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बिरयानी भी ठीक से न बना पाने वाले कुतुबुद्दीन ऐबक को बना दिया था विष्णु स्तंभ का निर्माता और नाम दे दिया कुतुब मीनार.. साजिश वामपन्थी कलमकारों की

पहले मुगलों का गुणगांन, अब देश की धरोहरों के निर्माण को लेकर भ्रमिक जानकारी, NCERT को नहीं पता कुतुब मीनार को किसने बनवाया?

Shiv Kumar
  • Jan 23 2021 12:36PM

NCERT  की किताबो के प्रकाशन में वामपंथी विचारधारा ने बुरी तरह कब्जा कर रखा है, नामवर सिंह से लेकर रोमिला थापर तक एनसीईआरटी की पुस्तकों के लिए नीति निर्धारण करते रहे हैं। ऐसे में NCERT बिना किसी प्रमाण के वामपंथी विचार धारा को धड्ड़ले से पढाया जा रहा है। इसी कड़ी में NCERT का एक और झूंठ सामने आया है।

दरअसल एनसीईआरटी के पास इस बात का कोई पुख्ता साक्ष्य नहीं है कि क़ुतुब मीनार (जो कि वास्तव में विष्णु स्तंभ )को कुतुबुद्दीन ऐबक और इल्तुतमिश ने बनवाया था। यह खुलासा RTI के दौरान हुआ है। फिर भी बिना किसी साक्ष्य के छात्रों को यह पढ़ाया जा रहा है।

बता दें कि क़ुतुब मीनार परिसर में हिंदू मंदिर होने के सबूत मिले हैं और इस सच्चाई को कई इतिहासकारों ने भी स्वीकार किया है। और हम सबको यही पढ़ाया गया कि कुतुबुद्दीन ऐबक और इल्तुतमिश ने कुतुब मीनार को बनवाया था। इसी सच्चाई को जानने के लिए लेखक नीरज अत्री ने एक RTI दायर की थी, जिसके जबाव ने सबको चौंका दिया है।

दरअसल NCERT की पुस्तक में लिखा है कि कुव्वतुल-इस्लाम मस्जिद और मीनार को 12वीं शताब्दी के अंत में बनवाया गया था। साथ ही लिखा है कि इसका निर्माण दिल्ली के सुल्तानों द्वारा बसाए गए पहले नगर का जश्न मनाने के लिए हुआ। आगे बताया गया है कि इसे इतिहास में दिल्ली-ए-कुहना नाम से जाना जाता है, जिसे हम आज पुरानी दिल्ली कहते हैं।

आगे लिखा है कि इस ‘मस्जिद’ को कुतुबुद्दीन ऐबक ने बनवाना शुरू किया था, जिसे मामलुक साम्राज्य के तीसरे सुल्तान इल्तुतमिश ने पूरा करवाया, जो ऐबक का दामाद था। साथ ही मस्जिद क्या होता है और अरबी में इस शब्द का मतलब क्या है, ये सब समझाया गया है। खुत्बा-ए-जुमा के साथ-साथ नमाज पढ़ने के बारे में भी समझाया गया है। फिर मुहम्मद बिन तुगलक के बनवाए बेगमपुरी मस्जिद का जिक्र है।
इस मामले में नवंबर 21, 2012 में नीरज अत्री ने एक RTI दायर की थी बता दें कि नीरज अत्री वो लेखक हैं जो ‘Brainwashed Republic: India’s Controlled Systemic Deracination’ नामक पुस्तक लिख चुके हैं। वो पहले ही इस पाठ्यक्रम में शामिल भारतीय इतिहास की पुस्तकों की पोल खोल चुके। जिस पुस्तक की यहाँ बात हो रही है, वो NCERT की कक्षा-7 की पुस्तक (ISBN 81-7450-724-8) है, जिसका नाम ‘Our Past 2’ है।



नीरज अत्री ने इस मामले में 5 सवाल पूछे उनके सवाल इस फैक्ट पर थे कि इसे दिल्ली के दो सुल्तानों कुतुबुद्दीन ऐबक और इल्तुतमिश ने बनवाया। उनके सवाल इस प्रकार थे 

 

1- क्या रिकॉर्ड में ऐसा कोई दस्तावेज या रेफेरेंस है, जिसके आधार पर ये निष्कर्ष निकाला गया कि कुतुबमीनार को इन्हीं दोनों सुल्तानों ने बनवाया था? अगर हाँ, तो कौन सा। इसके जवाब में NCERT के RTI सेल द्वारा दिसम्बर 11, 2012 को दिए गए जवाब में कहा गया था कि ऐसी कोई सर्टिफाइड कॉपी या दस्तावेज उपलब्ध ही नहीं है।

2- दूसरा सवाल था कि ऐसा कोई शिलालेख या पुरालेखिक सबूत भी है क्या, जिससे ये साबित होता हो? इसका जवाब भी ना में मिला।
3- तीसरे सवाल में उन लोगों के नाम माँगे गए थे, जिनकी अनुशंसा के बाद पुस्तक के उक्त अंश को जोड़ा गया। इसके जवाब में बताया गया कि सदस्यों, मुख्य सलाहकार, सलाहकार और अध्यक्ष के नाम पाठ्य पुस्तक में ही दिए गए हैं। 
4- उनका चौथा प्रश्न था कि इन तथ्यों का निरीक्षण कर के इन्हें पास किसने किया? इस का जवाब था कि प्रोफेसर मृणाल मिरि की अध्यक्षता वाली नेशनल मॉनिटरिंग कमिटी ने इसे अनुमति प्रदान की, जिसका जिक्र पुस्तक में भी है।
5- 5वां और अंतिम सवाल था कि इस तथ्य को लेकर कोई नोट्स हैं,?  जिसके जवाब में बताया गया कि विभाग की किसी फाइल्स में ऐसा कुछ भी नहीं है।

दरअसल नीरज अत्री ने 100 से भी अधिक आरटीआई लगाई थी जो कि सभी एनसीईआरटी में तथ्यों के साथ हुई कई छेड़छाड़ से जुड़ी थी जिसमें जबाव आने के साथ कई खुलासे भी हो रहें हैं। उन्होंने एनसीईआरटी पुस्तकों के बारे में बताया था कि UPA सरकार के आने के बाद उसमें आर्य-द्रविड़ की थ्योरी परोसी गई, जिससे बच्चों के मन में गलत धारणाएँ बैठीं। जिसको सामने आना बहुत जरूरी है। 

जम्मू-कश्मीर को लेकर भी गलत जानकारी 

हाल ही में NCERT  की कक्षा 12 की 'किताब स्वतंत्र भारत में राजनीती' में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाये जाने को महज कुछ लाईनो में ही खत्म कर दिया, बच्चों को पढ़ाया जाता है कि जम्मू-कश्मीर को अनुछेद 370के अन्तर्गत विषेश राज्य का दर्जा दिया गया है यह आधा सच बताकर छात्रों के मन में बचपन से ही गलत जानकारी बिठाई गई है। 

कहीं भी ये नहीं कहा गया है कि भारतीय संविधान में अनुच्छेद 370 को अस्थायी व्यवस्था बताया गया है। उसको इस तरह से लिखा गया है जैसे कि वो संविधान के अन्य अनुच्छेदों के समान है। इस अस्थायी व्यवस्था को छिपाकर विशेष दर्जा की बात को उभारा गया है और अंत में इसको खत्म करने की बात की गई है। 
स्वाभाविक तौर पर छात्रों के मन में प्रश्न उठेगा कि अगर मूल संविधान में किसी राज्य  को विशेष दर्जा दिया गया था तो उसको क्यों हटाया गया। यह जान के किया गया ताकि बच्चों को लगे ये संविधान को बदला गया है

सवाल ये उठता है कि एनसीईआरटी को ऐसी विशेली आजादी मानव संसाधन मंत्रालय क्यो दे रहा है? क्यों देश विरोधी बातें छात्रों को पढ़ाई जा रही हैं और मंत्रालय और एनसीईआरटी के जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं? क्यों गलत बातों को छापकर वास्तविक स्थिति को छिपाया जा रहा है। क्यों इस तरह की व्याख्या प्रस्तुत की जा रही है जो छात्रों के मन में अपने ही राष्ट्र की गलत छवि बनाती है?

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