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प्रजा के दिलों में भी राज करते थे हमारे हिन्दू नरेश.. जैसलमेर के पूर्व महारावल ब्रजराज सिंह के स्वर्गवास पर थे जन जन की आँखों में आंसू और जमा हुए थे लाखो शुभचिंतक

वामपंथी कलमकारों ने हिन्दू राजाओं को दिखाया है अलग ही रूप में.

Rahul Pandey
  • Jan 1 2021 6:42PM

किस नजर से देखते हैं आप अपने ही पूर्वजों को ? विदेशी ताकतों के एजेंट वामपंथी इतिहासकारों की दृष्टि से या प्राचीन अकाट्य प्रमाणों के साथ आज तक सामने आ रहे तथ्यों के आधार पर..? ये वो साजिश थी जो अपनी काली छाया भगवान् श्रीराम तक पहुचाने में सफल रही थी और दुनिया के साथ इतिहास के अब तक के सबसे महान और न्यायप्रिय शासक भगवान् श्रीराम को कई वर्षो तक न्यायालय का विषय बना कर रखा था.

वो प्रभु श्रीराम जिनकी गवाही सृष्टि का पत्ता पत्ता और कण कण देते हैं उन पर भी कभी काल्पनिक तो कभी अन्य आरोप लगाये जाते रहे... फिर आप कल्पना ही कर सकते हैं कि हमारे पूर्वज रहे यशस्वी हिन्दू सम्राटो के इतिहास को किस प्रकार से विकृत किया गया होगा.. और ऐसा करना भी इतिहासकारों के वेश में छिपे वामपंथी एजेंटो की मजबूरी रही होगी क्योकि उनको अपने उस नमक का कर्ज चुकाना था जो न सिर्फ उन्होंने बल्कि उनके गद्दार पूर्वजो ने विदेशो से खाया था. 

फिलहाल यदि हमारे पूर्वजो के सच्चे रूप के बारे में बताया गया होता तो उन दरिन्दे और नर पिशाचो का महिमामंडन लगभग असम्भव था जो इस देश को लूटने के इरादे से आया करते थे और इनके हमले की दिशा सदैव पश्चिम ही रही है. आतंकवाद का धर्म भले ही जान कर भी न बताया जाता हो पर आतंकी हमले हमेशा पश्चिम से ही क्यों हुए हैं इस पर कभी किसी कलमकार ने लेख नही लिखे. इसी पश्चिम से होने वाले हमलों में भारत का सीमान्त क्षेत्र जैसलमेर प्रतिकार में सबसे आगे रहता और पड़ता था.

जिस प्रकार सूर्योदय की सबसे पहली किरण अरुणाचल प्रदेश में पडती है क्योकि वो सूर्य के उदय की दिशा से भारत का प्रथम प्रदेश पड़ता है, ठीक उसी अंदाज़ में पश्चिम से होने वाले लुटेरों और जिहादियो के हमले में भी पहले स्थान पर आता था जैसलमेर. आर्थिक समृद्धि के साथ यहाँ का वैभवशाली अतीत लुटेरों को यहाँ हमले के लिए और यहाँ पर धर्मपूर्वक शासन अधर्मियों को उकसाया करता था यहाँ पर हमले के लिए. 

पर अधर्म के साथ अनगिनत युद्ध करने वाले यहाँ के हिन्दू राजाओं ने कभी भी विधर्म के आगे न घुटने टेके और न ही समझौता किया.. यहाँ हिन्दू योद्धा अंतिम सांस तक लड़ते थे और उनकी वीरगति के बाद हिन्दू वीरांगनाएं खुद को अगिन माँ को समर्पित कर के अपने प्रियजनों से मिलने के लिए अन्य मार्ग से स्वर्ग सिधार देती थीं. ये वही पावन स्थल है जहाँ सबसे अधिक जौहर हुआ है..

यहाँ के सम्राटो की वीरता इसके बाद भी कभी नकली कलमकारों के लिए लेखनी का विषय नही रही. यद्दपि उस पवित्रता को पाने के लिए उनके सोच का सामर्थ्य भी कम रहा होगा.  महिलाओं ने जौहर के रूप में जो सामूहिक त्याग किया उसकी मिसाल आज तक संसार में कभी और कहीं भी देखने को नही मिली है. फिर भी ये हिस्सा इतिहास के पन्नो से अछूता रहा.

इतना ही नही, देश भर के हिन्दू राजाओं की छवि को नकली कलमकारों के साथ bollywood ने भी बेढंगे रूप में प्रस्तुत किया और कई फिल्मो ने विरोध के बाद भी विदेशी ताकतों के प्रभाव में हिन्दू समाज में जहर घोलने में सफलता पाई और दूर कर दिया सच्चे इतिहास से जो यदि आज असल रूप में सामने होता तो न समाज में बलात्कारी होते और न ही लुटेरे..

जिसका भी झूठे इतिहास और साजिश वाली फिल्मो में महिमामंडन किया गया वो तमाम लोग या तो क्रूर बलात्कारी थे और या लुटेरे. कुछ में तो ये दोनों अवगुण थे. ऐसे में जैसलमेर के नरेशो की कहानी विस्मृति करने का तत्काल लाभ भले ही विदेशी एजेंटो को मिला हो पर उसकी दूरगामी हानि आज भी समाज और देश को देखनी पड़ रही है और यदि सुधार न हुआ तो भविष्य में ये हानि और अधिक होना स्वाभाविक है.

अगर बात आज के परिवेश में किया जाय तो बड़े से बड़े नेताओ को आज अपनी जनसभा में या रैली में भीड़ जुटाने के तमाम इंतजाम करने पड़ते हैं . पूरी टीम , पूरा पैसा , पूरा समय इत्यादि लगा कर प्रबन्धन कुछ सौ या हजार लोगों को जबरन लालच आदि दे कर जमा करता है . लेकिन कल्पना करें उस व्यक्तित्व की जो न नेता हो और न ही अभिनेता, फिर भी उसके लिए हुजूम उमड़ पड़े.

बात हो रही है राजस्थान की. ये वीरभूमि सदा ही हल्दीघाटी जैसे युद्धों की गवाह रही है. यहाँ पर अधर्म से लड़ने के लिए हिन्दू सम्राटो ने घास की रोटी खाई थी. यही पर भामाशाह ने अपने जीवन भर की कमाई को अधर्म से लड़ने के लिए दे दिया था. उस वीरभूमि में एक नरेश के राजवंश के विदाई का जो स्वरूप दुनिया ने देखा वो अब तक का न सिर्फ इतिहास बता गया बल्कि इतिहास के दोषियों पर सवाल भी उठा गया.

योगेश्वर भगवान् श्रीकृष्ण के वंशधर यदुकुल शिरोमणि जैसलमेर नरेश महारावल बृजराज सिंह भाटी जी का स्वर्गवास दिनाँक 28 दिसम्बर को हो गया  था. उनकी मृत्यु की खबर सुन कर पूरा क्षेत्र जिस भी रूप में था उसी रूप में वैसे ही निकल पड़ा. हर कोई उनके महल की तरफ बढने लगे और उनके अंतिम दर्शन को ले कर लालायित हो गये.. हर आँख में आंसू दिखाई देने लगे.

उनकी अंतिम यात्रा 29 दिसम्बर को सोनार किले जैसलमेर से रवाना हुई जिसमें लाखों लोग स्वतः भावनाओ के वशीभूत होकर जातीय भेदभाव से ऊपर उठकर जुट गए जबकि जैसलमेर की जनसंख्या भी बहुत कम है । जबकि पूर्व नरेश के परिवार के ये उत्तराधिकारी गुरुग्राम में सामान्य से घर मे सामान्य व्यक्ति की तरह रह रहे थे जो आधुनिक दिखावों से खुद को बहुत दूर रखते थे. 

जिस प्रकार की भीड़ उनके अंतिम दर्शन में दिखी उस से कुछ सवाल खड़े हुए. उदहारण के लिए यदि इनके पूर्वज वामपंथी इतिहासकारों के अनुसार अत्याचारी होते तो क्या राजशाही खत्म होने के बाद उन्हें इतना जनप्रेम मिल पाता ? इनके अंतिम यात्रा में शामिल प्रत्येक व्यक्ति जाति की भावना से दूर था और हर जाति का व्यक्ति अंत्ययात्रा में शामिल रहा.

ऐसे में क्या कोई इन पर या इनके पूर्वजो पर जातिवादी होने का झूठा आरोप लगा सकता है ? सबसे खास बात ये रही कि आतंकियों के जनाज़े को LIVE कवर करने वाला मीडिया का वामपंथी वर्ग इस मामले में चुप रहा क्योंकि इनके लिए जनता का अथाह प्रेम दिखाने के बाद उसके तमाम दावे स्वतः ही झूठे साबित हो जाते जो उसने स्वतंत्रता के बाद लोगों के मन मष्तिष्क में बोये है.

इनके देहांत के बाद गूगल में भी Brijraj Singh Passes Away ट्रेंड किया था. गौर करने योग्य है कि राजस्थान में जैसलमेर रियासत के पूर्व महारावल (महाराजा) ब्रजराज सिंह का 52 वर्ष की आयु में सोमवार को दिल्ली के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। गुरुवार को उनकी तबीयत खराब होने पर जोधपुर से एयर एंबुलेंस के जरिये दिल्ली शिफ्ट किया गया था। 

उनके लीवर में तकलीफ थी और जोधपुर के डॉक्टरों ने उन्हें लिवर ट्रांसप्लांट की सलाह दी थी। उसके बाद दिल्ली के मेदांता अस्पताल में उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। इसको लेकर समूचे जैसलमेर क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई। बाजार बंद हो गए हैं और राज परिवार का ध्वज झुका दिया गया था। 

जैसलमेर के पूर्व महारावल को पेट में तकलीफ होने पर पूर्व में जोधपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां डॉक्टरों ने उनकी जांच कर पाया कि उनके लीवर में खराबी है, जिसके लिए लीवर ट्रांसप्लांट के लिए उन्हें दिल्ली के मेदांता अस्पताल ले जाया गया। जहां पर सोमवार को उनका निधन हो गया था।

देखिये इस विषय पर सुदर्शन न्यूज़ की खास प्रस्तुति -

 


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