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‘तालिबान राज’ में भुखमरी का शिकार हाे रहे लाेग! परिवार ने पैसों के लिए बेची नवजात बच्ची

आलम ये है कि अफगानिस्तान की स्थिति इतनी बिगड़ती जा रही है कि अब माता-पिता को अपने बच्चों को बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है.

Geeta
  • Oct 27 2021 11:45AM

तालिबान के कब्जा करने के बाद से ही अफगानिस्तान की स्तिथि बद से बदतर हाेती जा रही है. लाेग भुखमरी का शिकार हाेते जा रहे हैं. वहीं लाेग वहां रहने काे मजबूर हाे गए हैं. गाैरतलब है कि देश काे चलाने के लिए अर्थव्यवस्था अच्छी हाेनी चाहिए। जिसकाें चलाने वाली विदेशी मदद अब बंद हो चुकी है. देश की करेंसी की कीमत गिरती जा रही है और खाने की कीमतें आसमान छू रही हैं. यही वजह है कि अब मुल्क आर्थिक पतन की ओर बढ़ रहा है. आलम ये है कि अफगानिस्तान की स्थिति इतनी बिगड़ती जा रही है कि अब माता-पिता को अपने बच्चों को बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक, हेरात के एक गांव में एक मां ने अपनी नवजात बेटी को 500 डॉलर में बेच दिया, ताकि वह अपने अन्य बच्चों को खाना खिला सके. इसे खरीदने वाले व्यक्ति ने कहा कि वह बच्ची को पालकर बड़ी करना चाहता है, ताकि अपने बेटे से शादी करवा सके, लेकिन उसके असल इरादों की कोई गारंटी नहीं है.

रिपाेर्ट में कहा गया कि नवजात बच्ची को खरीदने वाले व्यक्ति ने अभी 250 डॉलर का भुगतान किया है, ताकि बच्ची का परिवार कुछ महीनों तक खाना खा सके. वहीं, जैसे ही बच्ची चलने लगेगी वह उसे ले जाएगा और बाकी के 250 डॉलर का भुगतान कर देगा. बच्ची को बेचने वाली मां ने कहा, ‘मेरे बाकी के बच्चे भूख की वजह से तड़प रहे हैं, तो इस वजह से मुझे अपनी बेटी को बेचना पड़ा.’ उसने कहा, ‘मैं कैसे ऐसा करके दुखी नहीं हो सकती हूं? वह मेरी बच्ची है. काश मुझे अपनी ही बेटी को नहीं बेचना पड़ता.’ अफगानिस्तान की 40 फीसदी जीडीपी विदेशी मदद पर आधारित है. ऐसा तब था, जब पिछली सरकार को पश्चिमी मुल्कों का समर्थन मिला हुआ था.

वर्ल्ड फूड प्रोग्राम ने कहा है कि अफगानिस्तान की आधी से आबादी जो कि लगभग 2.28 करोड़ है, उसे आने आने महीनों में कुपोषण और मौत का खतरा है. इसमें से 10 लाख बच्चे हैं, जिन्हें अगर तुरंत इलाज नहीं मिला तो वो मौत की आगोश में समा जाएंगे. WFP का कहना है कि अफगानिस्तान को बुरी स्थिति में जाने से बचाने के लिए लाखों डॉलर मदद की जरूरत है, लेकिन दुनियाभर की सरकारों द्वारा पैसों को रोक लिया गया है. ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें डर है कि ये पैसा तालिबान के हाथों में चला जाएगा और फिर संगठन इसका इस्तेमाल हथियार खरीदने के लिए कर सकता है.

 

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