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इस बार के परेड में टी-90 भीष्म टैंक और ब्रह्मोज मिसाइल के जरिये दिखेगा स्वदेशी ताकत

इस बार गणतंत्र दिवस की परेड में इस साल की झांकी में भारतीय सेना ने उन टी-90 भीष्म टैंक को शामिल किया है जो पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तनाव के बाद एलएसी पर तैनात किये गए हैं। इसके अलावा बैलेस्टिक मिसाइल ब्रह्मोस, पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट सिस्टम, बीएमपी-2 टैंक, ब्रिज लेयर टैंक, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर इक्विपमेंट सिस्टम और एयर डिफेंस सिस्टम गणतंत्र दिवस परेड में सेना की झांकी का हिस्सा होगा।

Alok Jha
  • Jan 23 2021 9:17PM
भारतीय गणतंत्र दिवस के परेड का इंतज़ार ना सिर्फ सम्पूर्ण देशवासी बल्कि सम्पूर्ण विश्व करता है । दरअसल गणतंत्र दिवस के परेड में जब देश के तीनो अंगों यानी थल सेना , वायु सेना और नौ-सेना के जवान कदमताल करके गुजरते है तो सम्पूर्ण देश गौरवान्वित महसूस करता है । राजपथ पर भारतीय सेना अपने हथियारों का प्रदर्शन करते है तो सम्पूर्ण विश्व को भारत के शक्ति का एहसास होता है । इस बार गणतंत्र दिवस की परेड में इस साल की झांकी में भारतीय सेना ने उन टी-90 भीष्म टैंक को शामिल किया है जो पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तनाव के बाद एलएसी पर तैनात किये गए हैं। इसके अलावा ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल और अन्य स्वदेशी हथियार राजपथ पर दिखाए जाएंगे जिनकी बदौलत सेना पूर्वी और पश्चिमी सीमा पर मोर्चा संभाले है। भारतीय सेना की झांकी में पूर्वी लद्दाख में चीन से मुकाबले के लिए तैनात टी-90 भीष्म टैंक राजपथ पर दौड़ेगा। इसके अलावा बैलेस्टिक मिसाइल ब्रह्मोस, पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट सिस्टम, बीएमपी-2 टैंक, ब्रिज लेयर टैंक, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर इक्विपमेंट सिस्टम और एयर डिफेंस सिस्टम गणतंत्र दिवस परेड में सेना की झांकी का हिस्सा होगा। टी-90 भीष्म टैंक के कमांडर कैप्टन करनबीर सिंह ने बताया कि यह टैंक थर्ड जनरेशन का रशियन टैंक है, जिसे हम भीष्म कहते हैं। इसमें 125 एमएम की गन है जो पांच तरह के गोले फायर कर सकती हैं। यह आर्मी का अकेला ऐसा टैंक है जो गाइडेड मिसाइल भी फायर कर सकता है। टी-90 युद्धक टैंक को पूर्वी लद्दाख में पैन्गोंग झील के दक्षिण किनारे में तैनात किया गया है जहां भारतीय सेना अहम चोटियों पर मौजूद है। यह पहला मौका है जब 17 हजार फीट की ऊंचाई पर टी-90 टैंक की तैनाती की गई है।
सेना ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को भी इस बार गणतंत्र दिवस की परेड का हिस्सा बनाया है। कैप्टन क़मरुल ज़मान बिहार के सीतामढ़ी के एकमात्र भारतीय सेना अधिकारी हैं, जो ब्रह्मोस के कंटिंजेंट कमांडर हैं। इस मिसाइल को पनडुब्बी से, पानी के जहाज से, विमान से या जमीन से भी छोड़ा जा सकता है। रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया तथा भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने संयुक्त रूप से इसका विकास किया है। यह रूस की पी-800 ओंकिस क्रूज मिसाइल की प्रौद्योगिकी पर आधारित है। ब्रह्मोस के समुद्री तथा थल संस्करणों का पहले ही सफलतापूर्वक परीक्षण किया जा चुका है तथा भारतीय सेना एवं नौसेना को सौंपा जा चुका है। ब्रह्मोस भारत और रूस द्वारा विकसित की गई अब तक की सबसे आधुनिक प्रक्षेपास्त्र प्रणाली है। इसने भारत को मिसाइल तकनीक में अग्रणी बना दिया है।  

कोविड-19 महामारी के कारण इस साल कुछ बदलाव किये गए हैं, इसलिए गणतंत्र दिवस की परेड लाल किले के बजाय नेशनल स्टेडियम में समाप्त होगी। गणतंत्र दिवस की परेड इस बार छोटी होगी और दर्शकों की सामान्य संख्या का केवल एक चौथाई हिस्सा शामिल होगा। इस बार सिर्फ 25 हजार पास ही जारी किए जा रहे हैं। परेड में शामिल होने वाले सभी सैनिक दस्ते, पुलिस अर्ध सैनिक बल के जवान मास्क लगाये दिखेंगे। प्रतिभागी के रूप में बच्चों को परेड में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई है और दर्शक के रूप में 15 साल से ज्यादा आयु के सौ छात्र और अन्य नागरिक शामिल हो सकेंगे। सोशल डिस्टेन्सिंग की वजह से मार्चिंग दस्ते की बनावट इस बार आयताकार की जगह त्रिकोणीय होगी। एक दस्ते में 144 सैनिकों की बजाय सिर्फ 96 सैनिक शामिल होंगे। आम तौर पर एक दस्ते में 12 पंक्तियां और 12 कॉलम होते थे लेकिन इस बार 12 कॉलम में सिर्फ आठ पंक्तियां होंगी। 

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