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जानिए क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस? क्या है गौरवान्वित करने वाला इतिहास?

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस भारत की तकनिकी प्रगति के अनुस्मारक के रूप मे कार्य करता है, यह दिन भारत के पहले स्वदेशी विमान हंसा -3 की उड़ान को भी चिन्हित करता है

Leechhvee Roy
  • May 11 2020 11:24AM

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 11 मई को हर साल मनाया जाता है, यह भारत की तकनिकी प्रगति की याद दिलाता है. विशेष रूप से इस दिन, भारत ने राजस्थान मे भारतीय सेना की पोखरण टेस्ट रेंज मे शक्ति -1परमाणु मिसाइल का सफल परिक्षण किया. ऑपरेशन का नेतृत्व दिवंगत राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने किया था इसे ऑपरेशन शक्ति और पोखरण -2 कहा जाता था. दो दिन बाद भारत ने ऑपरेशन शक्ति के हिस्से के रूप मे दो परमाणु हथियारों का सफलतापूर्वक परिक्षण किया. एक तरह से, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस दैनिक जीवन मे विज्ञान के महत्त्व पर प्रकाश डालता है और युवाओं को इसे करियर विकल्प के रूप मे अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है. पोखरण परमाणु परिक्षण  'स्माइलिंग बुद्धा ' कोड  का पहला परिक्षण 1974 मे  किया गया. दूसरा परिक्षण पोखरण -2 का जो भारत द्वारा पोखरण परिक्षण मे किये गए परमाणु बम विस्फोट की पांच परिक्षण की श्रृंखला थी. मई 1998 मे भारतीय सेना की रेंज. उल्लेखनीय रूप से इन परमाणु परिक्षण ने संयुक्त राज्य अमेरिका और जापान सहित कई प्रमुख राज्यों द्वारा भारत के खिलाफ विभिन्न प्रतिबन्ध को विकसित किया. दिलचस्प बात तो यह है की शुरुआती पांच परिक्षण 11 मई को किये गए थे जब पास के भूकम्पीय स्टेशन मे 5.3 रिक्टर पैमाने पर भूकंप की रिकॉर्डिंग करते समय तीन परमाणु बम विस्फोट किये गए थे, 13 मई को दो परिक्षण किये गए थे. 

इसके बाद प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत को एक परमाणु राज्य के रूप मे घोषित किया, यह दुनिया का छठा ऐसा देश बना जिसने राश्ट्रों को 'परमाणु क्लब ' मे शामिल हुआ, और पहला ऐसा देश जो परमाणु हथियार सन्धि के अप्रसार के पक्ष मे नहीं था. NPT यूके रूस चीन फ्रांस और अमेरिका द्वारा हस्ताक्षरित एक वैश्विक सन्धि है जिसका उदेश्य परमाणु हथियारों की वृद्धि को रोकना और परमाणु निरस्त्रीकरण प्राप्त करना है. 

कुछ महत्वपूर्ण बातें जो जानना आवश्यक है -:

यह दिन भारत के पहले स्वदेशी विमान हंसा -3 की उड़ान को भी चिन्हित करता है, जो बेंगलुरु मे उड़ाया गया था. हंसा -3 को राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित किया गया था. यह एक दो सीटर हल्का विमान था जिसका उपयोग उड़ान संस्थानों मे खेल, पाइलट प्रशिक्षण, हवाई फोटोग्राफी, निगरानी और पर्यावरण से सम्बंधित परियोजनाओं के लिए किया जाता था. 

11मई 1998 वह दिन था जब रक्षा अनुसन्धान और विकास संगठन (DRDO) ने त्रिशूल मिसाइल के अंतिम परिक्षण-फायर को पूरा किया, जिसे तब भारतीय वायुसेना और सेना द्वारा सेवा मे लाया गया था. 

त्रिशूल मिसाइल सतह से हवा, त्वरित प्रतिक्रिया, छोटी दुरी की मिसाइल है, त्रिशूल भारत के एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम की एक इकाई थी, जिसके परिणाम स्वरुप पृथ्वी, आकाश और अग्नि  मिसाइल प्रणाली का निर्माण हुआ है. 

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