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नोएडा प्राधिकरण में 90 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का हुआ खुलासा

नोएडा प्राधिकरण में तीन दशक पुराने जमीन अधिग्रहण मामले में 90 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है।

Anchal Yadav
  • Feb 26 2021 8:54PM
नोएडा प्राधिकरण में तीन दशक पुराने जमीन अधिग्रहण मामले में 90 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। मामला नोएडा के गेझा तिलप्ताबाद गांव से जुड़ा  है। शहर में एक सेक्टर बसाने के लिए साल 1982 में इस गांव की जमीनों का अधिग्रहण किया गया था। सभी किसानों को मुआवजे की राशि दे दी गई। मगर बाद में इसमें बड़ी धोखाधड़ी उजागर हुई। प्राधिकरण के अधिकारियों की मिलीभगत से मुआवजे के तौर पर 90 करोड़ रुपए अतिरिक्त दिए गए। सभी काश्तकारों को बाद में फिर से रकम दी गई। नोएडा प्राधिकरण की मुख्य कार्यपालक अधिकारी ऋतु महेश्वरी ने इस स्कैम की जांच के लिए आदेश दे दिया है। एक कमेटी इसकी जांच कर रही है। अब तक की छानबीन में पता चला है कि अथॉरिटी के अधिकारियों की मिलीभगत से यह बड़ा घोटाला हुआ था। इस दौरान एक असिस्टेंट लीगल ऑफिसर की भूमिका सामने आई है और उसे सस्पेंड कर दिया गया है। प्राधिकरण ने जिलाधिकारी कार्यालय से उन सभी 9 लोगों से वसूली के लिए नोटिस जारी करने का आग्रह किया है, जिन्हें मुआवजे के नाम पर अतिरिक्त रकम दी गई। 

नोएडा प्राधिकरण की सीईओ ऋतु महेश्वरी ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चीफ लीगल एडवाइजर घोटाले से जुड़ी जानकारी अधिकारियों के संज्ञान में ले आए। एक समिति पिछले 6 महीने से इसकी जांच कर रही है। शुरुआती छानबीन में हमें 15 ट्रांजैक्शंस में अनियमितता और विसंगतियां मिली हैं। इसमें से नौ मामलों में धोखाधड़ी सामने आई है। इन सभी ट्रांजैक्शंस में लाभार्थियों को बाद में अतिरिक्त मुआवजा राशि दी गई थी।अथॉरिटी की सीओ ने बताया कि एक मामले में कार्रवाई की गई है, जबकि अन्य की जांच की जा रही है। जल्दी ही इन सभी की भी छानबीन पूरी कर ली जाएगी। फिलहाल एक सहायक लॉ ऑफिसर के अलावा एक ऑफिस असिस्टेंट की भूमिका भी सामने आई है। हालांकि वह रिटायर हो चुका है। अधिकारी ने बताया कि गेझा तिलप्ताबाद गांव के 9 भू-मालिकों को तय मुआवजा राशि से 89.30 करोड़ रुपये ज्यादा दिए गए।

साल 1982 में नोएडा प्राधिकरण ने एक सेक्टर विकसित करने के लिए गेझा तिलप्ताबाद गांव की जमीन के अधिग्रहण से संबंधित नोटिफिकेशन जारी किया था। जमीनों के रेट तय कर मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू हुई। मगर कुछ काश्तकारों ने मुआवजे के लिए निर्धारित दर के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की। साल 1993 में हाईकोर्ट ने मुआवजे की राशि 16.61 पैसे प्रति स्क्वायर मीटर तय किया। इन दरों के मुताबिक मुआवजे की राशि किसानों को दी गई। साल 1999 में मुख्य याचिकाकर्ता किसान भुल्लड़ सिंह की मृत्यु हो गई। अगले 12 साल तक मामला ठंडा रहा। लेकिन वर्ष 2012 में मृतक भुल्लड़ सिंह के सगे-संबंधियों ने फिर इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उच्च न्यायालय ने इस पर सुनवाई करते हुए दरों में संशोधन किया और 297 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर का रेट निर्धारित किया। साल 2015 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई पूरी हुई। गेझा तिलप्ताबाद गांव के भू-स्वामियों ने भी हाई कोर्ट से तय दरों पर सहमति जताई। 

इस तरह 297 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर पर काश्तकारों और नोएडा प्राधिकरण के बीच सहमति बनी। गांव के किसानों ने कहा कि इसके बाद वे कोर्ट-कचहरी संबंधित कार्रवाई नहीं करेंगे। नई दरों के मुताबिक भुल्लड़ सिंह के परिवार को 9.17 करोड़ रुपये का मुआवजा फिर दिया गया। मगर बाद में गांव के किसानों ने फिर से वर्ष 2018 में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस बार काश्तकारों ने 449 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर मुआवजे की मांग की। 


इस बीच तमाम विसंगतियों की जानकारी होने पर नोएडा प्राधिकरण की सीईओ ऋतु महेश्वरी ने अधिग्रहण से जुड़े इस मामले की जांच के लिए इंक्वायरी कमेटी गठित की। समिति ने मुख्य बिंदुओं पर जांच शुरू कर दी। बाद में सीईओ ने सख्ती दिखाते हुए डिपार्टमेंटल इंक्वायरी का भी आदेश दिया। अब इस बड़े घोटाले में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

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