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NIA का खुलासा, जांच एजेंसियों से बचने के लिए ISIS कर रहा इस मोबाइल ऐप का इस्तेमाल

Threema ऐप कम्युनिकेशन के लिए सबसे सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसमें रजिस्टर करते हुए आपको न तो अपना Email आईडी देना होता है ना ही मोबाइल फोन नंबर.

Sagar Kumar
  • Jan 15 2021 9:26PM

केन्द्रीय जांच एजेंसी NIA ने दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी संगठन ISIS और उसके सहयोगी संगठन ISKP को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी की पड़ताल के दौरान पता चला है कि जांच एजेंसियों को गच्चा देने के लिए ISKP ने आपस में कम्युनिकेशन का तरीका बदल लिया है. पहले आतंकियों को टेलीग्राम और वॉट्सऐप के जरिए कमांड दी जाती थी, जिसे जांच एजेंसियां आसानी से ट्रैक कर लेती थीं. वहीं अब एक ऐसे ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसके डिजिटल फुटप्रिंट तलाशना जांच एजेंसियों के लिए काफी मुश्किल साबित हो रहा है.

NIA सूत्रों के मुताबिक, इस ऐप का नाम है- ‘थ्रीमा’ (Threema). पिछले साल मार्च में दिल्ली के ओखला से पकड़े गए इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस के आतंकी जहांजेब सामी वानी और उसकी पत्नी हीना बशीर बेग, बेंगलुरु के डॉक्टर अब्दुर रहमान उर्फ डॉक्टर ब्रेव से इसी थ्रीमा ऐप के जरिये संपर्क में थे. डॉक्टर ब्रेव, जिसका असली नाम डॉ अब्दुर रहमान था, इसकी गिरफ्तारी भी NIA ने पिछले साल अगस्त में बेंगलुरु से की थी.

NIA के मुताबिक, पकड़े जाने से पहले रहमान इसी थ्रीमा ऐप के जरिए देश और विदेश में मौजूद अपने बाकी आतंकी साथियों के संपर्क में था. इसी ऐप के जरिए रहमान उर्फ डॉक्टर ब्रेव सामी और उसकी पत्नी हिना को भी कमांड दिया करता था. NIA की मानें, तो आतंकी न सिर्फ थ्रीमा एप्लीकेशन का इस्तेमाल कर रहे हैं बल्कि इसके डेक्सटॉप वर्जन का भी खूब इस्तेमाल किया जा रहा है, वजह है इस ऐप से डिजिटल फुटप्रिंट को तलाशना न के बराबर होता है.

NIA सूत्रों के अनुसार, थ्रीमा ऐप बातचीत का सबसे सुरक्षित तरीका इसीलिए माना जा रहा है क्योंकि इसमें रजिस्टर करते हुए आपको न तो अपना ईमेल आईडी देना होता है ना ही मोबाइल फोन नंबर. इस ऐप को स्विट्जरलैंड में बनाया गया था जिसे आईफोन और एंड्रॉयड दोनों पर इस्तेमाल किया जा सकता है. साथ ही, इस ऐप की खास बात ये है कि थ्रीमा एप्लीकेशन पर की गई बातचीत, मैसेज और कांटेक्ट अपने डिवाइस में सेव होते हैं ना कि सर्वर पर. यही वजह है कि यह ऐप ISIS और ISKP के आतंकियों की पसंदीदा कम्युनिकेशन ऐप बन चुकी है.

हालांकि ऐसा नहीं है कि आतंकी संगठन पहली बार इस तरह के सिक्यॉर मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं, इससे पहले भी हिजबुल मुजाहिदीन (HM), अलकायदा और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकी अलग-अलग ऐप के जरिए एक दूसरे से बातचीत करते पकड़े जा चुके हैं.

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