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छत्तीसगढ़ में स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत ट्राईबल टूरिज्म सर्किट विकास को आज मिलेगा प्लेटफॉर्म, कैसे? पढ़िये

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 14 अगस्त को दोपहर एक बजे अपने निवास कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में बिलासपुर जिले के कुरदर हिल इको रिसॉर्ट, कबीरधाम जिले के सरोधा दादर बैगा एथनिक रिसॉर्ट और कोण्डागांव जिले में नवनिर्मित धनकुल एथनिक रिसॉर्ट का वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से ई-लोकार्पण करेंगे।

योगेश मिश्रा, छत्तीसगढ़
  • Aug 13 2020 11:50PM
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 14 अगस्त को दोपहर एक बजे अपने निवास कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में बिलासपुर जिले के कुरदर हिल इको रिसॉर्ट, कबीरधाम जिले के सरोधा दादर बैगा एथनिक रिसॉर्ट और कोण्डागांव जिले में नवनिर्मित धनकुल एथनिक रिसॉर्ट का वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से ई-लोकार्पण करेंगे। ’’ट्राइबल टूरिज्म सर्किट’’ स्वदेश दर्शन योजना के तहत ये टूरिस्ट रिसार्ट बनाए गए हैं।
 
गृह, लोक निर्माण और पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा प्रदेश में निर्मित विभिन्न रिसोर्ट पर केंद्रित प्रमोशनल वीडियो फिल्म का प्रदर्शन भी किया जाएगा। कार्यक्रम में पर्यटन विभाग के सचिव श्री अन्बलगन पी. और छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की प्रबंध संचालक इफ्फत आरा भी उपस्थित रहेंगे।
 
छत्तीसगढ़ में स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत ट्राईबल टूरिज्म सर्किट विकसित किया जा रहा है। इसके तहत पर्यटन स्थलों में बुनियादी ढ़ांचा विकसित किया जा रहा है। पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय कला, संस्कृति, हस्तशिल्प को भी बढ़ावा मिलेगा। छत्तीसगढ़ राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ट्राइबल टूरिज्म सर्किट के अंतर्गत कुल 13 स्थानों पर 96 करोड़ की लागत से ईको एथनिक टूरिस्ट रिसार्ट निर्मित कराए जा रहे हैं। जिसमें जशपुर, कुनकुरी, मैनपाट, कमलेश्वरपुर (मैनपाट), महेशपुर, कुरदर, सरोधा दादर, गंगरेल (धमतरी), नथियानवागांव, कोण्डागांव, जगदलपुर, चित्रकोट एवं तीरथगढ़ शामिल हैं। इस योजना के तहत क्रमशः कुरदर (बिलासपुर), सरोधा दादर (कबीरधाम) तथा धनकुल (कोण्डागांव) ईको एथनिक रिसार्ट का निर्माण पूरा कर लिया गया है। जिसका ई-लोकार्पण मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 14 अगस्त को करेंगे। 
 
छत्तीसगढ़ राज्य पर्यटन की दृष्टि से एक समृद्ध राज्य है, यहां वे सारी विशेषताएं उपलब्ध है जिसमें एक पर्यटक की रूचि होती है। हमारे राज्य में धार्मिक, पुरातात्विक एवं प्राकृतिक स्थलों की भरमार है। इसके साथ ही राज्य की पहचान यहां की आदिवासी एवं जनजातीय संस्कृति से भी है। पर्यटकों को अब सामान्य पर्यटन के साथ स्थानीय संस्कृति को भी निकट से देखने एवं उनकी विशेषताओं को समझने का अवसर मिलेगा। 
 
हमारे प्रदेश में उत्तर में जशपुर से लेकर दक्षिण में कोंटा तक विभिन्न जनजातीय समुदाय निवास करते हैं। छत्तीसगढ़ राज्य की आदिवासी एवं जनजातीय संस्कृति से पर्यटकों को परिचित कराने के लिए वर्ष 2016 में ट्रायबल टूरिज्म सर्किट की परियोजना स्वीकृत की गई है। इस योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य की आदिवासी एवं जनजातीय संस्कृति के वैभव, कला, संस्कृति, परंपरा, हस्तशिल्प और ग्रामीण परिवेश को नजदीक से देखने-समझने के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा पर्यटकों को इको-एथनिक वातावरण और सुविधाएं प्रदान करने की पहल की जा रही है। 
 

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