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हर साल बचेगा 7 लाख करोड़ रुपये, बीजेपी नेता ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया जनहित याचिका

बीजेपी नेता ने की सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल

Namit Tyagi , twitter @NamitTyagi1
  • Nov 16 2020 7:39PM
जनहित याचिकाएं दायर करने के लिए मशहूर वरिष्ठ भाजपा नेता और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में एक और जनहित याचिका दाखिल कर देश में कालाधन, बेनामी संपत्ति और आय से अधिक कमाई को शत-प्रतिशत जब्त करने तथा भ्रष्टाचारियों को आजीवन कारावास देने की मांग उठाई है। भाजपा नेता ने कहा है कि वर्तमान समय में लागू भ्रष्टाचार विरोधी कानून बहुत ही घटिया कमजोर और अप्रभावी हैं इसीलिए कालाधन बेनामी संपत्ति और आय से अधिक संपत्ति की समस्या खत्म नहीं हो रही है। अश्विनी उपाध्याय ने कहा है कि घटिया और कमजोर कानूनों के कारण भारत करप्शन परसेप्शन इंडेक्स में टॉप 50 देशों में कभी स्थान नहीं बना पाया। ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल ने इस वर्ष भारत को 80 वें स्थान पर रखा है।

अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि यदि उनकी जनहित याचिका में दाखिल पांच सुझावों को ईमानदारी से लागू किया जाए तो हर साल सात लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत होगी। उपाध्याय ने अपनी याचिका में कहा है कि केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों का इस वर्ष का कुल बजट लगभग 70 लाख करोड़ रुपये है लेकिन घूसखोरी दलाली और कमीशनखोरी के कारण कुल बजट का दस प्रतिशत अर्थात लगभग सात लाख करोड़ रुपये कालाधन बन जाएगा। केंद्र सरकार यदि सौ रुपये से बड़े नोट तत्काल बंद करे, पांच हजार रुपये ऊपर कैश लेनदेन पर रोक लगाए, पचास हजार रुपये से महंगी संपत्ति को आधार से लिंक करे, कालाधन बेनामी संपत्ति और आय से अधिक संपत्ति को शतप्रतिशत जब्त करे तथा भ्रष्टाचारियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा देने के लिए कानून बनाये तो भ्रष्टाचार समाप्त हो जाएगा और सरकार को सात लाख करोड़ रुपये की बचत होगी

अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि मौजूदा भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों में अधिकतम सजा मात्र सात साल है और यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि भ्रष्टाचारीयों की कितनी संपत्ति जब्त की जाएगी इसीलिए कालाधन, बेनामी संपत्ति और आय से अधिक संपत्ति को शत प्रतिशत जब्त करने तथा भ्रष्टाचारियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा देने के लिए तत्काल कानून बनाना नितांत आवश्यक है। भाजपा नेता ने सुप्रीम कोर्ट से इस दिशा में सरकार को उचित निर्देश देने की मांग की है।

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