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"राष्ट्र की धमनियां होते हैं राष्ट्रीय राजमार्ग"- वैभव डांगे

किसी देश के विकास में सबसे अहम योगदान राजमार्गो का होता है. विस्तार से जानिए

Rahul Pandey
  • Aug 21 2020 3:04PM
5 अगस्त स्वर्णिम तिथि के रूप में दर्ज हो गया हैं। देश के सबसे बड़े उत्सव स्वतंत्रता दिवस के ठीक पहले दो ऐसे महत्वपूर्ण कार्य हुए जो भारतीयों के मन की बैचैनी के कारण बने हुए थे। पांच अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा अयोध्या में भव्य राममंदिर की आधारशिला रखे जाने के साथ तथाकथित विवादित अध्याय का पटाक्षेप हो गया। इसी के साथ सनातनी अध्याय का प्रदुभाव भी हुआ। पिछले साल इसी तिथि यानी पांच अगस्त को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा जम्मू - कश्मीर को धारा-370 जैसी स्वार्थी सियासत की बेड़ियों से मुक्त कर देश के अन्य राज्यों की तरह अधिकार समपत्र बनाने का साहसिक फैसला लिया गया।

वास्तव में जम्मू - कश्मीर को जो विशेष राज्य का दर्जा दिया गया था, वह प्रजातंत्र के नाम पर प्रजा के अधिकार को कुछ शक्तिशाली परिवारों तक सीमित करने का बड़ा षड़यंत्र था। इससे परिवार - नियंत्रित राजनीतिक दल और उससे जुड़े परिवार खूब फले-फूले, लेकिन जम्मू-कश्मीर के लोग उसी पीड़ित दर्ज में रहे जैसे वह आजादी के पहले थे। पिछले 70 वर्षों में जितने तेजी से विकास होना चाहिए, वैसा न होकर आतंकवाद, अलगाववाद का विस्तार हुआ।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के विकास को गतिशील करने के लिए सबसे पहली जरूरत सम्पर्क की समझी गई। वैसे भी मोदी के नेतृत्व में जब 2014 में केंद्र में सरकार बनी, तो उसके बाद मैदानी, पूर्वोत्तर राज्यों के साथ कश्मीर और लद्दाख में सभी मौसम के अनुकूल सड़क सम्पर्क हो सके, उसके हिसाब से सड़क और सुरंग मार्ग निर्माण पर तेजी लाई जा चुकी थी। राष्ट्रीय राजमागो को राष्ट्र की धमनिया माना जाता है। यह आम लोगों और आवश्यक वस्तुओं की सुविधाजनक आवाजाही का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

यह राज्य और प्रजा की समृद्धि का रास्ता है। 2014 में सत्ता में आने के बाद से मोदी सरकार ने राजमार्ग क्षेत्र में बहुआयामी विकास के नए युग की शुरुआत की थी। पिछले 6 वर्षों में बुनियादी ढांचे के विकास की जो गति रही वह पिछले 30/40 वर्षों में नहीं देखी जा सकती है। जिसे सरकार ने अवसर में बदला और केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने अवसंरचना के विकास पर ध्यान केंद्रित किया।

दो लंबी सुरंगों के अलावा जम्मू से श्रीनगर के बीच 9 और छोटे सुरंग मार्ग बन रहे हैं। भूस्खलन से उत्पन होने वाली बाधा से बचने के लिए महत्वपूर्ण स्थानों पर सड़क को 4-लेन किया जा रहा है। इसमें यात्रियों की सुरक्षा के साथ जम्मू-श्रीनगर तक की यात्रा सुविधाजनक हो जाएगी। जम्मू-कश्मीर में सड़क सम्पर्क के काम जिस पैमाने पर चल रहे हैं, उसका पूरा ब्यौरा नहीं रखा जा सकता, लेकिन उन परियोजनाओं का उल्लेख करना जरूरी है, जो घाटी के जनजीवन और अर्थव्यवस्था की प्रगति के लिए मील के पत्थर साबित होंगे।

जम्मू - कश्मीर के वर्तमान सड़क विकास परियोजनाओं के महत्व को क्षेत्र में दो प्रमुख सुरंग परियोजनाओं के विशेष उल्लेख के बिना पूरा नहीं किया जा सकता। 2,500 करोड़ के बजट वाला जैड मोड़ और 6,000 करोड़ से अधिक की लागत वाला जोजिला सुरंग मार्ग पूरा होते ही श्रीनगर, कारगिल और लेह के बीच आल वेदर कनेक्टिविटी हो जाएगी।

यह दोनों सुरंग मार्ग राष्ट्रीय सुरक्षा के नज़र से बहुत महत्वपूर्ण हैं। जम्मू-श्रीनगर के बीच सबसे बड़ी समस्या हिमपात की हैं। सर्दी में 40 फीट मोटी बर्फ की परत जम जाती हैं। इससे चार माह के लिए आवागमन ठप्प हो जाता है। 6.5 कि.मी लम्बा जोजिला सुरंग मार्ग सब मौसम में जम्मू से श्रीनगर और लद्दाख तक के आवागमन को सुगम बनाएगा। राजनीतिक  एकीकरण के चलते इन परियोजनाओं को लेकर डेवलेपर्स और ठेकेदारों से दिलचस्पी बड़ी हैं। जम्मू-कश्मीर के आर्थिक और सामाजिक विकास में तेजी लाने के लिए 30 हज़ार करोड़ की लागत से ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस- वे का निर्माण किया जा रहा है।

दिल्ली-अमृतसर-कटरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस- वे परियोजना से दिल्ली-कटरा की दूरी 50 किलोमीटर कम हो जाएगी। राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं न केवल केंद्र शासित प्रदेश के भीतर सड़क के बुनियादी ढाचों में सुधार करेगी, बल्कि इन परियोजनाओं के निर्माण और संचालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा होगा। औद्योगिक विकास, पर्यटन में वृद्धि, आसान तीर्थयात्रा और समग्र आर्थिक समृद्धि पर ये परियोजनाएं प्रभावकारी साबित होंगी। जो जम्मू-कश्मीर के विकास के भविष्य का रास्ता बनाएगी।

इच्छा शक्ति के साथ लिए गए बड़े और साहसिक कदम तभी सही साबित होते हैं जब सही इरादों और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा जाए। धारा-370 खत्म किए जाने की वर्षगांठ पर और जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के विकास के लिए एक लाख करोड़ से अधिक के निवेश की सरकार की प्रतिबद्धता नेतृत्व के प्रति विश्वास को मजबूती देती हैं। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का सबका साथ-सबका विकास मूलमंत्र के साथ आत्मनिर्भर भारत बनाने का जो सपना है, वह अब जम्मू- कश्मीर और लद्दाख में साकार रूप लेने लगा हैं।

- वैभव डांगे 

(लेखक सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय में सलाहकार के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशासन व अर्थनीति के वरिष्ठ विश्लेषक हैं..)

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