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श्विराज के राज में बंद हुई "गोडसे की ज्ञानशाला".. ग्वालियर प्रशासन ने किया था हस्तक्षेप

हिन्दू महासभा में शुरू किया था ये अभियान.

Rahul Pandey
  • Jan 13 2021 7:58PM

फिलहाल खबर लिखे जाने से पहले ये जानना जरूरी है कि किसान आन्दोलन की आड़ में किसानो के वेश में किस प्रकार के नारे लगाये गये थे. इतना ही नही , इस से पहले CAA , NRC के नाम पर किये गये दंगो में क्या क्या कहा गया और उस से पहले JNU , AMU में क्या बोला गया था. पर उस समय देश हित से ऊपर वामपंथी तत्वों ने एक शब्द रखा था और वो शब्द था "अभिव्यक्ति की आज़ादी".

पर अचानक ही वो सभी मापदंड एक एक कर के बदलने लगे और शोर मचने लगा साम्प्रदायिकता और देश के हित का. खुलेआम चीन का एजेंडा चलाना और पाकिस्तान की तरफदारी करना भले ही कुछ लोगों के लिए नेतागीरी और अपनी संतुष्टि का विषय हो पर नाथूराम गोडसे का नाम आते ही चिंहुक गए वो तमाम सभी एक स्वर में.

फिलहाल मिल रही नई जानकारी के अनुसार शिवराज शासित मध्यप्रदेश के ग्वालियर में जिला प्रशासन के दखल देने के बाद हिंदू महासभा (Hindu Mahasabha) ने ग्वालियर में गांधी वध के जिम्मेदार नाथूराम गोडसे (Nathuram Godse) की ज्ञानशाला को बंद कर दिया है.

ये ज्ञानशाला गत मंगलवार को बंद की गई है. इस ज्ञानशाला की शुरुआत दो दिन पहले 10 जनवरी को ग्वालियर में हिंदू महासभा ने दौलतगंज स्थित अपने दफ्तर में की थी. इसकी जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने महासभा के पदाधिकारियों से बात की और उस इलाके में धारा 144 लगाकर उन्हें किसी प्रकार की शांति भंग नहीं होने देने का निर्देश दिया है. 

ग्वालियर के अपर कलेक्टर किशोर कान्याल ने बताया, ‘‘मीडिया में समाचार आने के बाद दौलतगंज में इस ज्ञानशाला की जानकारी मिली थी. इसके बाद प्रशासन ने हिंदू महासभा के पदाधिकारियों से बात की और नोटिस जारी किया. इसके साथ दौलतगंज इलाके में धारा 144 लगा दी गई है.’’ उधर प्रशासन से बात करने के बाद हिंदू महासभा ने गोडसे की ज्ञानशाला को बंद कर दिया.

इस बारे में हिंदू महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. जयवीर भारद्वाज ने बताया, ‘‘हिन्दू महासभा के पदाधिकारियों की बैठक में निर्णय लिया गया कि हिन्दू महासभा भवन दौलतगज ग्वालियर में राष्ट्र भक्तों से प्रेरणास्रोत आयोजन जारी रहेंगे. गोडसे ज्ञानशाला को संचालित नहीं किया जायेगा.’’

इससे पहले हिंदी दिवस के मौके पर गोडसे ज्ञानशाला की शुरुआत करते हुए भारद्वाज ने कहा था कि अब हिंदू महासभा इसी इतिहास को नयी पीढ़ी को बताने के लिए ग्वालियर में दौलतगंज स्थित कार्यालय में गोडसे की ज्ञानशाला शुरू कर रही है. इस ज्ञानशाला में गोडसे के अलावा राष्ट्र निर्माण करने वाले दूसरे महापुरुषों, गुरु गोविंद सिंह, छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप, डॉ. हेडगेवार, पंडित मदन मोहन मालवीय से जुड़ा इतिहास भी बताएगी.'

उन्होंने कहा था कि हिंदू महासभा ने हमेशा से हिंदी, हिंदू और हिंदुस्तान की बात की है और आज 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस है, इसलिए इस ज्ञानशाला की शुरुआत की गई है. इसके पहले हिंदू महासभा ने 15 नवंबर 2017 को गोडसे का यहां मंदिर बनाने के लिए प्रतिमा भी स्थापित की थी, लेकिन उस समय उस प्रतिमा को जब्त कर लिया गया. इस प्रतिमा को हिंदू महासभा के कार्यकर्ता कई बार प्रशासन से मांगते रहे हैं.

फिलहाल इस मामले में राजनैतिक के साथ प्रशासनिक लोगो ने चुप्पी साध रखी है और कोई भी इस मुद्दे पर खुल कर बोलने को तैयार नहीं दिख रहा. यद्दपि गोडसे विरोधियो ने अपने स्वर को पूरी तरह से बुलंद रखा है और हालात यहाँ तक बने कि खुद तोड़फोड़ के आरोपी अभियुक्तों ने भी गांधी के अहिंसा सिद्धांत पर गोडसे का विरोध किया

इस मामले में अभी तक ये भी स्पष्ट नही किया गया है कि गोडसे की जब्त प्रतिमा क्या हिन्दू महासभा को लौटाई जायेगी या नही ?

 

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