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फिर से परदेशियों को याद आया अपना घर.. कईयो के कदम बढ़े अपनी - अपनी जन्मभूमि की तरफ

लोगों में तालाबंदी का खौफ़, रेलवे स्टेशन, बस अड्डों में पिछले वर्ष की ही भांति एक बार फिर आया प्रवासी मजदूरों का सैलाब

Shivam Mrinal
  • Apr 20 2021 12:21PM
घर गुलज़ार सूने शहर , बस्ती बस्ती में कैद हर हस्ती हो गयी , आज फिर ज़िन्दगी महंगी और दौलत सस्ती हो गयी। कुछ यही मंजर आजकल पंजाब से लेकर कश्मीर , राजस्थान से लेकर कर्नाटक , एवं पटना से लेकर ओड़िसा या फिर साफ शब्दों में कहे तो पूरे हिंदुस्तान की हो गयी है ।

कोरोना वायरस की जारी बेकाबू रफ्तार से भारत एक बार फिर बुरी तरीके से ग्रषित नज़र आ रहा है , रोज लाखों की संख्यां में केस आ रहे है , लोग मर रहे है , अस्पतालों में ऑक्सीजन तो बहोत दूर की बात लोगो को बेड नही मुहैया नही हो पा रहे , ऐसी परिस्थिति में सरकार ने दुबारा से कई जगहों पर तत्काल प्रभाव से दुबारा लोकडौन लगाने का फैसला किया है , जिसके फलस्वरूप हालात फिर से पिछले वर्ष की तरह भयावह दिख रहे है , प्रवासी मजदूर एवं वे लोग जो , अपने घरों से बाहर दिहाड़ी मजदूरी करते थे  , सरकार ने द्वारा ये फैसला सुनाते है , रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, एवं तमाम यातायात के संसाधन वाले इलाकों पर भारी तादाद में इकट्ठा हो गए है , मजदूरों को ये डर है कि , कहीं पिछले वर्ष की तरह ही सरकार लोकडौन बढ़ाने का फैसला न कर ले ले, इस भय में लोग बड़े शहरों से फंस जाने के डर से पैदल ही निकल पड़े है , हालांकि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मीडिया को दिए अपने बयान में ये साफ साफ कहा था कि, ये मात्र ये छोटा से प्रतिबंधित बंद है ,लोगो को घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नही , एवं कही पलायन करने की भी उनको आवश्यकता नहीं, हम बस ये चाह रहे है, की किसी तरह ये कोरोना के सेकंड प्रसार का चैन टूटे और संक्रमितों के मामले में कमी आये ,

हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने भी कोरोना के बढ़ते प्रसार को देखते हुए 18 साल  से ज्यादा उम्र के नागरिकों को वैक्सीन मुहय्या करवाने का बंदोबस्त आला वैक्सीन निर्माताओं द्वारा प्रार्थमिक तौर पर करवा दिया है , एवं कल से ये दवाइयां 18 वर्ष के ऊपर तमाम संक्रमितों के लिए उनके नजदीकी अस्पताल में उपलब्ध होंगी 

ऐसी गंभीर परिस्थिति उत्पन्न होते देख , आम नागरिकों को भी ये चाहिए कि वे थोड़ी संवेदना बरते, एवं सरकार द्वारा लिए गए फैसलों का सम्मान और पालन करे घबराने के बजाय।

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