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26 अप्रैल- आज ही भारतीय सेना के शौर्य से सिक्किम शामिल हुआ था भारत में. वो गौरवशाली दिन समय जब चीन को चटाई थी धूल

6 अप्रैल, 1975 को भारतीय सेना ने सिक्किम में घुसकर वहां के राजमहल को घेर लिया. जनता भी राजा के खिलाफ भड़की हुई थी.

Sudarshan News
  • Apr 26 2020 1:05PM

सिक्किम का प्रारंभिक इतिहास 13वीं शताब्दी में उत्तरी सिक्किम के काब लुंगत्सोक लेपचा राजा थेकॉन्ग टेक और तिब्बती युवराज ख्ये बूमसा के बीच रक्त संबंध और भाई चारे के समझौते पर हस्ताक्षर करने से आरंभ होता है। सन 1641 में तिब्बत के माननीय लामा संतों ने पश्चिमी सिक्किम के युकसाम नामक प्रांत की ऐतिहासिक यात्रा की, वहां उन्होंने खे-हूमसा के छठी पीढ़ी के वंशज फुंत्सोग नामग्याल का सिक्किम के पहले राजा के रूप में अभिषेक किया। इस प्रकार सिक्किम के ‘नामग्याल’ राजवंश का उदय हुआ। समय समय पर परिवर्तन के साथ सिक्किम प्रान्त के नागरिकों ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अपनाया और 1975 में वह भारतीय संघ का अभिन्न अंग बन गया। सिक्किम में सभी समुदायों के लोग आपसी प्रेम और सद्भावना से रहते हैं। सिक्किम में विभिन्न धर्मों से जुड़े लोग हैं और यह भारतीय संघ में साम्प्रदायिक सद्भाव और सर्वाधिक शांति वाला राज्य है।

6 अप्रैल, 1975 को भारतीय सेना ने सिक्किम में घुसकर वहां के राजमहल को घेर लिया. जनता भी राजा के खिलाफ भड़की हुई थी. उस दिन 250 सैनिक महल में मौजूद थे. तभी बंदूकें चलती हैं और बसंत छेत्री नाम के गार्ड को गोली लग जाती है.दिन के एक बजे के पहले ही भारतीय सेना पैलेस पर कब्जा कर लेती है. इस तरह स्वतंत्र सिक्किम भारत का हिस्सा बन जाता है. लेकिन भारत की ओर से यह कार्रवाई किसी बहकावे में आकर नहीं की गई थी. दरअसल यह एक लंबे घटनाक्रम का परिणाम था. जब सिक्किम के भारत में विलय की मुहिम शुरू हुई तो चीन ने इसकी तुलना 1968 में रूस के चेकोस्लोवाकिया पर किए गए आक्रमण से की. जिसके बाद इंदिरा गांधी ने चीन को तिब्बत पर किए उसके आक्रमण की याद दिलाई. 

हालांकि, भूटान इस विलय से खुश हुआ. ऐसा इसलिए क्योंकि इसके बाद से उसे सिक्किम के साथ जोड़ कर देखने की संभावना खत्म हो गईं. नेपाल ने भी सिक्किम के विलय का जबरदस्त विरोध किया. सिक्किम को भारत का 22वां राज्य बनाने का संविधान संशोधन विधेयक 23 अप्रैल, 1975 को लोकसभा में पेश किया गया. उसी दिन इसे 299-11 के मत से पास कर दिया गया.  राज्यसभा में यह बिल 26 अप्रैल को पास हुआ और 15 मई, 1975 को जैसे ही राष्ट्रपति ने इस बिल पर हस्ताक्षर किए, नाम्ग्याल राजवंश का शासन समाप्त हो गया.राष्ट्र की गौरवशाली सेना के इस महान कार्य के चलते आज ही के दिन विलय हुए सिक्किम की वर्षगाँठ पर भारत के सभी राष्ट्रवादियों को सुदर्शन परिवार की तरफ से हार्दिक शुभकामनाएं .

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