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24 अप्रैल- “स्थापना दिवस” भारतीय सेना की सबसे विध्वंसक बटालियन “गोरखा रेजिमेंट”. करें उन तमाम अमर योद्धाओं को नमन जो जान पर खेल हमारे लिए

इंडियन आर्मी की गोरखा रेजिमेंट के बारे में माना जाता है कि ये सेना की सबसे जांबाज इकाई है.

Sudarshan News
  • Apr 24 2020 1:20PM
ये राष्ट्र के वो रक्षक हैं जिन्हे न अपना नाम करने की शौक होती है और न ही किसी प्रकार से राजनीति में हिस्सा लेने की . ये जीवन केवल राष्ट्र की रक्षा के लिए समर्पित कर के अपनी जान को हथेली पर रख कर राष्ट्र पर हर पल न्योछावर होने के लिए खड़े रहते हैं . अगर कोई व्यक्ति कहता है कि वह मरने से नहीं डरता, तो या तो वह झूठ बोल रहा है, या फिर वह एक गोरखा है’,.ये लाइनें अकसर भारतीय सेना के प्रथम फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ कहा करते थे। सैम मानेक शॉ की इस कहावत से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितने निडर होते होंगे गोरखा सैनिक। इंडियन आर्मी की गोरखा रेजिमेंट के बारे में माना जाता है कि ये सेना की सबसे जांबाज इकाई है। गोरखा सैनिक किसी भी समय कैसे भी हालात से लड़ने को तैयार रहते हैं।

अपनी मिट्टी के लिए पलक झपकते ही जान कुर्बान करने को तैयार, हाथ में खुखरी हो तो ये मौत को भी सबक सिखाने का माद्दा रखते हैं. खुखरी इनकी शान है, जान है और पहचान है. अंतिम सांसों तक ये खुखरी हमेशा अपने पास रखते हैं. देश में जब भी मुसीबत आती है, इसी रेजिमेंट को सबसे पहले याद किया जाता है. ईमानदारी की मिसाल है गोरखा रेजीमेंट. नेपाल में गोरखा नाम का एक जिला है. जो हिमालय की तलहटी में बसा हुआ है. यह जगह अपने मशहूर योद्धाओं के लिए विख्यात है. कहा जाता है कि यहां की मांए शेर पैदा करती हैं. गोरखा किसी एक जाति के योद्धा नहीं, बल्कि उन्हें पहाड़ों में रहने वाले सुनवार, गुरुंग, राय, मागर और लिंबु जातियों से भर्ती किया जाता है.

वर्तमान में भारतीय सेना में 30 हजार गोरखा सै‍निक हैं, जिसमें 65 फीसदी सैनिक नेपाल, दार्जलिंग, देहरादून, धर्मशाला से आते हैं.वर्तमान में सेना प्रमुख बिपिन रावत गोरखा राइफल्स से हैं। ‘कायर हुनु भन्दा, मर्नु राम्रो'(Better to Die than Live Like a Coward) गोरखा में लिखी गई इस पंक्ति का सीधा अर्थ यह है कि ‘कायरता की ज़िन्दगी जीने से बेहतर है मरना’ गोरखा रेजिमेंट की शुरुआत 1815 में हुई थी. उस दौरान यह रेजिमेंट ब्रिटिश इंडियन आर्मी का हिस्सा थी. बाद में जब भारतीय थल सेना वजूद में आई तो इसका नाम ‘गोरखा रेजिमेंट’ रखा गया. युद्ध में अपनी बहादुरी और अक्रामकता के लिए पहचाने जाने वाले ‘गोरखा’ भारतीय सेना के सबसे बेहतरीन सैनिकों में से एक माने जाते हैं.

अपनी निडरता के चलते इस रेजिमेंट को भारतीय सेना द्वारा कई महत्वपूर्ण पदक और सम्मानों से नवाज़ा जा चुका है. हर देश की सेना के लिए यह ज़रुरी होता है कि उसके सैनिक बेखौफ होकर लड़ें, ताकि दुश्मन के हर नापाक मंसूबों पर पानी फेरा जा सकें. गोरखा रेजिमेंट के सिपाहियों को इसमें अव्वल माना जाता है. आज इस वीर बटालियन के सभी बलिदानियों को सुदर्शन परिवार बारम्बार नमन करते हुए आज देश की सेवा कर रहे उन सभी योद्धाओ को सैल्यूट .. जय हिन्द की सेना

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