्ता नहीं होता। सच्ची बात यह है कि हक़ीकत मरने के बाद हर मनुष्य के सामने आ जाएगी कि मनुष्य मरने के बाद अपने पैदा करने वाले स्वामी के पास जाता है और उसने उस संसार में जैसे काम किए होंगे, उसके हिसाब से प्रलय में दण्ड या इनाम पाएगा। कर्मों का फल मिलेगा यदि मनुष्य अपने पालनहार की उपासना और उसकी बात मानते हुए अच्छे काम करेगा, भलाई और सदाचार के रास्ते पर चलेगा तो वह अपने पालनहार की कृपा से जन्नत में जाएगा। जन्नत, जहाँ आराम की हर वस्तु है, बल्कि वहाँ तो आनंद व सुख वैभव की ऐसी वस्तुएं भी है, जिनको इस दुनिया में न किसी आँख ने देखा न किसी कान ने सुना न किसी दिल में उनका विचार आया। और जन्नत की सबसे बडी नेमत यह होगी कि जन्नती लोग वहाँ अपनी आँखों से अपने स्वामी एवं पालनहार को देख सकेंगे, जिसके बराबर आनन्द और हर्ष की कोई वस्तु नहीं होगी। इसी तरह जो लोग बुरे काम करेंगे अपने पालनहार के साथ दूसरों को भागी बनाएंगे और विद्रोह करके अपने स्वामी के आदेश का इन्कार करेंगे वे नरक में डाले जाएंगे। वे वहाँ आग में जलेंगे। वहाँ उनको उनके बुरे कामों और अपराधों का दण्ड मिलेगा और सबसे बडा दंड यह होगा कि वे अपने स्वामी को देखने से वंचित रह जाएंगे और उन पर उनके स्वामी की दर्दनाक यातना होगी। पालनहार का साझी बनाना सबसे बड़ा गुनाह उस सच्चे असली स्वामी ने अपनी किताब कुरआन में हमे बताया कि भलाइयां और सदकर्म छोटे भी होते हैं और बडे़ भी। इसी तरह उस स्वामी के यहाँ अपराध, पाप और बुरे काम भी छोटे बडे़ होते हैं। उसने हमें बताया है कि जो अपराध व पाप मनुष्य को सबसे अधिक और भयानक दण्ड का भोगी बनाता है, जिसे वह कभी क्षमा नहीं करेगा और जिसको करने वाला सदैव के लिए नरक में जलता रहेगा। वह नरक से बाहर नहीं जा सकेगा। वह मौत की इच्छा करेगा परन्तु उसे मौत कभी न आएगी। वह अपराध इस अकेले ईश्वर, पालनहार के साथ, उसके गुणों व अधिकारों में किसी को भागीदार बनाना है, इसके अलावा किसी दूसरे के आगे अपना सिर या माथा टेकना है और किसी और को पूजा योग्य मानना, मारने वाला, जीवित करने वाला, आजीविका देने वाला, लाभ व हानि का मालिक समझना बहुत बडा पाप और अत्यन्त ऊँचें दर्जे का जुल्म है, चाहे ऐसा किसी देवी देवता को माना जाए या सूरज चांद, सितारे या किसी पीर फ़क़ीर को, किसी को भी उस एक मात्रा स्वामी के गुणों में बराबर का या भागीदार समझना शिर्क (बहुदेववाद) है, जिसे वह स्वामी कभी क्षमा नहीं करेगा। इसके अलावा किसी भी गुनाह को यदि वह चाहे तो माफ़ कर देगा। इस पाप (अर्थात शिर्क) को स्वयं हमारी बुद्धि भी इतना ही बुरा समझती है और हमें भी इस काम को उतना ही अप्रिय समझते हैं। एक उदाहरण उदाहरण स्वरूप यदि किसी की पत्नी बड़ी नकचढ़ी हो, सामान्य बातों पर झगड़े पर उतर आती हो, कुछ कहना सुनना नहीं मानती हो, लेकिन पति यदि इस घर से उसे निकलने को कह दे तो वह कहती है कि मैं केवल तेरी हूँ, तेरी ही रहूंगी, तेरे ही दरवाजे पर मरूंगी और एक क्षण के लिए तेरे घर से बाहर नहीं जाऊँगी तो पति लाख क्रोध के बाद भी उसे निभाने के लिए मजबूर हो जाएगा। इसके विपरीत यदि किसी की पत्नी बड़ी सेवा करने वाली, आदेश का पालन करने की पाबन्द हो, वह हर समय उसका ध्यान रखती हो, पति आधी रात को घर आता हो उसकी प्रतीक्षा करती हो, उसके लिए खाना गर्म करके उसके सामने रख देती हो, उससे प्रेम भरी बातें भी करती हो, वह एक दिन उससे कहने लगे कि आप मेरे जीवन साथी हैं लेकिन मेरा अकेले आप से काम नहीं चलता, इसलिए अपने अमुक पड़ौसी को भी मैंने आज से अपना पति बना लिया है तो यदि उसके पति में कुछ भी ग़ैरत होगी तो वह यह बात कदापि सहन नहीं कर सकेगा। वह एक क्षण के लिए भी ऐसी एहसान फ़रामोश, निर्लज्ज और ख़राब औरत को अपने पास रखना पसन्द नहीं करेगा। आख़िर ऐसा क्यों है? केवल इसलिए कि कोई पति अपने पति होने के विशेष अधिकारों में किसी को भागीदार देखना नहीं चाहता। आप वीर्य की एक बूंद से बनी अपनी सन्तान में किसी और को अपना साझी बनाना पसन्द नहीं करते तो वह स्वामी जो अत्यन्त तुच्छ बूंद से मनुष्य को पैदा करता है वह कैसे यह सहन कर लेगा कि उसका पैदा किया हुआ मनुष्य उसके साथ किसी और को उसका साझी या भागीदार बनाए, उसके साथ किसी दुसरे की उपासना की जाए और बात मानी जाए, जबकि इस पूरे संसार में जिसे जो कुछ दिया है उसी ने प्रदान किया है। जिस प्रकार एक वैश्या अपनी इज़्ज़त व सतीत्व बेच कर हर आने वाले आदमी को अपने ऊपर क़ब्ज़ा दे देती है तो इसी कारण वह हमारी नज़रों से गिरी हुई रहती है, तो वह आदमी भी अपने स्वामी की नज़रों में इससे कहीं अधिक नीच, अपमानित और गिरा हुआ है, जो उसे छोड कर किसी दूसरे की उपासना में मस्त हो, चाहे वह कोई देवता हो या फ़रिशता, जिन्न हो या मनुष्य, मूर्ति हो या बुत, क़ब्र हो या स्थान या कोई दूसरी काल्पनिक वस्तु। क़ुरआन में मूर्ति पूजा का विरोध मूर्ति पूजा के लिए कुरआन में एक उदाहरण प्रस्तुत किया गया है, जो सोच विचार करने योग्य है- ‘‘अल्लाह को छोडकर तुम जिन (मूर्ति, क़ब्र व अस्थान वालों) को पुकारते हो, वे सब मिलकर एक मक्खी भी पैदा नहीं कर सकते (पैदा करना तो दूर की बात है) यदि मक्खी उनके सामने से कोई वस्तु (प्रसाद आदि) छीन ले जाए तो वे उसे वापस भी नहीं ले सकते। माँगने वाला और जिससे माँगा जा रहा है दोनों कितने कमजोर हैं और उन्होने अल्लाह का इस तरह महत्व नहीं समझा जैसा समझना चाहिए था। निस्संदेह अल्लाह शाक्तिशाली और ज़बरदस्त है।’’ (अनुवाद कुरआन, हज 22:73-74) कितना सटीक उदाहरण है। बनाने वाला तो स्वयं अल्लाह है। अपने हाथों से बनाई गयी मूर्तियों और बुतों के बनाने वाले बेख़बर मनुष्य हैं। यदि इन मूर्तियों में थोडी बहुत समझ होती तो वे मनुष्यों की उपासना करतीं। एक कमजोर विचार कुछ लोगों का यह मानना है कि हम उनकी उपासना इसलिए करते हैं कि उन्होने ही हमें मालिक का रास्ता दिखाया है और उनके माध्यम से हम मालिक की कृपा हासिल करते हैं। यह बिल्कुल ऐसी बात हुई कि कोई कुली से ट्रेन के बारे में मालूम करे और जब कुली उसे सही जानकारी दे दे तो वह ट्रेन की जगह कुली पर ही सवार हो जाए कि इसी ने हमें ट्रेन के बारे में बताया है। इसी तरह अल्लाह की ओर सही मार्ग दर्शन करने और रास्ता बताने वाले की उपासना करना ठीक ऐसा ही है, जैसे ट्रेन को छोड़ कर कुली पर सवार हो जाना। कुछ भाई यह भी कहते हैं कि हम केवल ध्यान जमाने और अपने को आकर्षित करने के लिए इन मूर्तियों को रखते हैं। यह भी भली कही कि बड़े ध्यान से किसी खम्बे को देख रहे हैं और कह रहे हैं कि हम तो केवल पिताजी का ध्यान जमाने के लिए खम्बे को देख रहे हैं। कहाँ पिताजी और कहाँ खम्बा? कहाँ ये कमज़ोर मूर्तियाँ और कहाँ वह शक्तिशाली, बलवान और दयावान मालिक! इससे ध्यान बंधेगा या बटेगा? सारांश यह है कि किसी भी तरह से किसी को भी अल्लाह का साझी मानना महा पाप है, जिसे वह कभी भी क्षमा नहीं करेगा और ऐसा आदमी सदैव के लिए नरक का ईंधन बनेगा। सबसे बड़ा सदकर्म ईमान है इसी प्रकार सबसे बड़ा सदकर्म ‘‘ईमान’’ है, जिसके बारे में दुनिया के समस्त धर्म वाले यह कहते हैं कि सब कुछ यहीं छोड़ जाना है, मरने के बाद आदमी के साथ केवल ईमान जाएगा। ईमानदार या ईमान वाला उसे कहते हैं जो हक़ देने वाला हो, इसके विपरीत हक़ मारने वाले को ज़ालिम व काफ़िर (इन्कारी) कहते हैं। मनुष्य पर सबसे बड़ा हक़ उसके पैदा करने वाले का है। वह यह कि सबको पैदा करने वाला, जीवन और मृत्यु देने वाला स्वामी, पालनहार और उपासना के योग्य केवल अकेला अल्लाह है, तो फिर उसी की उपासना की जाए, उसी को स्वामी, लाभ हानि, सम्मान व अपमान देने वाला समझा जाए और उसके दिए हुए जीवन को उसकी इच्छा व आज्ञा अनुसार बसर किया जाए। उसी को माना जाए और उसी की मानी जाए। इसी का नाम ईमान है। केवल एक को मालिक माने बिना और उसी का आज्ञा पालन किए बिना मनुष्य ईमानदार अर्थात ईमान वाला नहीं हो सकता बल्कि वह बे-ईमान और काफ़िर कहलाएगा। मालिक का सबसे बड़ा हक़ मार कर लोगों के सामने अपनी ईमानदारी जताना ऐसा ही है कि एक डाकू बहुत बड़ी डकैती से मालदार बन जाए और फिर दुकान पर लाला जी से कहे कि आपका एक रुपया मेरे पास हिसाब में अधिक आ गया है, आप ले लीजिए। इतना माल लूटने के बाद एक रुपए का हिसाब देना, ईमानदारी नहीं है। अपने मालिक को छोड़ कर किसी और की उपासना करना इससे भी बुरी और घिनौनी ईमानदारी है। ईमान केवल यह है कि मनुष्य अपने मालिक को अकेला माने, उस अकेले की उपासना और जीवन की हर घड़ी को मालिक की मर्ज़ी और उसके आदेशानुसार बसर करे। उसके दिए हुए जीवन को उसकी इच्छानुसार बसर करना ही दीन कहलाता है और उसके आदेशों को ठुकरा देना अधर्म है। सच्चा दीन सच्चा दीन आरंभ से ही एक है और उसकी शिक्षा है कि उस अकेले ही को माना जाए और उसी का हुक्म भी माना जाए। अल्लाह ने कुरआन में कहा है- ‘‘इस्लाम के अलावा जो भी किसी और दीन को अपनाएगा वह अस्वीकार्य होगा और ऐसा व्यक्ति परलोक में हानि उठाने वालों में होगा।’’ (अनुवाद कुरआन, आले इमरान 3:85) मनुष्य की कमज़ोरी है कि उसकी नज़र एक विशेष सीमा तक देख सकती है। उसके कान एक सीमा तक सुन सकते हैं, उसके सूंघने चखने और छूने की शक्ति भी सीमित है। इन पाँच इन्द्रियों से उसकी बुद्धि को जानकारी मिलती है, इसी तरह बुद्धि की पहुँच की भी एक सीमा है। वह मालिक किस तरह का जीवन पसंद करता है? उसकी उपासना किस तरह की जाए? मरने के बाद क्या होगा? जन्नत किन लोगों को मिलेगी? वे कौन से काम हैं जिनके नतीजे में मनुष्य नरक में जाएगा? इन सारी बातों का पता मानव बुद्धि, सूझ बूझ और ज्ञान से नहीं लगाया जा सकता। पैग़म्बर (सन्देष्टा) मनुष्यों की इस कमज़ोरी पर दया करके उसके पालनकार ने अपने बंदों में से उन महान मनुष्यों पर जिनको उसने इस दायित्व के योग्य समझा, अपने फ़रिश्तों द्वारा उन पर अपना संदेश उतारा, जिन्होंने मनुष्य को जीवन बसर करने और उपासना के तौर तरीके़ बताए और जीवन की वे सच्चाईयाँ बतायीं जो वह अपनी बुद्धि के आधार पर नहीं समझ सकता था। ऐसे बुज़ुर्ग और महान मनुष्य को नबी, रसूल या सन्देष्टा कहा जाता है। इसे अवतार भी कह सकते हैं बशर्ते कि अवतार का मतलब हो ‘‘वह मनुष्य, जिसे अल्लाह ने मनुष्यों तक अपना संदेश पहुँचाने के लिए चुना हो’’। लेकिन आज कल अवतार का मतलब यह समझा जाता है कि ईश्वर मनुष्य के रूप में धरती पर उतरा है। यह व्यर्थ विचार और अंधी आस्था है। यह महा पाप है। इस असत्य धारणा ने मनुष्य को एक मालिक की उपासना से हटाकर उसे मूर्ति पूजा की दलदल में फंसा दिया। वह महान मनुष्य जिनको अल्लाह ने लोगों को सच्चा रास्ता बताने के लिए चुना और जिनको नबी और रसूल कहा गया, हर क़ौम में आते रहे हैं। उन सब ने लोगों को एक अल्लाह को मानने, केवल उसी अकेले की उपासना करने और उसकी इच्छा से जीवन बसर करने का जो तरीक़ा (शरीअत या धार्मिक क़ानून) वे लाए, उसकी पाबन्दी करने को कहा। इनमें से किसी संदेष्टा ने भी ईश्वर के अलावा अपनी या किसी और की उपासना की दावत नहीं दी, बल्कि उन्होंने उसे सबसे भयानक और बड़ा भारी अपराध ठहराते हुए सबसे अधिक इसी पाप से लोगों को रोका। उनकी बातों पर लोगों ने विश्वास कर लिया और सच्चे मार्ग पर चलने लगे। मूर्ति पूजा कब आरंभ हुई? ऐसे समस्त सन्देष्टा और उनके मानने वाले लोग सदाचारी मनुष्य थे। उनको मौत आनी थी (जिसे मौत नहीं वह केवल अल्लाह है।) नबी या रसूल या सदाचारी लोगों की मौत के बाद उनके मानने वालों को उनकी बहुत याद आयी और वे उनकी याद में बहुत रोते थे। शैतान को मौक़ा मिल गया। वह मनुष्य का दुश्मन है और मनुष्य की परीक्षा के लिए अल्लाह ने उसे बहकाने और बुरी बातें मनुष्य के दिल में डालने का साहस जुटा दिया कि देखें कौन उस पैदा करने वाले मालिक को मानता है और कौन शैतान का मानता है। शैतान लोगों के पास आया और कहा कि तुम्हें अपने रसूल या बुजुर्ग से बड़ा प्रेम है। मरने के बाद वे तुम्हारी नज़रों से ओझल हो गए हैं, ये सब अल्लाह के चहेते बन्दे हैं। अल्लाह उनकी बात नहीं टालता, इसलिए में उनकी एक मूर्ति बना देता हूँ। उसे देख कर तुम सुख शान्ति पा सकते हो। शैतान ने मूर्ति बनाई। जब उनका मन करता, वे उसे देखा करते थे। धीरे-धीरे जब उस मूर्ति की मुहब्बत उनके दिल में बस गई तो शैतान ने कहा कि ये रसूल (सन्देष्टा), नबी व बुज़ुर्ग अल्लाह के बड़े निकट हैं। यदि तुम इनकी मूर्ति के आगे अपना सिर झुकाओगे तो अपने को ईश्वर के समीप पाओगे और ईश्वर तुम्हारी बात मान लेगा या

  • Guest
  • Jun 20 2020 2:43:00:080PM

अतंकवादी देविद्र को बेल हो जाए और मजलूमों को जेल हो जाए तो कमाल कि पोस्ट लिखी है अक्ल के अंधे ने ।

  • Guest
  • Jun 20 2020 2:38:14:440PM

बेचारी मोदी सरकार. बेचारे भक्त . और बिचारी मिडिया... काश मोदीजी प्रधान मंत्री होते. उनकी सरकार होती तो जैसे एक्टिविष्टो कोलाकडाउन मे घेरकर अंदर डाले. यै भी नही बचता.. जब से नेहरू आया मोदी चेनल गोबर परोसने मजबूर हो गऐ.

  • Guest
  • Jun 16 2020 4:39:54:443PM

इस मामले में दिल्ली सरकार और मोदी दोनों से पूछा जय, कि मौलाना को आरेस्ट करना किसकी जिमेवारी है। तो इसके जवाब में मोदी कहेंगे किजरवाल का और किजरवाल कहेंगे की मोदी का। क्योकि दोनों को अपने अपने भोट बैंक की चिंता है। 2014 के इलेक्शन के पहले मोदी बोले की स्विश बैंक से मैं ओ सारा पैसा लाऊँगा जो अवैध रूप से भारतीयों द्वारा रखा गया है। क्या ओ पैसा मोदी ला पाए। मोदी लोगो को मूर्ख बाना रहे है, और कु छह नही।

  • Guest
  • Jun 16 2020 12:13:32:213PM

Eise Logo ko sakt se sakt Saja Hone Chaeiye

  • Guest
  • Jun 15 2020 11:16:54:003PM

ऐसे लोगों को शक्त से शक्त सजा देनी चाहिए

  • Guest
  • Jun 15 2020 3:27:56:700PM

कोई आश्चर्य नही अगर ये अब पाकिस्तान पहुँच गया हो भारत के गद्दार नेताओं की मदद से l

  • Guest
  • Jun 15 2020 2:57:02:337PM

Kitne Kamaal Ki Baat Hai ki jab sarkar mamooli students ko pakad kar band kar deti hai kabhi NSA Act ke that aur kabhi sedition mein... Woh maulana Saad ko lekar chup kyon hai... Kuch toh baat hai... Yeh bewajah media ke dwara uchhali hui kahaniya hain so that govt ki nakaamiyan Chhup saki aur kisi pe blame dala ja sake...

  • Guest
  • Jun 15 2020 5:51:32:077AM

कोरोना का प्रसार यदि भारत में हुआ है, तो इसका सारा टीकरा सरकार और प्रशासन के सर फूटना चाहिए ना की किसी समूह, जाति या धर्म पर। सत्य तो यही है कि वर्तमान केन्द्र सरकार को अपनी सत्ता की चिंता अधिक है और नागरिक की चिंता शुन्य । जब लाॅक डाउन लगाने का समय था तो सरकार कांग्रेस की नागरिक द्वारा चुनी गई सरकार का पांव खीचने मे लगी थी और अपनी सरकार बनाने मे, जैसे ही horse treading की बदौलत सरकार बनी, आनन-फानन मे मूर्खता के साथ लाॅक डाउन लगा दिया गया, अब जबकि कोरोना केस बढ़ रहा है, तो लाॅक डाउन हटा दिया गया, क्योंकि बिहार और बंगाल मे विधान सभा का चुनाव आने वाला। तुष्टिकरण की परिभाषा समझने की आवश्यकता है, जिस समुदाय विशेष पर विगत सरकार द्वारा तुष्टिकरण का आरोप लगाया जाता है, तो सैक्चर कमेटी की आख्यान से स्पष्ट हो जाता है कि जिस समुदाय विशेष पर तुष्टिकरण का आरोप लगता आ रहा है, उसका कितना लाभ उस समुदाय को मिला है। सच तो यही है कि भारतीय नागरिक का सभी सरकारें सिर्फ शोषन/दोहन करती है, नागरिको को सिर्फ मुर्ख बनाया जाता है। आज संपूर्ण भारत को ना तो जाति, धर्म या प्रदेश से ख़तरा है बल्कि देश को ख़तरा उस मानसिकता से जो अपने स्वार्थ के लिए नीचता की हर हद पार करने को तैयार हैं। जय हिंद.......

  • Guest
  • Jun 14 2020 1:17:32:113PM

हिन्दुस्तान मे सबसे ज्यादा कोरोंना positive report हिन्दुओ की आयीं है...... तो यहा कोरोंना किसने फैलाया.... बेवजह मुस्लिमों को बदनाम करने की कोशिश है

  • Guest
  • Jun 14 2020 11:36:15:307AM

हिन्दुस्तान मे सबसे ज्यादा कोरोंना positive report हिन्दुओ की आयीं है...... तो यहा कोरोंना किसने फैलाया.... बेवजह मुस्लिमों को बदनाम करने की कोशिश है

  • Guest
  • Jun 14 2020 11:36:06:067AM

सरकार भी i डरती है

  • Guest
  • Jun 13 2020 11:43:59:500AM

Fans gaya hai

  • Guest
  • Jun 13 2020 9:07:44:063AM

Fhaci ho shad ko

  • Guest
  • Jun 12 2020 11:28:26:283PM

Beautiful

  • Guest
  • Jun 12 2020 10:07:16:237PM

Kab tak bachega maulana saad bakre ki amma kitne din bachayegi kasai se just wait &watch

  • Guest
  • Jun 12 2020 8:22:34:637PM

Jako rako saiyan bal na baka kar sake koi

  • Guest
  • Jun 10 2020 7:51:47:430PM

Mullna sad ka bhi number hai jekte jho

  • Guest
  • Jun 7 2020 8:07:08:130PM

मौलाना साद को दिल्ली सरकार बचा रही है ये बच्चा बच्चा जानता है केजरीवाल साहब का संरक्षण हो और वो आदमी पकड़ा जाय ऐसा संभव नहीं है

  • Guest
  • Jun 6 2020 9:23:00:583AM

इसे फासी की सजा होनी चाहिए।।

  • Guest
  • Jun 5 2020 11:31:11:680PM

अगर मुरारी पापी ने मोहमद के बारे मे कहा होता की मोहमद टोटल फेल था पुरे जीवन सेक्स ओर हिंसा करी ओर आज उसके अनुयायी भी उसकी कुरान पर चलकर यही कररहे हे तो मुरारी की गर्दन काटदेते शान्तीदुत

  • Guest
  • Jun 5 2020 6:14:53:313PM

पुलिस और प्रशासन का डंडा केवल हिन्दू नेताओं और धर्मप्रचारकों पर हीं चलने के लिए हैं। अब तक कोई हिंदू गुरु ऐसा करता तो अब तक सरकार और पुलिस अपना कर्तव्य निभाने में पीछे नहीं रहता।

  • Guest
  • Jun 4 2020 10:35:43:883PM

Media ye mudda na chhode iske uper quick action honi chahiye pura desh support me hai.... Aaj corona nahi aata to ye itni badi saajish bhi smne nahi aati.....

  • Guest
  • Jun 4 2020 10:32:33:573PM

Absolutely Correct

  • Guest
  • Jun 4 2020 12:29:02:020PM

असली आतंकवादी वही है मौलाना साद तो फिर देश में इतना खर्चा क्यों कर रहे हैं कि बाहरी आतंकवादियों के पीछे देश और दुनिया ना पैसा खर्चा करती है और जो असली आतंकवादी बहार का होगा उसके पीछे देश दुनिया कितना ढिंढोरा पीटती है और हमारे न्यूज़ चैनल उतना ज्यादा बोलते है per jabki Maulana sath देश में छुपा Hua Hai इसको इतना जल्दी क्यों ट्रैक नहीं कर रहे हैं कारण क्या है असली उग्रवाद की जड़ तो यही है वाक्यों में डाउट तो हर भारतीय नागरिक को हो रहा है यह प्रधानमंत्री राष्ट्रपति और देश की कानून से बड़ा है क्या जो इसका बाल भी बांका ना कर सके यदि इसका तुरंत कार्रवाई होगी तो मैं समझता हूं देश में उग्रवाद नहीं चल पाएगा उग्रवादियों का मेन कनेक्शन यही मौलाना साद है और देश को बर्बाद करने में तुला हुआ है देश की सरकार को क्राइम ब्रांच को और देश की सर्वोच्च न्यायालय मैं अवगत कराना चाहता हूं इसकी तुरंत कार्रवाई की जाए अन्यथा आने वाले भविष्य में देश में बहुत बड़ा संकट आने की आशंका है

  • Guest
  • Jun 3 2020 12:13:17:900AM

सत्य कहा अगर हिन्दू सन्त होते तो पूरी दुनिया की पुलिस पीछे लग जाती और कभी जमानत भी नही मिलती 😡

  • Guest
  • Jun 2 2020 11:11:03:917PM

RSS ka pilla

  • Guest
  • May 30 2020 8:17:54:940AM

Ye kon bol rha ye mulla upr wale ka dost Abe tera upr wala aisa h kya sale bolne pahle kuch soch liya kr

  • Guest
  • May 26 2020 7:07:44:560AM

Yes sale paka musselman se darte he barna us suarki aulad kaha Tina din kher manwata.

  • Guest
  • May 25 2020 10:51:24:510PM

Deepaksingh

  • Guest
  • May 25 2020 12:39:48:597PM

😂🤣🤣🤣

  • Guest
  • May 25 2020 1:07:30:777AM

Maulana sad galat nahi hai to choohe kids Tarah bill me kyo chip baitha hai

  • Guest
  • May 23 2020 1:38:13:753PM

Corona tabligiyo me failaya ek sajish ke tahat aur 17000ke kareeb tabligi poore Bharat me fail gaye

  • Guest
  • May 23 2020 1:37:00:300PM

Maulana ki ma bhosda aur katuwe ki maa ki chut chod kar rakh denge

  • Guest
  • May 22 2020 3:57:39:320PM

Molana saad Sahab Ka koi is liye kuchh Nahi Kar Sakta kyu ki vo galat Nahi h....agar unko chherd Diya to Hindustan kotabahi se koi nai ROK payga...or ye bat prshasan bakhubi jnt h is liye unhe koi arrest Nahi Kar Raha h balki unse request Kar k unhe security me rakha j Raha h....moorkh andhe bhakto parde likho jese socho

  • Guest
  • May 20 2020 10:05:02:820PM

Kuch kr bhi nhi skte ho..

  • Guest
  • May 18 2020 9:27:03:270AM

Saray hindustaniyo say meri yeh request hai keh maulana saad ko mat chhedo. Woh tumhare meray jaisa normal aadmi nahi hai.Usko toh chhed chuke ho bas ab dekhte jao hindustan ka kya haal hoga. Sahi aadmi pay galat ilzam laga diye. Maulana saad upar walay ka dost hai, aur jo uske dost ko satayega, usko uparwala dekh lega. Aajtak america uspar haat daalnay darraha tha. Saray country walay milkar bhi uska kuch nahi bigaad sakte.

  • Guest
  • May 18 2020 5:35:58:513AM

Agar aap ye bologe india me tabligi zamat se corona aaya he to ye galat he..ab media ko khabar to chahiye aur ek dharm pe attack karna

  • Guest
  • May 18 2020 12:51:58:873AM

It is BJP government schem

  • Guest
  • May 17 2020 2:07:21:697PM

Sarkar Dharm ke naam se Rajniti karti hai

  • Guest
  • May 17 2020 8:04:36:017AM

khabre. chapo. nafrat Nahi dalalo

  • Guest
  • May 17 2020 6:51:02:850AM

  • Guest
  • May 16 2020 4:27:45:953PM

I'll be in the phone with me and I will be in the phone with me and I will be in the phone with me.

  • Guest
  • May 16 2020 4:24:04:580PM

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