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पुलिस प्रमुख ने कहा था- "पुलिस और डाक्टरों पर हमला करने वालों का जीवन बीतेगा जेल में"..इस पर आपत्ति है तेजस्वी यादव को.. इस स्तर पर भारत की राजनीति

तेजस्वी यादव की बयानबाजी से उनके बिहार में ही भारी असहमति.

Sudarshan News
  • Apr 21 2020 1:48PM

आये दिन पुलिस पर होरहे हमलों के बाद जब दुस्साहसिक रूप से यही हमले डाक्टरों और मेडिकल स्टाफ पर बढ़ेतब खुद जनता ने ही आगे निकल कर भारत के प्रधानमन्त्री , भारत के गृहमंत्री और तमामप्रदेशो के मुख्यमन्त्रियो से मांग कर डाली कि किसी भी हालत में डाक्टरों और पुलिसवालों पर हमला करने वालों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाय. देश की अधिसंख्यजनता ने तो सोशल मीडिया पर ऐसा कुकृत्य करने वालों को देशद्रोही मानते हुए उन्हेंमृत्युदंड तक देने और पुलिस को गोली मारने तक के अधिकार देने की पैरवी करती दिखी.ऐसे में सबसे ज्यादा जिम्मेदारी पुलिस बल पर ही आती है और इसको सबसे जायदा मजबूतीसे निर्वहन कर रहे DGP बिहार IPS गुप्तेश्वर पाण्डेय ने बेहतर दंग से महसूस किया.उन्हें पता था कि देश की जनता अपने रक्षको पर हमला देख कर धैर्य खो रही है और कड़ीसे कड़ी कार्यवाही मांग रही है . उन्होंने दिया ऐसा बयान जो सज्जन शक्तियों के बीचसंतोष की लहर और अपराधियों के बीच भय दौड़ा गया.

ऐसे में जब दुनियापुलिस बल और डाक्टरों के साथ खड़ी होती दिख रही है तो वहीँ कुछ ऐसे राजनेता भी हैजो न जाने किस नियम और अपने किस सिद्धांत से पुलिस बल की कार्यवाही तो दूर, उनकेबयानों तक के खिलाफ खड़े होते दिखाई दे रहे हैं. इन्ही में से एक है अपनी अलग हीप्रकार की राजनीति के लिए चर्चित तेजस्वी यादव. लालू यादव की राजनीति को उन्ही कीही दिशा में आगे बधा रहे तेजस्वी यादव बिहार पुलिस प्रमुख के बयान से सहमत न होनातो दूर, उनके खिलाफ ही खड़े होते दिखाई दे रहे हैं.

बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बिहारपुलिस की शैली पर सवाल उठाए हैं. यद्दपि वर्तमान समय में भारत में शायद ये पहलेऐसे नेता है जिन्हें पुलिस से समस्या है. हैरान कर देने वाले बयान में उन्होनेंबिहार पुलिस के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय के उस बयान को भी आड़े हाथों लिया हैजिसमें वे डॉक्टरों और पुलिस वालों पर हमला करने वाले लोगों को जेल में लंबे समयतक रखने की बात कर रहे हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सम्बोधित करते हुएउन्होंने ट्विटर पर लिखा है कि - लॉकडाउन के मध्यमानसिक अवसाद से ग्रस्त आपके कुछ कुंठित अधिकारी मानव अधिकारों का हनन कर रहे है।डीजीपी सड़ा देंगे-गला देंगे जैसे ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बयान देकर ऐसे अधिकारियों कामनोबल बढ़ा रहे है। 

तेजस्वी यादव बेगूसराय की किसी घटना काजिक्र कर रहे हैं जिसमे अभी तक जांच जारी है और किसी भी दोषी को न छोड़े जाने केउच्चाधिकारियों के बयान भी हैं. सबसे हैरानी की बात ये है कि जब देश के मुखिया हरव्यक्ति को एक दूसरे से सोशल डिस्टेंस बनाने की बात कर रहे हैं तब ऐसे मौके परतेजस्वी यादव जनआन्दोलन की चेतावनी दे रहे हैं. ऐसी चेतावनी इत्यादि से अगर लॉकडाउन टूटता है और उस से समाज का एक बड़ा वर्ग कोरोना महामारी के संक्रमण का शिकारहोता है तो उसका उत्तरदायित्व किसका होगा ये जवाब अभी तक अनुत्तरित है. अगर सोशलमीडिया और जमीनी समर्थन की बात किया जाय तो एक बड़ा वर्ग डाक्टरों और पुलिस पर हमलाकरने वालों के खिलाफ DGP बिहार के कड़े फैसलों के साथ खड़ा होता दिखाई दे रहा हैजबकि लाक डाउन के समय आन्दोलन की चेतावनी देने वाले तेजस्वी यादव की बयानबाजी परहैरानी भी व्यक्त कर रहा है.

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