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दुर्दांत अपराधी विकास दुबे के साथी का वो बयान जिसने खामोश कर दिया जातिवाद के साजिशकर्ताओं को

विकास दुबे की दरिदंगी जिसने कानपुर के लोगों में फैलाया खौफ।

Sudarshan News
  • Aug 10 2020 7:16PM

विकास दुबे जो 2 जुलाई को 8 पुलिसकर्मियों की  कानपुर में हत्या कर फरार हो गया था। उसे 9 जुलाई को मध्यप्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार किया गया। उसके एनकाउंटर के बाद जब उसके गांव के लोगों से मीडिया ने बात कि तब उन्होंने बताया कि विकास दुबे एक पापी था, उसने ना जाने कितने लोगों को मारा था। अच्छा हुआ वह मर गया वरना वह और लोगों को मारता।

उमाकांत ने मीडियाकर्मी से बात करने पर बताया कि विकास दुबे लोगों में अपने नाम का खौफ फ़ैलाने के लिए किसी भी हद को पार करने के तैयार रहता था। एक बार जब एक ग्रामीण ने उसके खिलाफ अपनी आवाज उठाई, तो विकास दुबे से यह देखा नहीं गया। उसे यह अपने वर्चस्व के खिलाफ जाता दिखाएं दिया, तो उसने उस ग्रामीण  को पूरे गांव के सामने बुरी तरह पीटा और वह इतना करने के बाद भी नहीं रुका। इसके बाद उसने  ग्रामीण के मुंह में पेशाब किया, जो कि दरिदंगी की पराकाष्ठा थी।

इसी दरिदंगी की वजह से लोग उससे डरते थे। इसके आगे उमाकांत ने बताया की विकास दुबे इंसान के भेष में राक्षस था। उसके लिए इंसानी जान की कीमत रतिभर नहीं थी। उसके डर की वजह से लोग उसका साथ देने पर मजबूर थे।

उमाकांत ने बताया कि विकास दुबे के कहने पर उसने अपनी लाइसेंसी राइफल से पुलिस कर्मियों पर गोली चलाई थी। यह पूरी घटना होने के बाद उसने हमें अलग - अलग होने को कहा। इस वजह से वह एक शहर से दूसरे शहर में भागता फिर रहा था। जब उसे बचने का कोई रास्ता नहीं जान पड़ा तब उसने थाने में सरेंडर होने की योजना बनाई।

उमाकांत उर्फ गुड्डन ने खुद चौबेपुर थाने में सरेंडर किया था। वह अपनी पत्नी और बेटी के साथ थाने पहुंचा था और यही दोहरा रहा था कि मैं दंबिश से डरा हुआ हूं। मै पुलिस हत्याकांड में शामिल था। मुझे उसके लिए आत्मग्लानि हैं, मै यहां खुद आया हूं। मेरी रक्षा की जाए,मुझ पर रहम करे।

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