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"मंदिर वहीं बनाएंगे" के पवित्र उद्घोष को सांप्रदायिक बताने वालों का नया सेकुलर नारा- "झुग्गी वहीं बसायेंगे".. "रोहिंग्या उनके, राम पराए"

ठीक यही है चरमपंथ और वामपन्थ का असली चेहरा.

सुदर्शन न्यूज़ डेस्क
  • Jun 17 2021 8:08AM
अचानक से दिल्ली में जिस प्रकार से वामपंथ और चरमपंथ ने मिलकर के रोहिंगयाओ की बस्ती में लगी आग को राष्ट्रीय आपदा का विषय बना दिया है, उस से कहीं ना कहीं वर्षों से बेघर हुए कश्मीरी हिंदुओं के मन में यह पीड़ा जरूर आई होगी कि काश उनके लिए भी कभी इतने प्रेम और कष्ट का 1% भी दिखा होता।

ज्ञात हो कि अनगिनत अपराधों में शामिल और दुनिया के सबसे क्रूर वहशी दरिंदे कहे जाने वाले के साथ-साथ संसार के सबसे शांतिप्रिय बौद्ध समाज को भी हथियार उठा लेने पर मजबूर कर देने वाले रोहिंगयाओ की पैरवी जिस अंदाज में भारत में हो रही है उस अंदाज में संयुक्त राष्ट्र संघ भी नहीं कर रहा है।

विशेषकर ओखला के आसपास राजनीति करने वाले मुस्लिम नेताओं में तो इसकी जबरदस्त होड़ दिख रही है। कुछ समय पहले कांग्रेस पार्टी के आसिफ मोहम्मद खान ने इलाके का दौरा किया और कहा था कि रोहिंग्या को घुसपैठी कहने वाले स्वयं सांप्रदायिक हैं और रोहिंगयाओ को मासूमियत की प्रतिमूर्ति घोषित कर दिया।

अब वहां उसी क्षेत्र में अरविंद केजरीवाल के सबसे करीबी विधायक अमानतुल्लाह खान ने दौरा किया है । अपनी चिर परिचित कुशैली में उन्होंने कैमरे के आगे अधिकारियों और दिल्ली पुलिस के जवानों को अपमानित करते हुए रोहिंगयाओ के प्रति अथाह प्रेम जताया है।

जल चुकी बस्ती के लिए शासन-प्रशासन सब को कटघरे में खड़ा करते हुए अमानतुल्लाह ने एक नया नारा दिया और वह नारा है "झुग्गी वही बसाएंगे".. इस नारे में उनकी सोच के कई लोग उनके साथ जुड़ गए हैं और रोहिंगयाओ की झुग्गी बस्ती दोबारा बनाने और बसाने के लिए रात दिन एक कर चुके हैं।

धर्म विरोधी वामपंथी भी "झुग्गी वही बसाएंगे" के नारे से खुशी से झूम उठे हैं और वह भी इसमें खुशी-खुशी शामिल हो चुके हैं। यहां यह ध्यान रखना होगा कि यही तथाकथित सेकुलर वामपंथी और रोहिंग्या समर्थक भगवान राम के लिए श्री राम भक्तों द्वारा किए गए उद्घोष "मंदिर वहीं बनाएंगे" को सांप्रदायिक घोषित किया करते थे.

ऐसे में है बड़ा सवाल जरूर बनता है कि "रोहिंग्या अपने और राम पराये" का सिद्धांत अपनाने वालों से आने वाले समय में धर्म और राष्ट्र के प्रति कितने समर्पण व अपनेपन की कल्पना की जा सकती है ?

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