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रावण जलाने का अधिकार किसे है ? दशहरा पर्व पर कल, आज और भविष्य को चित्रित करता सुरेश चव्हाणके जी का विशेष संपादकीय

आखिर क्या थे हम और कहाँ आ गये.. क्या बच पायेगा धर्म और राष्ट्र ?

Rahul Pandey
  • Oct 25 2020 5:01PM

केवल श्रीराम जी के पराक्रम की  ही विजयादशमी मनाते रहेंगे, या हम भी पराक्रम दिखा कर अपने आस-पास के दशानन को जलाएँगे ? 

प्रभु श्रीराम जी से ज्यादा बड़ा संकट हम पर है। हमारी बहन, बेटी ही नही, माँ और मौसी के साथ दादी तक को भी हम बचा नही पा रहे हैं। हम तो बलात्कारी को जला भी नही सकते। पहले पुलिस और फिर न्यायालय का गैगरेप हमें ही झेलना पड़ता है। हमारे इन रावनो को जलाना हमारी प्राथमिकता क्यों नहीं हैं?

न हमारी नारी सुरक्षित है और ना ही हमारी संस्कृति। इन पर होते हमले और आक्रमण का हम विरोध भी नही कर सकते, क्योंकी हमारे सभ्यता को असभ्य तरीक़े से विकृत दिखाना उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हैं। स्वतंत्रता के अति का रावन ज्यादा ख़तरनाक हैं या पुतले का?

एक माँ सीता ले लिए इतना बड़ा धर्मयुद्ध हुआ, पर आज भी वो रावण  उसी तरह से वेश बदल कर, हाथों में कलावा बांध कर, छद्म नाम रख कर बार बार और हर दिन आता है.. उसी अंदाज़ में, वो रावण हमारी बहन – बेटियों को लव जिहाद कर के उठा कर लेकर जाता है और हम उस से बहन वापस लाने की डील, अर्थात सौदा करते हैं। मुँह छिपा कर मामला दबाने का प्रयास करते हैं।

बहुत ही हुआ तो उस रावण को जलाने के बजाय पुलिस स्टेशन जलाते हैं। ध्यान रहे, कायरों की न श्री और न स्री सुरक्षीत रहतीं हैं। फिर भी हम निकले हैं रावण के पुतले जलाने...सीमा पर खड़े शत्रु की फूल माला ले कर आरती तक उतारने को तैयार ग़द्दार नेता और जनता का वेश बना कर उनके समर्थक जिस देश में करोड़ों की संख्या में हों, वह सुरक्षित है, ऐसा कहने वाले  अर्थात गहरी नींद में सोये 100 करोड़ लोग जहाँ हो वह रावण को क्यों जला रहा है, ये समझ के बाहर की बात है.. 

सच में हमे राम नाम को लेने तक का अधिकार भी है क्या ? धर्म के नाम पर देश तोड़ कर देने के बावजूद भी जहाँ के लाखों मंदिरों पर आज भी मस्जिदें और महजबी इदारे खड़े हों, उसके बाद भी उसे स्वतंत्रता कहा जाता हो, उससे बड़ा मूर्ख भला कौन हो सकता है ? आज भी हज़ारों मंदिरों में आरती तो दुर, दीया, धूप तक नही होने दी जा रही।

ऐसा करने का प्रयास किया जाता है तो मिलने वाली दंगों की धमकी से नपुंसक लोग पीछे हट जाते हैं। वह केवल निर्जीव पुतले जलाने में ही पौरुष्य मानते हैं ! अपने खेत के एक इंच पर भी अगर हमारा ही सगा भाई हल चला दे तो हम खून - ख़राबे पर उतर आते है,  लेकिन उसी देश और उसी भूमि पर करोड़ों विदेशी घुसपैठियों ने किए हुए क़ब्ज़े पर चुप बैठते है। सरकार पर निर्भर रहते है, और सरकारें अदालतों के आदेश पर निर्भर रहते हैं.. हम तो रावण से ज्यादा बड़े अपराधी है.. 

अंग्रेजों ने कानून और बंदूक़ के डर से हमारा धन लूटा, पर आज हम उन्हीं गोरों के ब्रांडिंग और दुष्प्रचार के आगे हार कर अपना पैसा उन विदेशी कंपनियों को देकर आते हैं। इससे खुद को मॉडर्न समझने लगते हैं .. जिसे स्वदेश में बने उत्पादकों पर विदेशी ठप्पा देखे बिना खरीदारी का सुकून न मिलता हो उसे मैं आजाद कैसे कहूँ ? और ऐसे गुलामों ने रावण जलाने से क्या होगा? 

सिर्फ विदेशी उत्पाद ही नही,  जहाँ धर्म भी इंपोर्टेड किए जाते हो और करोड़ों देशी लोग विदेश की तरफ़ मुँह करके विदेशी भगवान को पूजते हों, यहाँ के भगवानों को पराया और उसे पुजने वाले को दुष्मन समजते हो, वहाँ श्रीराम के वंशजों के पास कोई योजना ही ना हो, तो वह रावण को विदेशी कैसे कह सकते हैं ? 

जो चंद कौड़ियों के लिए प्रतिदिन हज़ारों की संख्या में अपना धर्म त्याग कर अन्य मजहब अपना लेते हों, वह करोड़ों ही नही अरबों की संख्या में भी क्यों न हों, उनका एक दिन समाप्त होना तय है। ना हम अपने सगे को ना उसको ख़रीदने वालो को रोक पाने का साहस करते हैं, तो वह रावण को जलाना तो दूर, रावण को देखने तक का अधिकारी है ?

जहाँ चंद लाभों के लिए हर कोई अपने आपको पिछड़े से पिछड़ा साबित करने लिए एक दूसरे को रौंद रहा हो, क्या वह महान श्रीराम जी का वंशज होने का दावा कर सकता है ? जिन प्रभु श्रीराम की शिक्षा थी कि ‘श्रेष्ठता की तरफ बढो’.. ऐसे में उनके विचारो के ठीक विपरीत जाने वाले आखिर रावण को जलाने की सोच भी कैसे सकते हैं ?

जहाँ नौकरशाही पर क़ब्ज़ा करने का खुला फतवा देने वाला स्वतंत्र हो और उनके एलान को प्रमाणों के साथ समाज को दिखाने और ऐसे कब्जे के होने से पहले उसको रोकने का प्रयास करने वाला स्टे से पाबन्द हो, तो ऐसे देश में पहले रावण जले या ऐसा अंध तंत्र ? ये इस दशहरे में जरूर तय करना चाहिए.. तभी रावन जलाने के लिए सोचना चाहिए, नहीं तो जिवीत तंत्र और दुष्मनो से मुँह मोड़ कर मरे हुए रावन के पुतलों को जलाना ही पुरुषार्थ माना जाऐगा या जो मृत समाज को पैदा भी करेगा और मृत ही रखेगा। 

इस लिए रावन को वहीं जलाएँ जो पहले श्रीराम जी के मार्ग पर चले। 

आपका -
सुरेश चव्हाणके (मुख्य संपादक, सुदर्शन न्यूज)  

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3 Comments

aaj Rawan ki jansankhya jyada aur Shri RAM Ji ki sankhya kam to nahi parantu ham Law & Order ka samman karate hain anyatha Rawan jaise Shurpnakha ke auladon ko to kab se khatm kar diye hote purwa sarkar 80 warsh tak Rajya kiya parantu gair muslimon ke liye pariwarniyojan ki kanoon banaa kar Hinduyon par jo kutharaghat kiya hai jo aaj bhi ham gulam ki tarah hain gair hindu ke liye koi kanoon nahi esiliye hindu bhai kam aur muslim aniyantrit gati se jansankhya mewriddhi hui dusari baat aapane bataya jo IAS aur IPS ,Doctor Nyaypalika Karyapalika aur Vyasthapika me jo Topper post ki bharti ab tak jo kiya gaya usme ghapalaabazi abhi ka nahi hai ye bahut purani hai aise mahatwapurn padon par inki najar pahale se lagi hui hai aur hamare Rajneta bhi unko alp sankhyak naam se bahot chhut dete aayen hain jiska natija aaj aapane bataya hai jispar bhi Stay lakar rok lagaa diya gaya hai eske sath doshi ham Hindubhaiyon ki bhi hai jo Atisahishnu hai ab sabhi ekattha ho gaya hai to ab aap hee batayen ki yanha dohara kanoon vyawastha me aam aadami kya karen eske alawa aapke pahale patrakar media bhi aise sensative mudde ko public se chhupakar hame andhakaar me rakha SATYA KA UJAGAR nahi kiya ....SATYAMEW JAYATE.....

  • Guest
  • Oct 26 2020 2:07:04:600PM

aaj Rawan ki jansankhya jyada aur Shri RAM Ji ki sankhya kam to nahi parantu ham Law & Order ka samman karate hain anyatha Rawan jaise Shurpnakha ke auladon ko to kab se khatm kar diye hote purwa sarkar 80 warsh tak Rajya kiya parantu gair muslimon ke liye pariwarniyojan ki kanoon banaa kar Hinduyon par jo kutharaghat kiya hai jo aaj bhi ham gulam ki tarah hain gair hindu ke liye koi kanoon nahi esiliye hindu bhai kam aur muslim aniyantrit gati se jansankhya mewriddhi hui dusari baat aapane bataya jo IAS aur IPS ,Doctor Nyaypalika Karyapalika aur Vyasthapika me jo Topper post ki bharti ab tak jo kiya gaya usme ghapalaabazi abhi ka nahi hai ye bahut purani hai aise mahatwapurn padon par inki najar pahale se lagi hui hai aur hamare Rajneta bhi unko alp sankhyak naam se bahot chhut dete aayen hain jiska natija aaj aapane bataya hai jispar bhi Stay lakar rok lagaa diya gaya hai eske sath doshi ham Hindubhaiyon ki bhi hai jo Atisahishnu hai ab sabhi ekattha ho gaya hai to ab aap hee batayen ki yanha dohara kanoon vyawastha me aam aadami kya karen eske alawa aapke pahale patrakar media bhi aise sensative mudde ko public se chhupakar hame andhakaar me rakha SATYA KA UJAGAR nahi kiya ....SATYAMEW JAYATE.....

  • Guest
  • Oct 26 2020 2:02:11:737PM

Thanks and Kotishah Naman to Honble Shri Chavhan Ji.Ihave read your special editorial essay that it is right and true.We Support your True statements.

  • Guest
  • Oct 25 2020 7:01:30:210PM

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