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तमाम दिव्यांगों के लिए प्रेरणा बनी भारतपुत्री भाविना पटेल.. Tokyo Paralympics में सिल्वर जीत बढ़ाई तिरंगे की शान

आपको बता दें की शारीरिक अपंगता का बाद भी इस लड़की में इतनी हिम्मत थी कि आज इनके जज़्बे को पूरी दुनिया सलाम कर रही है. पैरालिम्पिक्स के महाखेल भाविना पटेल ने भारत को सिल्वर मैडल दिलाकर विश्व में भारत एवं तमाम भारतीयों का सीना गर्व से ऊँचा कर दिया।

Shivam Mrinal
  • Aug 29 2021 11:10AM
वो कहते है ना, मनुष्य  के अंदर हौसला और उस हौसले को पूरा करने हेतु ढृढ़ संकल्प होना चाहिए, बाकि उसके हौसले को उड़ान ईश्वर खुद-ब-खुद दे देते हैं. हाल ही में कुछ ऐसी वाक्यात भारत की बेटी के साथ प्रतयक्ष रूप से देखने को मिली है. टोक्यो पैरालिम्पिक्स में महिला एकल क्लास 4 वर्ग के फाइनल में भारत की भाविना पटेल ने हिन्दुस्थान के लिए सिल्वर मैडल जीता है, एवं तमाम हिन्दुस्तानियों को गर्वान्गित किया है. 

गुजरात के मेहसाणा की भाविना पटेल ने 13 साल पहले अहमदाबाद के वस्त्रापुर इलाके में नेत्रहीन संघ में खेलना शुरू किया, जहां वह दिव्यांगों के लिए आईटीआई की छात्रा थी. बाद में उन्होंने दृष्टिदोष वाले बच्चों को टेबल टेनिस खेलते देखा और इसी खेल को अपनाने का फैसला किया.  भाविना पटेल 2011 में दुनिया की दूसरे नंबर की खिलाड़ी भी बनीं, जब उन्होंने पीटीटी थाईलैंड टेबल टेनिस चैम्पियनशिप में भारत के लिए रजत पदक जीता था. अक्ट्रबर 2013 में उन्होंने बीजिंग में एशियाई पैरा टेनिस चैम्पियनशिप में रजत पदक जीता था. 

आपको बता दें की शारीरिक अपंगता का बाद भी इस लड़की में इतनी हिम्मत थी कि आज  इनके जज़्बे को पूरी दुनिया सलाम कर रही है. पैरालिम्पिक्स के महाखेल भाविना पटेल ने भारत को सिल्वर मैडल दिलाकर विश्व में भारत एवं तमाम भारतीयों का सीना गर्व से ऊँचा कर दिया।

हालाँकि भावना गोल्ड जीतने से चूंक गई, क्योंकि मुकाबला अत्यंत ही कठिन था. लेकिन फिर भी भाविना ने पहले गेम में झाउ यिंग को अच्छी टक्कर दी. चीन की दो बार की पूर्व स्वर्ण पदक खिलाड़ी ने एक बार लय हासिल करने के बाद भावना को गेम में वापसी करने का मौका नहीं दिया, अंततः उनको रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा. खैर जो भी हो भारत को भाविना के सिल्वर पे उतना ही अभिमान है जितना की उनके गोल्ड पर होता।

भाविना आज पूरे भारत की प्रेरणा बन चुकी  है, कई दिव्यांग जो कहीं न कहीं अपने ज़िन्दगी से निराश हताश हो चुके थे  उनको भाविना के रूप में एक नई आशा की किरण दिख रही है, एवं वो भी भारत की इस बेटी की तरह अपनी ज़िन्दगी में कुछ हासिल करने का लक्ष्य रख रहे है. सुदर्शन परिवार की तरफ से भी भाविना को बहुत बहुत बधाई, देश उनके इस उपलब्धि को हमेशा याद रखेगा।

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