3 अक्टूबर- 1824 में ही स्वतंत्रता का बिगुल फूंक चुके राजा विजय सिंह को आज ही मिली थी वीरगति. इस युद्ध में खड्ग भी था और ढाल भी

अभी थोड़े समय में पहले अहिंसा और बिना खड्ग बिना ढाल वाले नारों और गानों का बोलबाला था . हर

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2 सितम्बर – उस जिले में जो भी अंग्रेज DM गया उसको मार डाला. जेम्स, राबर्ट के बाद बर्ग को मार कर आज ही अमर हो गये थे अनाथ बन्धु एवं मृगेन्द्र दत्त

जानिये कौन थे वो योद्धा जिनका नाम आज इतिहास में खोजने से भी नहीं मिलता है .

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6 अगस्त – जन्मदिवस क्रांतिवीर रामफल मंडल. जो फांसी से पहले बोल कर गये थे कि – “हमारा दुश्मन सीमा पार नहीं बल्कि अंदर ही है”

शत्रु की असली पहिचान थी बिहार की भूमि से जन्मे इस परम बलिदानी में …

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24 जुलाई – #बलिदान_दिवस पर नमन है अंग्रेजो की जड़ें हिला देने वाले उस वीर चैन सिंह को जिन्हें कहा जाता है मध्यप्रदेश का मंगल पाण्डेय

बिना खड्ग बिना ढाल के नहीं चैन का जीवन ही तलवारों के साथ बीता था ..

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24 जून – लम्पट, कामुक और अत्याचारी अकबर से भिड कर आज ही वीरगति को प्राप्त हो गयी थी नारी शक्ति की प्रतीक रानी दुर्गावती

अफ़सोस ये रहा कि इतिहासकारों ने इनके बजाय केवल अकबर के गुण गाये .

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20 जून – पहले खुद बलिदान हुए , फिर पत्नी लड़ कर अमर हुई और बाद में बहन भी. अंत मे दो बेटियों की लाशों को घसीटा गया पूरे बगदाद में .. बलिदान दिवस मोहम्मद बिन कासिम से लड़े हिन्दू नरेश दाहिरसेन

अफसोस इनका नाम ही मिटा दिया नकली कलमकारों ने ..

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15 जून- आज ही अमृतसर में गौ कत्लखाने पर धावा बोल कर पराक्रमी सरदारों ने मुक्त कराये थे सैकड़ों गौ वंश. इसी को बोला गया था “कूका विद्रोह” जिसमे तोपों से लड़ी थी भुजाएं

ये वो जंग थी जिसे हर भारतीय को जानना है बेहद जरूरी .

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जिन युद्धों में विदेशी लुटरों से भारतीय हारे उन्हें इतनी लगन से क्यों पढ़ाया जा रहा भारत के इतिहास में ? पहली बार उठा है सवाल और मांग हुई इसे खत्म करने की

ये भारत के इतिहास का पुनर्लेखन होगा अगर इस पर कार्य हुआ तो .

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वीर सावरकर जी के लिए उमड़े राष्ट्रवादियो के प्रेम को बर्दाश्त नहीं कर पाया जिन्ना भक्त हामिद अंसारी और उगल दिया जहर

सच्चा इतिहास हजम नहीं हो रहा अंसारी जैसे कट्टरपंथियों को

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भारत का इतिहास ऐसे लिखा गया जैसे “मुगल काल” से सृष्टि शुरू हुई और 2014 में खत्म हो गयी .. कहाँ गए हर्षवर्धन, चन्द्रगुप्त, पुष्यमित्र, राजा भोज ?

इनके ही पापो के चलते राष्ट्र वंचित रह गया सच जानने से ..

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