3 अक्टूबर- 1824 में ही स्वतंत्रता का बिगुल फूंक चुके राजा विजय सिंह को आज ही मिली थी वीरगति. इस युद्ध में खड्ग भी था और ढाल भी

अभी थोड़े समय में पहले अहिंसा और बिना खड्ग बिना ढाल वाले नारों और गानों का बोलबाला था . हर

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17 सितम्बर- आज ही भारतीय फ़ौज के आगे हैदराबाद के गद्दार निजाम ने टेक दिए थे घुटने और पटेल जी ने वहाँ फहराया था तिरंगा

इतिहास की पुस्तकों में अक्सर हमें पढ़ाया गया है कि हैदराबाद के निजाम ने सरदार पटेल की धमकी के बाद

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2 सितम्बर – उस जिले में जो भी अंग्रेज DM गया उसको मार डाला. जेम्स, राबर्ट के बाद बर्ग को मार कर आज ही अमर हो गये थे अनाथ बन्धु एवं मृगेन्द्र दत्त

जानिये कौन थे वो योद्धा जिनका नाम आज इतिहास में खोजने से भी नहीं मिलता है .

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31 अगस्त – आज ही अंग्रेजों के बजाय उनके भारतीय गद्दार मुखबिर को जेल में घुस कर मारा था क्रांतिकारियों ने .. एक ऐसा इतिहास जिसे निगल गए नकली कलमकार

ये वो दिन था जिसे छिपा गए चाटुकार ..

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23 अगस्त- बलिदान दिवस उडीसा के धर्मरक्षक स्वामी लक्ष्मणानंद, जिन्हें टुकड़ों में काट दिया था विधर्मियों ने. सहिष्णुता के ठेकेदार बने रहे खामोश

जितनी बेरहमी कभी ISIS , अल कायदा के आतंकियों ने नही दिखाई होगी उस से कही ज्यादा बड़ी बेरहमी दिखाई

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6 अगस्त – जन्मदिवस क्रांतिवीर रामफल मंडल. जो फांसी से पहले बोल कर गये थे कि – “हमारा दुश्मन सीमा पार नहीं बल्कि अंदर ही है”

शत्रु की असली पहिचान थी बिहार की भूमि से जन्मे इस परम बलिदानी में …

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मंगल पाण्डेय संग एक और भारतीय सैनिक चढा था फांसी जिनका नाम आज तक कहीं नहीं लिया गया .. जानिये कौन था वो दूसरा बलिदानी – “जन्म दिवस विशेषांक”

एक ऐसा इतिहास जो आप ने सोचा भी नहीं होगा क्योकि छिपाया गया है आप से .

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क्या क्यों पहनते थे हमारे पूर्वज चरण पादुका कही जाने वाली वो “खड़ाऊँ” .. पढ़िए इसे वैज्ञानिक लाभ और ” गर्व से कहो हम हिन्दू हैं “

जिस वैज्ञानिकता के आस पास भी नही है वतर्मान वो हमारे पूर्वज अतीत में प्राप्त कर चुके थे ..

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20 जून – पहले खुद बलिदान हुए , फिर पत्नी लड़ कर अमर हुई और बाद में बहन भी. अंत मे दो बेटियों की लाशों को घसीटा गया पूरे बगदाद में .. बलिदान दिवस मोहम्मद बिन कासिम से लड़े हिन्दू नरेश दाहिरसेन

अफसोस इनका नाम ही मिटा दिया नकली कलमकारों ने ..

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19 जून- केवल 12 साल की उम्र में हंसिया ले कर वो लड़ गयी अंग्रेजो की बंदूकों से और फिर अमर हो गयी .. बलिदान दिवस वीर बालिका “कालीबाई’

ये वो रणचंडी थी जिसका नाम तक नहीं लिखा नकली कलमकारों ने .

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