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युवा दिवस विशेष- महिला सशक्तिकरण क्या है एवं यूथ आइकॉन का बेहतरीन उदाहरण पेश किया जोधपुर की इस बिटिया ने

पार्वती-एक ऐसी सीमा प्रहरी जिसने देश की पूरी जमीनी सीमा को नापा और पूरे सीमा क्षेत्र में राष्ट्र जागरण का बिगुल बजा सीमाजन को प्रेरित किया की सेकंड लाइन ऑफ डिफेन्स आप हैं, फस्र्ट लाइन आॅफ डिफेन्स हमारे सीमा सुरक्षा बल के जवानों के साथ हमें भी चैकना रहना होगा )

Gaurav Mishra
  • Jan 11 2021 5:17PM
जोधपुर की एक ऐसी युवा जो ग्लोबल गुडविल अंबेस्डर के नाते विष्व में दे रही ‘‘एक धरती-एक परिवार‘‘ का संदेष तो सिस्टर आफ सोल्जर के नाते सीमा की अंतिम चैकियों में जा-जा कर सीमा प्रहरीयों का बढ़ा रही है हौंसला वहीं युवा संसद,भारत के जरीए युवाओं को राष्ट्र के प्रति कर रही जागरूक


हम बात कर रहे हैं भारत की लक्ष्मी,जोधपुर की बेटी पार्वती की

पार्वती-एक ऐसी सीमा प्रहरी जिसने देश की पूरी जमीनी सीमा को नापा और पूरे सीमा क्षेत्र में राष्ट्र जागरण का बिगुल बजा सीमाजन को प्रेरित किया की सेकंड लाइन ऑफ डिफेन्स आप हैं, फस्र्ट लाइन आॅफ डिफेन्स हमारे सीमा सुरक्षा बल के जवानों के साथ हमें भी चैकना रहना होगा 
आज यूथ डे पर शहर की एक ऐसी ही यूथ आइकॉन से रूबरू करा रहें हैं, जिसने स्वामी विवेकानंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित होकर आजीवन समाजसेवा का संकल्प लिया, अपना जीवन कर दिया राष्ट्र के नाम, जिनका मानना है की जीवन में किसी भी क्षेत्र में कामयाबी के लिए एक ही मंत्र हैं, खुद पर भरोसा रखें, सकारात्मक सोच के साथ अपने काम में मस्त रहें।

फौजी भाइयों के लिए हुई समर्पित, हर साल 7 से 10 दिन रहती बॉर्डर पर, आजीवन समाज सेवा का प्रण ले बनाई यूथ पार्लियामेंट
भारत सरकार द्वारा एकमात्र मान्यता प्राप्त युवा संसद की पहल रंग लाई। 2015  में यूथ आइकॉन पार्वती जांगिड़ सुथार ने युवा संसद, भारत की स्थापना की और देश के प्रधानमंत्री को पत्र लिखा, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इस अनुकरणीय पहल की बधाई दी। युवा संसद, भारत की चेयरपर्सन पार्वती जांगिड़ सुथार ने 2017 में  देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को पूरे देश में हर जिले स्तर, काॅलेज, स्कूल में यूथ पार्लियामेंट बुलाने के आहवान के लिए लिखा, जिसे प्रधानमंत्री ने देष के नौजवानों,षिक्षा संस्थानों से आहवान किया कि पूरे देश में युथ पार्लियामेंट, मॉक पार्लियामेंट बुलाई जाए, जिसका प्रभाव पूरे देश में हुआ।


पार्वती का जुनून और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति किसी बहादूर सेनापति से कम नहीं
सीमावर्ती देशों की विस्तारवादी नीतियों ने राष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा के प्रश्न को और जटिल बना दिया है। देश की समुचित उन्नति और विकास के लिए 15106.7 कि.मी. लम्बी जमीनी और 7516.6 कि.मी. लम्बी सागरीय सीमाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करना नितांत आवश्यक है। इसका दायित्व राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र के साथ-साथ सामान्य नागरिक का भी है। समाज को सीमा सुरक्षा के प्रति संवेदनशील, जागृत, संगठित और देश-भक्ति से अनुप्राणित बनाए बिना सीमा सुरक्षा का कार्य अधूरा है।  बॉर्डर पर जवानों का मनोबल उच्च कोटि का हो तो सीमा पर रहने वाले लोग सदैव सजग हो। इस ध्येय को साकार करने के लिए मूल सीमान्त गाँव गागरिया,बाड़मेर हाल गायत्री नगर, जोधपुर की बेटी पार्वती जांगिड़ सुथार समर्पित हैं। पार्वती ही नहीं हम सबका मानना है कि सुरक्षित सीमा ही समर्थ भारत का आधार है।
सुरक्षित सीमा-समर्थ भारत, सीमा प्रहरी का उच्च मनोबल-सजग हो हर सीमाजन इन उद्देश्यों को समर्पित पार्वती जांगिड़ हर साल भारत रक्षा पर्व के साथ आठ से दस दिवसीय सैनिक और सीमा क्षेत्र संवाद यात्रा करती है। सीमा व सीमांत क्षैत्रों का राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को ध्यान में रखते हुए अपने अनुभव, जहां कहीं किसी सुविधा या आवष्यक कदम उठाने की जरूरत लगती हैं उसके लिए सरकार व सुरक्षा बलों को अवगत कराती है।


सीमा सुरक्षा के लिए आह्वान करते हुए पार्वती ने कहा की सुरक्षा बलों की अद्वितीय सुरक्षा प्रणाली और सामाजिक सरोकारों को बिग सैल्यूट। भारत के सम्मान और संप्रभुता को विश्व-पटल पर अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए सीमाओं की सुरक्षा अति आवश्यक है। भीष्म पितामह के शब्दों में देश की सीमा माता के वस्त्र के समान होती है एवं उसकी रक्षा करना पुत्र का प्रथम कर्तव्य है। हमारे पूर्वजों और मनीषियों ने इस महत्व को समझा था और इसके पालन के लिए सर्वस्व अर्पित करने के उदाहरण रूप में स्वयं को प्रस्तुत किया था। इसलिए भारत अतीत-काल से अनेक प्रकार की चुनौतियों का सामना करते हुए भी सुरक्षित रहा। लेकिन वर्तमान समय में एक बार फिर से भारत की सामरिक स्थिति पर आघात हो रहा है इसलिए आओ हम सभी राष्ट्र युग धर्म के प्रति अपने कर्त्तव्य पालन के लिए कृत-संकल्प हों, विशेषकर सीमा प्रहरी और सीमा पर रहने वाले लोगों को हमेंशा हर पल सजग रहने की शख्त जरूरत हैं। पार्वती रक्षाबंधन, दीपावली, स्थापना दिवस पर जवानों के साथ मनाती है। पार्वती ने कहा की मैं सुदूर बॉर्डर पोस्टों पर जा जाकर जवानों को सम्मानित करती रही हूँ और उनकी कलाई पर रक्षासूत्र भी बांधती हूँ, इससे जवानों का हौंसला अफजाई होती है जो मेरे लिए खुशी की बात है साथ ही सीमान्त क्षेत्रों में लोगों को जागरूक कर रही हूँ, उन्हें राष्ट्रीय कर्तव्य के प्रति प्रेरित कर उन्हें अहसास करा रही हूँ की सेकंड लाइन ऑफ डिफेन्स आप ही हैं। आप संदिग्ध गतिविधियों की सूचना नजदीकी थाने या बीएसफ,  एसएसबी, आईटीबीपी इत्यादि सुरक्षा बलों को दें। 


विशेष कार्यः
स्वयं का बालविवाह नाकाम किया, समाज को कुरितियों के प्रति जागरूक, पार्वती जी सामाजिक कार्यों के साथ, बचपन से रक्षाबंधन के पर्व को भारत रक्षा पर्व के रूप में बॉर्डर पर मनाती हैं, वह बॉर्डर की अंतिम चैकियों व गस्त कर रहे जवानों की सुनी कलाई पर राखी बांध मनाती हैं, उन्हें अपनी बहन का अहसास कराती है, पार्वती विशेष लास्ट छ साल से यह पर्व सात दिन तक बॉर्डर पर रहकर हजारों किलोमीटर की फेंसिंग पर गस्त कर रहे जवानों के साथ राखी के रंग भर मनाती है, बी.ओ.पी. टु बी.ओ.पी. कवर करती हैं, जवानों की समस्याऐं नोट कर, उसे दूर कराने का प्रयास करती है। पंजाब, राजस्थान, गुजरात, पटना इत्यादी की सम्पूर्ण सीमा पर तैनात जवानों के साथ यह पर्व कई बार मना चुकी है, लोगो में भी यह भाव जगाया, वर्तमान में यह प्रकल्प बहुत आगे बढ़ रहा, हजारों बहनें चैकियों पर जाती है। 2019 में यह पर्व सात दिन हिमालय की दुर्गम पहाड़ियों 18500 फिट उंचाई पर तैनात हिमवीरों व बी.एस.एफ.डोईवाला के साथ मनाया। इसी जज्बे को सीमा सुरक्षा बल के स्वर्ण जयंति समारोह में एकमात्र सिविल पर्सन पार्वती जाँगिड़ को सम्मानित किया गया। इसके अलावा युवाओं को बी.एस.एफ., आर्मी जॉइन के लिए प्रेरित करना, संसदीय कार्य प्रणाली, लोकतंत्र व्यवस्था पर युवा संसद बुलाना, बालिका शिक्षा पर जोर, बाल विवाह न हो इसके लिए, जन जागरण कार्य प्रमुख है।
विशिष्ट उपलब्धियाँः
मात्र 14 साल की उम्र से बालिका शिक्षा, समाजसेवा व सीमा जागरण का अनुकरणीय उदाहरण पेश किया। 2016 में पिता के देहांत के बावजूद राष्ट्र कार्य जारी, तीन बड़ी बहनों और दो छोटे भाइयों सहित परिवार को संभालना, सेवा कार्य जारी रखना, हिम्मत न हारने की वजह से दैनिक भास्कर के विमेन प्राइड अवार्ड-2017 के तहत देश की टॉप तीन चैंजमेकर महिलाओं में शामिल, 94.3 माय एफ.एफ की तरफ से राष्ट्रीय स्तरीय जियो दिल से अवार्ड, ‘‘द नाइट ऑफ इंटरनेशनल इल्लुमिनेशन मेडल, ऑर्डर ऑफ लीडरशिप एंड द गर्ल हीरो अवार्ड‘‘, वीर दुर्गादास राठौर अवार्ड, पर्सनलटी आॅफ द ईयर अवार्ड, 2018 में फ्युचर लीडर ऑफ द वल्र्ड के तहत इजरायल में हुए वल्र्ड गवर्नेंस एक्सपेडीशन में देश का प्रतिनिधित्व किया, 13 से 19 अक्टुबर, 2018 तक इजरायल में तिरंगा लहरा, सर्वश्रेष्ठ डेलिगेट घोषित हुई और लीडरशिप का उत्कृष्ट सम्मान ‘‘चाणक्य अवार्ड‘‘ अपने नाम किया।
हाल ही विशेष उपलब्धि
संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य के सीजीआईएम मॉल्दोवा सेंटर ने श्रीमती संजू सुथार एवं स्वर्गीय लूणाराम जी सुथार की सुपुत्री पार्वती जांगिड़ सुथार के सामाजिक सरोकारों के कार्यों, प्रतिभा और वसुधैव कुटुंबकम की भावना को देखते हुए उन्हें वैश्विक सद्भावना-दूत (ग्लोबल गुडविल एम्बेसडर) नियुक्त किया। साथ ही उन्हें सेंटर के इंटरनेशनल मेडल और मानद उपाधियों को यूएन कंट्रीज में मानवता,पीस,बहादुरी,समाजसेवा, मानव तस्करी रोकने, यूएन सतत विकास लक्ष्य इत्यादि क्षेत्रों में प्रदान करने के लिए नॉमिनेट किया गया, पार्वती को प्रेसिडेंट आॅफ आॅनर की मानद पदवी दी गई।
अब तक दर्जनों राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सम्मानों से नवाजी गई है युथ आइकॉन पार्वती
भारत की लक्ष्मी राष्ट्रीय पुरस्कार, ऑस्कर ऑफ लीडरशिप, चाणक्य अवार्ड, वीर दुर्गादास राठौड़ सम्मान, द नाइट ऑफ इंटरनेशनल इल्लुमिनेशन मेडल, विश्वकर्मा रत्न, ऑर्डर ऑफ लीडरशिप, इंटरनेशनल एशिया कॉन्टिनेंट समरसता अवॉर्ड द गर्ल हीरो अवार्ड, जियो दिल से अवार्ड, सोशल एक्टिविस्ट ऑफ द इयर, पर्सनलटी ऑफ द इयर, सिस्टर ऑफ बी.एस.एफ., वुमन प्राइड, भारत गौरव, बाड़मेर गौरव, सहित कई सम्मानों से अलंकृत है पार्वती
पार्वती स्वामी श्री विवेकानन्द जी को आदर्श मानती है। बहुत ही सामान्य परिवार की बालिका पार्वती को इस मुकाम पर देख समाज व सीमावर्ती बालिकाएं जिन्होने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी वापिस विद्यालय, महाविद्यालय जाना प्रारम्भ कर दिया। अन्तर्राष्ट्रीय पहचान बन चुकी, विश्वकर्मा रत्न और भारत गौरव सहित दर्जनों सम्मान प्राप्त पार्वती को राज्य व केन्द्र के कई मंत्री, धर्मगुरू, सीमा सुरक्षा बल, भारतीय सेना, एयर फोर्स सहित कई संस्थान व राष्ट्रवादी चिंतक सम्मान दे चुके है।
पार्वती जांगिड की वो बात जिसने यूएन तक को प्रभावित किया
‘‘लड़की का जन्म कहाँ हुआ है, गरीब के घर या अमीर के घर, गाँव में या शहर में, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, वह भी भव्य सपने देखने की हकदार है और हम सब मिलकर ही उसके सपने को पूरा कर सकते है।‘‘ यह सोच है मूलतः बाड़मेर के गागरिया गाँव की हाल गायत्रीनगर, जोधपुर निवासी पार्वती जांगिड़ सुथार की। छोटी सी उम्र से ही वो न केवल स्वयं समाजसेवा करती है बल्कि महिलाओं और युवाओं में राष्ट्रभाव जागरण के साथ ही आत्मबल जागरण का अनुठा कार्य पूरी प्रखरता से करती है।

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