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"बचेंगे तो और भी लड़ेंगे".. अधर्मियों के आगे ये दहाड़ने वाले धर्मयोद्धा दत्ताजी शिंदे बलिदान दिवस पर शत शत नमन.. मकर संक्रांति पर सुदर्शन न्यूज़ दिखायेगा इनके अद्वितीय पराक्रम का वर्णन

सुरेश चव्हाणके जी ने बीड़ा उठाया है ऐसे वीर बलिदानियों के इतिहास को पुनर्जीवित करने का.

Rahul Pandey
  • Jan 10 2021 10:03PM
जब - जब बात बलिदान , वीरता,  शौर्य और पराक्रम की होगी तब - तब भारत भूमि का वर्णन जरूर आएगा। वह भारत भूमि जो आदि से अनादि काल से अपने वैभवशाली अतीत के चलते विदेशी आक्रमणकारी चोर लुटेरे और डकैतों के अनगिनत हमलों का गवाह रही.. इन हमलों से इसी भारत भूमि को बचाने के लिए ऐसे - ऐसे हिन्दू वीरों ने अपने पराक्रम को दिखाया जिन का सच्चा इतिहास यदि वास्तव में देश और दुनिया के आगे होता तो आज भारत में ना सिर्फ किसी विदेशी संस्कृति को पनपने का अवसर मिलता बल्कि विधर्मी किसी भी हाल में धर्म को नुकसान ना पहुंचा पाते ..

लेकिन वामपंथियों ने सोची और समझी साजिश के तहत देश के सच्चे योद्धाओं को विस्मृत किया और जयकार की तमाम उन लुटेरों और दिला दो कि जिन्होंने भारत पर हमला केवल यहां के वैभव व संस्कृत को हानि पहुंचाने के लिए किया था। उन्हें तमाम बीर बलिदानियों में से एक योद्धा दत्ताजी शिंदे जी का आज बलिदान दिवस है..

आज ही के दिन अर्थात 10 जनवरी 1760 को महायोद्धा दत्ताजी शिंदे , जानकोजी शिंदे, मालोजी शिंदे, विष्णुपंत ,सबाजी शिंदे, बयाजी शिंदे महादजी शिंदे सहित असंख्य मराठा वीर राजधानी दिल्ली से सटे बुराडी घाट पर विधर्मी व दिल्ली पर कब्ज़ा करने आये दरिंदे रोहिले अफगानों का विदेशी संकट टालने हेतु मोर्चा लगाये हुए थे । 

मराठो ही नहीं बल्कि भारत और भारत की संस्कृति के दुश्मन नजीब खान , कुतुबशाह , महाबत खान सहित कई बडे बडे रोहिले सरदार दिल्ली पर राक्षसी नजरे डाले हुए थे इस संकट को टालने और दिल्ली को आबाद रखने का प्रण किये ।

धर्मयोद्धा दत्ताजी शिंदे का ये प्रण था कि अंतिम सांस तक विधर्मी नजीब और उसकी क्रूर फौज को पवित्र यमुना जी पार करने नहीं देंगे और जिसने पार की उसे मिलेगी मृत्यु.. बेहद हाड़ कम्पाती कङाके की ठंड में वीर मराठा सैनिक अपना मोर्चा संभाले हुए थे. सुबह लगभग 9 बजे वीर मराठा जानराव वाबळे के मोर्चे पर नजीब खान की विधर्मी सेना ने अधर्मपूर्वक आक्रमण किया.

 हमले की खबर मिलते ही धर्म व देश बचाने को तत्पर मराठों ने भी " #हर_हर_महादेव " और जय भवानी का उद्घोष कर के बुराडी घाट यमुना जी मे युद्ध का बिगुल बजाया.. इसके बाद धर्म व अधर्म का घनघोर युद्ध शुरू हुआ.. नजीबउद्दोला की फौज ने सीधा हमला कर के भगवा ध्वज गिराने का लक्ष्य रखा था जो मराठो को प्राणों से भी प्रिय था..

इस युद्ध मे अनीति पूर्वक जानकोजी शिंदे के बलिदान होने की अफवाह उड़ाई गई लेकिन युद्ध मे पारंगत मराठो ने दोपहर तक माँ यमुना का पानी लुटेरे हमलावरों से लाल कर दिया..

खुद को हारता देख कर अंत मे वीर दत्ताजी पर तोप दागी गयी जिससे दत्ताजी अपने लालमणि नाम के वफादार और युद्ध पारंगत घोडे से गिर कर यमुना जी में बहने लगे .. यह देख रणभूमि में चर्चा उठी दत्ताजी का पतन हो गया..  

यमुनाजी मे रक्त से लथपथ घायल दत्ताजी के पास कुतुबशाहा, नजीब पहुंचा और दत्ताजी से पूछा-  "क्यो पाटिल अोर लडोगे ?" अंतिम समय पर भी घायल दत्ताजी ने जोश में भरा उत्तर दिया- "क्यों नहीं. जियेंगे तो और भी लडेंगे " ..

यह अनपेक्षित उत्तर सुनते ही नीच कुतुबशाह ने वीर दत्ताजी की गर्दन पर वार किया दी और कटी गर्दन भाले की नोक पर लगा कर नाचना शुरु कर दिया.. शाम होने तक मराठा शक्ति कम होने लगी और वीर दत्ताजी के मृत शरीर को मराठा सैनिक रामचंद्र व उनके दस्ते ने अग्निदाग दिया..

लेकिन मराठो की क्षमता व पलट कर वार करने की सोच को कम आंकना विधर्मियो पर भारी पड़ा और दत्ताजी के बलिदान के बाद प्रतिशोध की अाग में जलते मराठों ने मात्र 6 माह मे दिल्ली के निकट कुंजपुरा के युद्ध मे जानकोजी शिंदे के नेतृत्व में अपना बदला पूरा करते हुए कुतुबशाहा की गर्दन काट कर उसी अंदाज में भाले की नोक पर नचाया...

 दिल्ली बुराडी के धर्मयुद्ध मे मराठों पर अधर्मियों की जीत के प्रतीक जिस हाथी जवाहरगज पर कुतुबशाह ने काबू किया था वह हाथी भी दुबारा कुंजपुरा के युद्ध मे मराठा साम्राज्य ने जीत कर स्वयं में भगवा ध्वज के नीचे मिला लिया..

सुदर्शन न्यूज़ के प्रधान संपादक सुरेश चव्हाणके जी ने ऐसे अनगिनत वीरों का बलिदान को क्रमशः उनकी जयंती व पुण्यतिथि पर याद करने व देश के साथ दुनिया को बताने का संकल्प लिया है..

अपने इसी संकल्प के चलते आगामी मकर संक्रांति को वो धर्म की खातिर अमर हुए इस वीर को याद करेंगे व इन लर विशेष शो करेंगे... अपने ट्वीट में उन्होंने दत्ता जी को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए लिखा है कि - 

भगवा ध्वज वाहक, धर्मरक्षक और राजधानी दिल्ली को बचाने के लिए आज ही के दिन अर्थात 10 जनवरी 1760 को साथियों संग बलिदान देने वाले महान हिन्दू योद्धा #दत्ताजी_शिंदे को शत - शत नमन.

इस मकर संक्रांति से महावीर हिन्दू योद्धाओं के सच्चे इतिहास पर हम विशेष कार्यक्रम करेंगे.. आप भी प्रतीक्षा करें मकर संक्रांति की जब आप जानेंगे एक और महायोद्धा के बारे में जिन के पराक्रम व बलिदान की यशगाथा विस्मृत करने की साजिश विदेशी पैसे पर बिके कलमकारों ने वर्षों तक रची थी..

देखिये सुरेश चव्हाणके जी का ट्वीट---

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2 Comments

Kotishah Naman to Hindu Hirday Samrat the Great Hindu warriors Shri Datta Ji Shinde and his helper warriors.

  • Guest
  • Jan 10 2021 10:17:53:783PM

Kotishah Naman to Hindu Hirday Samrat the Great Hindu warriors Shri Datta Ji Shinde and his helper warriors.

  • Guest
  • Jan 10 2021 10:17:53:580PM

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