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जिस स्कूल में दी जाती थी ईसाईयत की शिक्षा, वहां बच्चों का होता था शारीरिक शोषण, दिया जाता था भयावह टॉर्चर ... जमीन में दबे मिले 215 बच्चों के शव

स्कूल के अंदर बच्चों से भयानक दुर्वव्यहार किया जाता था और आवासीय स्कूल की लापरवाही और बच्चों को टॉर्चर करने की वजह से इस स्कूस में कम से कम 6000 बच्चों की मौत हो गई.

Abhay Pratap
  • Jun 10 2021 2:19PM

जिस स्कूल को देश का सबसे बड़ा आवासीय स्कूल कहा जाता था तथा जहाँ ईसाईयत की शिक्षा दी जाती थी. अब स्कूल के बारे में जो खबर सामने आई है, उससे पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया है. ये घटना कनाडा के एक स्कूल की है. खबर के मुताबिक, ईसाईयत की शिक्षा देने वाले कनाडा के सबसे बड़े आवासीय स्कूल में बच्चों के साथ अमानवीयता की जाती थी, उनका यौन शोषण किया जाता था, उनके साथ रेप किया जाता था. अब इस स्कूल में जमीन में 215 बच्चों के शव दबे पाए गए हैं, जिसमें कुछ बच्चे 3 वर्ष की आयु के भी हैं.

मई माह के अंत में जब ये खबर सामने आई तो कनाडा ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया. मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़, जमीन भेदी रडार के सहयोग से शवों का पता लगाया गया. वहां से और अधिक शवों के बरामद किए जाने की संभावना व्यक्त की गई है क्योंकि स्कूल परिसर में अभी और इलाकों की छानबीन की जानी है. मामले की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि कैमलूप्स इंडियन रेजिडेंशियल स्कूल में जो क्षति हुई है उसके बारे में सोच नहीं सकते.

1970 के दशक में चलने वाले इस स्कूल के बारे में कहा जाता था कि यहां बच्चों का पढ़ना जरूरी था और उन्हें क्रिश्चियन की शित्रा दी जाती थी और जो बच्चे क्रिश्चियन नहीं होते थे उनका धर्म परिवर्तन किया जाता था. रिपोर्ट के मुताबिक इस स्कूल में जबरन बच्चों का दाखिला करवाया जाता था. बता दें कि पांच साल पहले ट्रूथ एंड रिकंसीलिएशन कमीशन ने इस स्कूल में बच्चों से होने वाले दुर्वव्यहार को लेकर अपनी रिपोर्ट दी थी. रिपोर्ट में कहा गया था कि स्कूल के अंदर बच्चों से भयानक दुर्वव्यहार किया जाता था और आवासीय स्कूल की लापरवाही और बच्चों को टॉर्चर करने की वजह से इस स्कूस में कम से कम 6000 बच्चों की मौत हो गई. इसमें बताया गया कि कैमलूप्स स्कूल में 1915 से 1963 के बीच कम से कम 51 मौत हुई थी.

कैमलूप्स स्कूल 1890 से 1969 तक संचालित हुआ था. इसके बाद संघीय सरकार ने कैथोलिक चर्च से इसका संचालन अपने हाथों में ले लिया. यह स्कूल 1978 में बंद हो गया था. अब तक इनमें से किसी भी बच्चे की पहचान नहीं हो पाई है. बता दें कि कनाडा में कुछ क्रिश्चियन चर्चों ने ऐसे आवासीय विद्यालयों की स्थापना की थी जिनमें मूलनिवासियों के बच्चों को शिक्षा दी जाती थी. इन बच्चों को उनके माता-पिता से जबरदस्ती अलग करके उन्हें 'कथित आधुनिक जीवनशैली' का ज्ञान दिया जाता था.

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