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फरसाबहार जनपद के ग्राम पंचायत सिंगिबहार में कोरोना काल की शुरुआत से नवम्बर महीने तक पंचायत के कई वित्त्तीय खातों से लाखों रुपये आहरण कर लिए गए। जिसका कोई भी विवरण पंचायत के कार्रवाई पंजी में दर्ज नहीं है।पढ़िये क्या है पूरा मामला........

फरसाबहार जनपद के ग्राम पंचायत सिंगिबहार में कोरोना काल की शुरुआत से नवम्बर महीने तक पंचायत के कई वित्त्तीय खातों से लाखों रुपये आहरण कर लिए गए। जिसका कोई भी विवरण पंचायत के कार्रवाई पंजी में दर्ज नहीं है।

संतोष कुमार शर्मा सुदर्शन न्यूज़
  • Jan 26 2021 3:40PM
जशपुर :-  जिले के फरसाबहार जनपद में एक फिर से भ्र्ष्टाचार को लेकर नया बखेड़ा शुरू होने वाला है । बताया जा रहा है कि इस जनपद के ग्राम पंचायत सिंगिबहार में कोरोना काल की शुरुआत से नवम्बर महीने तक पंचायत के कई वित्त्तीय खातों से लाखों रुपये आहरण कर लिए गए। जिसका कोई भी विवरण पंचायत के कार्रवाई पंजी में दर्ज नहीं है।

यहां के उपसरपंच का कहना है कि बिगत अप्रैल महीने से जुलाई महीने तक covid 19 के नाम पर तकरीबन 7 लाख रुपये क्रमशः बैंक से आहरण किया गया लेकिन पंचायत की कार्रवाई पंजी में यह नहीं दर्शाया गया कि क्रमवार आहरण किये गए तकरीबन 7 लाख की राशि किन-किन कार्यो के लिए निकाली गई। ना ही बैंक से आहरण किये गए राशि का ही कार्रवाई पंजी में कोई हिसाब लिखा है।


उपसरपंच ने दी ये जानकारी
मीडिया  को उपसरपंच ने बताया कि बिगत नवम्बर महीने में कई तारीखों में तकरीबन साढ़े 11 लाख की निकासी की गई, लेकिन पंचायत की कार्रवाई पंजी में उन रुपयों का भी कोई लेखा-जोखा नहीं है। केवल निर्माण कार्यो का ही उल्लेख किया गया।

उपसरपंच का कहना है कि कई वार्ड पंचों की उपस्थिति में उसने लाखो रुपये के हुए भ्र्ष्टाचार के प्रमाण के तौर पर पंचायत के सम्पूर्ण कार्रवाई विवरण और बैंक के डिटेल निकलवाये हैं । प्रमाण के तौर पर सारे दस्तावेज उनके पास मौजूद है और सभी दस्तावेज के साथ वह वार्ड पंचों के साथ मिलकर इसकी शिकायत कलेक्टर और पंचायत के आला अधिकारियों के समक्ष करेंगे।


 
सरपँच सचिव साठ गांठ करके पंचायत के खाते में रखी हुई राशि का लगातार आहरण कर रहे हैं और उनके द्वारा न तो उपसरपंच होने के नाते उन्हें हिसाब दिया जाता है न ही वार्ड पंचों को । आखिरी में उसने बताया कि उंसके पास सारे दस्तावेज है जो इनके भ्र्ष्टाचार को प्रमाणित करने के लिए काफी है।

तत्कालीन सचिव से की गई चर्चा
इस मामले जब ग्राम पंचायत सिंगी बहार के तत्कालीन सचिव से चर्चा की गई, तो उसने बताया कि covid काल मे बैठक नही किया जाना था इसलिए बैठक नही हुई थी और जिस 7 लाख की निकासी की बात कही जा रही है उन 7 लाख को सेनेटाइजर, मास्क, साबुन और प्रवासी मजदूरों के लिए गाड़ी व्यवस्था, भोजन और क्योरण्टाईं सेंटर की वव्यवस्था में खर्च हुए हैं ।

अक्टूबर महीने में उसका तबादला दूसरे पंचायत में कर दिया गया ।वर्तमान पंचायत सचिव शिवमंगल साय का कहना है कि पहले से ही उंक्त कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति और स्टीमेट बना हुआ था इसलिए कार्रवाई पंजी में राशि का उल्लेख नहीं किया गया

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